womens day, सम्मान के मंच पर पद और प्रतिष्ठा को स्थान, लेकिन पर्यावरण मित्रों के लिए सन्नाटा क्यों

Adhiraj Awasthi

काजल सिकरवार @ शिवपुरी। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है,आज को दिन महिलाओं को समर्पित हैं,आज महिलाओं के सम्मान का दिन है और अब आने वाले 2 या 3 दिन तक महिलाओं के सम्मान मे मंच भी सजाए जाएगा,लेकिन मंचो पर प्रशासनिक क्षेत्र,सामाजिक क्षेत्र और राजनीतिक पदों पर बैठी महिलाओं का स्थान मिलेगा,यह वह महिलाए है जो साल भर ऐसे मंचो की शोभा बढ़ाती है,हम किसी महिला का विरोध नही करते है,लेकिन हमारे समाज में एक ऐसी महिलाओं का एक वर्ग अदृश्य रहता है जिनकी हमे प्रतिदिन आवश्यकता होती है,अगर यह महिलाएं अपना काम नहीं करे तो आप और आपके आस पास का पर्यावरण संकट में आ सकता है।

हम बात कर रहे है स्वयं को गंदा कर आपकी स्वच्छता भरा जीवन देने वाली सफाई करने वाली महिला कर्मचारियों की। नगर पालिका की यह महिला कर्मचारी हाथ में झाडू लेकर प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व ही अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंच जाती है। यह महिला कर्मचारी अपना झाड़ू लेकर सडको की सफाई का काम करती है,और घर के कचरे को उठाकर आपके आस-पडोस को स्वच्छ रखती है।

शिवपुरी नगर पालिका में लगभग 280 महिला सफाई कर्मचारी है,इनके कंधो पर पर शिवपुरी नगर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी है। उक्त सफाई कर्मी महिलाएं सिर्फ नगर पालिका की कर्मचारी नहीं हैं,बल्कि वह पर्यावरण मित्र है। उनके काम के कारण ही हमारा घर हमारी गली मोहल्ले और सडके स्वच्छ रहती है।

अगर यह सफाई कर्मचारी काम पर नही आए तो सड़कों पर जमा कूड़ा-करकट सडने लगेगा, ओर सडकर सडांध मारने लगेगा,बीमारी भी पनपने लगेगा। एक गंदा शहर कभी भी निवेश या पर्यटन को आकर्षित नहीं कर सकता। गंदगी के कारण स्थानीय व्यापार प्रभावित होता है और शहर की छवि एक पिछड़े क्षेत्र के रूप में बनने लगती है,कुल मिलाकर इन सफाई कर्मियो को सार्वजनिक रूप से मंचो पर सममान नही मिला है।

महिला दिवस का असली उत्सव तब होगा, जब समाज इन महिला सफाई कर्मियों को सम्मान मिलेगा, वह गरिमा देगा जिसकी वे हकदार हैं। मंचों की शोभा बढ़ाने वाली वीआईपी महिलाओं के बीच अगर  सफाई कर्मी महिला का भी सम्मान हो, तो शिवपुरी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा।