शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पोहरी विकासखंड के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक विद्यालय आदिवासी मोहल्ला सेमरखेड़ी में पदस्थ शिक्षक साकेत पुरोहित को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करने और आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पिछोर विधायक प्रीतम लोधी द्वारा की गई शिकायत के बाद शिक्षा विभाग द्वारा की गई है।
यह हैं पूरा मामला
जानकारी के अनुसार शिक्षक साकेत पुरोहित ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा की थी, जिसमें वे प्रधानमंत्री के भाषण की शैली की नकल करते हुए कुछ टिप्पणियां कर रहे थे। विधायक प्रीतम लोधी ने इसे जनप्रतिनिधि और देश के सर्वोच्च पद का अपमान बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
शिक्षक ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
माननीय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम
मैं, साकेत पुरोहित....एक साधारण शिक्षक, एक संवेदनशील नागरिक और इस देश के भविष्य को गढ़ने का छोटा-सा प्रयास करने वाला व्यक्ति। आज अत्यंत भारी मन से आपको यह पाती लिख रहा हूँ। शब्द तो मेरे पास हैं, परंतु मन की पीड़ा इतनी गहरी है कि उसे व्यक्त करना भी कठिन हो रहा है।
एक शिक्षक होने के नाते मेरा दायित्व केवल किताबों तक सीमित नहीं है। मैं अपने विद्यार्थियों और लोगों को जीवन की सच्चाइयाँ, मुस्कान की ताकत, और सरलता में छिपी सुंदरता सिखाने का प्रयास करता हूँ। उसी भावना से, उसी निष्कपट मन से, मैंने एक वीडियो में अपनी शैली में कुछ बातें कहीं ताकि लोग मुस्कुराएँ, कुछ सीखें, और चूल्हे की रोटी जैसे सरल विषय में भी जीवन का मूल्य समझ सकें।
परंतु माननीय महोदय, मेरा वही प्रयास आज मेरे लिए पीड़ा का कारण बन गया। जिस भाव से मैंने लोगों को जोड़ा, उसी के कारण मुझे निलंबन जैसी कठोर सजा दी गई। क्या एक शिक्षक का मुस्कुराना, हँसाना, और अपने विचारों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करना अब अपराध हो गया है?
आपने "मन की बात" के माध्यम से देश के हर नागरिक को यह साहस दिया कि वह अपनी बात कह सके। आपने हमें सिखाया कि अभिव्यक्ति केवल अधिकार नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ है। मैंने भी उसी प्रेरणा से, उसी विश्वास के साथ अपनी बात कही, परंतु आज वही आवाज़ दबा दी गई।
मुझे सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि यह कार्रवाई आपके नाम और आपकी छवि का सहारा लेकर की गई। क्या वास्तव में यह आपके विचारों, आपके आदर्शों और उस लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप है, जिसे आप सदैव आगे बढ़ाते रहे हैं?
मैं टूटना नहीं चाहता, क्योंकि मैं शिक्षक हूँ और शिक्षक कभी हार नहीं मानता। लेकिन आज मैं आहत अवश्य हूँ। मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुँची है, मेरी नीयत, चाल, चरित्र तक पर सवाल उठाए गए हैं और मेरे उस प्रयास को सजा दी गई है जो केवल सकारात्मकता फैलाने के लिए था।
माननीय प्रधानमंत्री जी, मैं आपसे केवल न्याय की अपेक्षा नहीं कर रहा... मैं आपसे विश्वास की पुनर्स्थापना की विनती कर रहा हूँ। कृपया इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी शिक्षक या नागरिक की आवाज़ को केवल इसलिए न दबाया जाए क्योंकि उसने कुछ अलग ढंग से अपनी बात कह दी।
मैं आज भी उसी विश्वास के साथ खड़ा हूँ कि इस देश में सच्चाई सुनी जाती है और न्याय मिलता है। मुझे भरोसा है कि आप मेरी इस पीड़ा को समझेंगे और एक शिक्षक के सम्मान की रक्षा करेंगे।
यह हैं पूरा मामला
जानकारी के अनुसार शिक्षक साकेत पुरोहित ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप साझा की थी, जिसमें वे प्रधानमंत्री के भाषण की शैली की नकल करते हुए कुछ टिप्पणियां कर रहे थे। विधायक प्रीतम लोधी ने इसे जनप्रतिनिधि और देश के सर्वोच्च पद का अपमान बताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
शिक्षक ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
माननीय प्रधानमंत्री जी,
सादर प्रणाम
मैं, साकेत पुरोहित....एक साधारण शिक्षक, एक संवेदनशील नागरिक और इस देश के भविष्य को गढ़ने का छोटा-सा प्रयास करने वाला व्यक्ति। आज अत्यंत भारी मन से आपको यह पाती लिख रहा हूँ। शब्द तो मेरे पास हैं, परंतु मन की पीड़ा इतनी गहरी है कि उसे व्यक्त करना भी कठिन हो रहा है।
एक शिक्षक होने के नाते मेरा दायित्व केवल किताबों तक सीमित नहीं है। मैं अपने विद्यार्थियों और लोगों को जीवन की सच्चाइयाँ, मुस्कान की ताकत, और सरलता में छिपी सुंदरता सिखाने का प्रयास करता हूँ। उसी भावना से, उसी निष्कपट मन से, मैंने एक वीडियो में अपनी शैली में कुछ बातें कहीं ताकि लोग मुस्कुराएँ, कुछ सीखें, और चूल्हे की रोटी जैसे सरल विषय में भी जीवन का मूल्य समझ सकें।
परंतु माननीय महोदय, मेरा वही प्रयास आज मेरे लिए पीड़ा का कारण बन गया। जिस भाव से मैंने लोगों को जोड़ा, उसी के कारण मुझे निलंबन जैसी कठोर सजा दी गई। क्या एक शिक्षक का मुस्कुराना, हँसाना, और अपने विचारों को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करना अब अपराध हो गया है?
आपने "मन की बात" के माध्यम से देश के हर नागरिक को यह साहस दिया कि वह अपनी बात कह सके। आपने हमें सिखाया कि अभिव्यक्ति केवल अधिकार नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ है। मैंने भी उसी प्रेरणा से, उसी विश्वास के साथ अपनी बात कही, परंतु आज वही आवाज़ दबा दी गई।
मुझे सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि यह कार्रवाई आपके नाम और आपकी छवि का सहारा लेकर की गई। क्या वास्तव में यह आपके विचारों, आपके आदर्शों और उस लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप है, जिसे आप सदैव आगे बढ़ाते रहे हैं?
मैं टूटना नहीं चाहता, क्योंकि मैं शिक्षक हूँ और शिक्षक कभी हार नहीं मानता। लेकिन आज मैं आहत अवश्य हूँ। मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुँची है, मेरी नीयत, चाल, चरित्र तक पर सवाल उठाए गए हैं और मेरे उस प्रयास को सजा दी गई है जो केवल सकारात्मकता फैलाने के लिए था।
माननीय प्रधानमंत्री जी, मैं आपसे केवल न्याय की अपेक्षा नहीं कर रहा... मैं आपसे विश्वास की पुनर्स्थापना की विनती कर रहा हूँ। कृपया इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी शिक्षक या नागरिक की आवाज़ को केवल इसलिए न दबाया जाए क्योंकि उसने कुछ अलग ढंग से अपनी बात कह दी।
मैं आज भी उसी विश्वास के साथ खड़ा हूँ कि इस देश में सच्चाई सुनी जाती है और न्याय मिलता है। मुझे भरोसा है कि आप मेरी इस पीड़ा को समझेंगे और एक शिक्षक के सम्मान की रक्षा करेंगे।