शिवपुरी। मड़ीखेड़ा डेम निर्माण के दौरान विस्थापित किए गए गांवों में शुमार अमोला गांव बीस साल पहले विस्थापित हो चुका है, परंतु बिजली कंपनी अभी भी जलमग्न गांव के रहवासियों को बिजली की सप्लाई कर रही है। बिजली बिल का भुगतान न करने पर इनके मामले अदालत की चौखट पर ले जाए गए हैं और उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। खास बात यह है जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं उनमें से कई लोग तो स्वर्गवासी तक हो चुके हैं।
Power company's 'miracle' in Shivpuri: Notices for outstanding payments sent to a village submerged two decades ago
उल्लेखनीय है कि अमौला गांव को 2006 में मड़ीखेड़ा डैम के डूब क्षेत्र में आने के कारण विस्थापित किया गया था। इस गांव के विस्थापन को 20 साल बीत चुके हैं। गांव मड़ीखेड़ा डेम में जलमग्न हो चुका है। इसके बावजूद बिजली कंपनी दस्तावेजों में उस जलमग्न गांव में बिजली सप्लाई कर रही है।
सालों से वहां के बिजली बिल का भुगतान न करने पर करीब 23 लोगों को बिल भुगतान के लिए नेशनल लोक अदालत के नोटिस तक जारी किए गए हैं। लोगों का कहना है कि जिस समय हमें गांव से विस्थापित किया गया था, उस समय विस्थापन के एवज में मिली मुआवजा राशि में से हमारे बिल सहित अन्य शासकीय बकाया काट कर विस्थापन की राशि का भुगतान किया हो चुके है। उनके जाने के बाद अचानक से यह बिजली का कौन सा बकाया बिल सामने आ गया पता नहीं।
मुझे बिजली कंपनी ने 1 लाख 15 हजार रुपये के बिल का नोटिस भेजा है, यह बिजली का बिल पुराने अमोला का है, जिसका भुगतान शासन ने विस्थापन की राशि से काट लिया था। अब 20 साल बाद यह कौन सा नोटिस है, समझ से परे है। प्रदीप गुप्ता, अगोला प्रक्रमांक-2
मेरे मकान का बिजली कनेक्शन मेरे नाम पर है। मेरे पिताजी रामदास सेन का स्वर्गवास हुए एक साल से अधिक समय हो चुका है। हमें अमोला गांव छोड़े डी 20 साल हो चुके हैं, अब हमें आखिर कौन से बिल भुगतान करना है, हमें समझ नहीं आ रहा है। सोनू सेन, अमोला क्रमांक-2
यह तो जांच का विषय हो गया है कि बिजली बिल भुगतान हुआ था या नहीं अथवा पूरा मामला क्या है। हम प्रकरण की जांच करवा लेंगे और जो भी उचित होगा, उस तरह की कार्रवाई की जाएगी।
संदीप कालरा, एसई, बिजली कंपनी
