शिवपुरी। मध्य प्रदेश बोर्ड के परीक्षा परिणाम आते ही खनियाधाना के संदीपनी विद्यालय में जो हाई-वोल्टेज ड्रामा हुआ, उसके पीछे अब गहरी साजिश और भ्रष्टाचार के संकेत मिल रहे हैं। स्कूल की पांचवीं मंजिल पर चढ़कर जान देने की धमकी देने वाले छात्रों अनुज झा और सनम यादव के आरोपों ने स्कूल की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अंकों का गणित या भेदभाव का खेल
मामले की गंभीरता केवल कम अंकों तक सीमित नहीं है। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि उन्होंने समय सीमा के भीतर अपने प्रोजेक्ट जमा कर दिए थे, जबकि अब इसे देरी का बहाना बनाकर दबाया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाला खुलासा उपस्थिति (Attendance) घोटाले और अप्रवासी (Non-resident) छात्रों को लेकर हुआ है।
फर्जी एडमिशन और रसूखदारों को लाभ
सूत्रों और प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, स्कूल में ऐसे कई डमी छात्र नामांकित हैं जो असल में इंदौर या अन्य बड़े शहरों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति खनियांधाना के इस स्कूल में दर्ज की जा रही है। आरोप है कि शिक्षकों के अपने बच्चों और रसूखदारों के परिजनों को लाभ पहुँचाने के लिए स्थानीय छात्रों के अंकों के साथ भेदभाव किया गया है।
इस मामले मे यह सवाल खडे हो रह है कि यदि छात्र बाहर पढ़ रहे हैं, तो स्कूल के हाजिरी रजिस्टर में उनकी उपस्थिति कैसे दर्ज हो रही है? क्या स्थानीय छात्रों के प्रोजेक्ट मार्क्स काटकर इन खास बाहरी छात्रों का ग्राफ बढ़ाया गया है? समय पर प्रोजेक्ट जमा होने के बावजूद रिकॉर्ड में देरी क्यों दिखाई गई?
बुधवार को करीब एक घंटे चले इस हंगामे के बाद तहसीलदार और पुलिस प्रशासन ने छात्रों को नीचे तो उतार लिया, लेकिन असंतोष की आग अभी ठंडी नहीं हुई है। ABVP ने चेतावनी दी है कि यदि इस उपस्थिति और अंक घोटाले' की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और फर्जी तरीके से पढ़ रहे छात्रों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला स्तर पर उग्र प्रदर्शन करेंगे।
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