कालज सिकरवार @ शिवपुरी। इजरायल अमेरिका और ईरान के युद्ध के कारण भारत की एनर्जी की लाइन पर रुकावट आ चुकी है इसलिए कमर्शियल गैस बंद हो चुकी है अब केवल रसोई वाली एलपीजी गैस की सप्लाई हो रही है। इस कारण होटल और चाट ठेलो वाले पर संकट आ चुका है,लेकिन इस संकट के समय मे देशी व्यंजनों के ठाठ हो चुके और चाइनीज व्यंजन मैदान से गायब हो चुके है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रुकने के कारण चाट ठेले वाले को रोजगार ठप हो गया है,ई ठेले वाले अपना काम बंद कर दिया है वही कई चाट के ठेले वाले अब वापस अपने रोजगार पर वापस लौट चुके है। इन ठेल वालो ने बताया कि हम 30 साल पुरानी लकड़ी की भट्टी पर लौट आए है अब हम भट्टी पर अपना माल बना रहे है।
वही इस संकट में चाउमीन,इटली और डोसा और चाइनीज फूड बनाकर बेचने वाले दुकानदार मैदान से गायब हो चुके है कारण सिर्फ एक है कि यह सभी फूड केवल गैस पर ही बन सकते है लकडी की देशी भठ्ठी पर इनको नहीं बनाया जा सकता है। अब बाजार के ठेलो पर समोसा कचौड़ी,बेडई,पकौड़े और जलेबी मुस्करा रही है और चाइनीज फूड मैदान से गायब हो चुके है।
गैस सिलेंडर से इंडक्शन पर आये दुकानदार-लेकिन नहीं आ पा रहा यूज में
वहीं शहर के फिजिकल स्थित संवेल के पास बनी चौपाटी भी खाली पड़ी हुई हैं इसका कारण है महंगा गैस सिलेंडर,हालांकि कुछ लोगों ने गैस सिलेंडर की जगह इंडक्शन को सिलेंडर भी इनकी पहुंच से काफी दूर उपयोग में लेना शुरू किया है, लेकिन यह दुकानदार अपने ठेले पर इंडक्शन का उपयोग नहीं कर सकते, क्योंकि उसके लिए बिजली नहीं मिलती और इतना बड़ा काम इंडक्शन पर संभव नहीं होता।
कस्टम गेट पर लगे ठेले बंद
वहीं अगर कस्टम गेट पर लगी लगभग 20 दुकानों की अलग-अलग चाट व्यंजन के ठेले की बात करें तो कुछ ठेले तो बंद हो चुके है और कुछ दुकानदारों का कहना है कि उनके पास भी एक या दो दिन की गैस बची है। दुकानदार नीरज लखेरा, गोपाल यादव आदि ने बताया कि यह भी गैस खत्म होने के बाद अपना ठेला बंद कर देंगे। इस समय पहले तो सिलेंडर आसानी से मिल रहे और ज्यादा मशक्कत करो तो 1600 या 2200 रुपए तक सिलेंडर के लिए जा रहे है। इसलिए जब हालात सही होंगे तब फिर काम धंधा शुरू कर लेंगे।
होटलों में घरेलू सिलेंडर का उपयोग
वहीं बता दें कि इस समय गैस सिलेंडर की इतनी किल्लत हो रही हैं कि स्थिति यह आन पड़ी हैं कि होटल संचालकों को आज अपने घर के सिलेंडरों का यूज करना पड़ रहा है,लेकिन आखिरकार कब तक यह घरेलू सिलेंडरों चलेंगे। होटलों पर तो लोग बागों का रोज का आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में दुकानदारों का हमेशा यह डर सताता है कि कब गैस सिलेंडर खत्म हो जाये।
वैसे तो नियम है कि सभी होटलों में कमर्शियल सिलेंडर लगना चाहिए, लेकिन युद्ध के बाद से कमर्शियल सिलेंडर मिलना ही बंद हो गए तो अब यह होटल संचालक सीधे तौर पर घरेलू सिलेंडर का ही उपयोग कर रहे है। वह अलग बात है कि इन लोगों को भी यह सिलेंडर 2 हजार रुपए में ही ब्लैक में लेना पड़ रहा है। कुछ होटल व मंडी में मौजूद कैंन्टीन गैस सिलेंडर न होने से बंद हो गए है। होटल संचालकों का कहना है कि अगर दो या चार दिन में इस समस्या का निदान नहीं हुआ तो जल्द ही होटलों पर भी ताला डालना पड़ेगा,या फिर लकडी के गट्टो की भट्टी या डीजल भट्टी की ओर लौटना पडेगा।
यह बोले दुकानदार
मैने तो अपना ठेला ही बंद कर दिया। हालांकि हम परिवार के तीन लोग मिलकर ठेले पर काम करते थे और दिनभर में तीनो की मजदूरी निकल जाती थी। अब सिलेंडर ही 2 हजार रुपए का बड़ी मुश्किल से मिल रहा है। इसलिए काम बंद है। पर दिक्कत यह है कि काम कब तक बंद रखेंगे। कर्जा लेकर घर खर्च चलाना पड़ रहा है।
गोपाल यादव स्टोल स्थान कस्टम गेट ने बताया कि हमारे पास वो दिन काम चलाने के लिए गैस बची है। गैस खत्म होने पर हम भी अपनी दुकान बंद कर देगें। इतना महंगा सिलेंडर खरीद कर दुकान चलाना तो बहुत मुश्किल है। दूसरा कोई विकल्प है नही। स्थिति बहुत खराब है। यह सभी समझ में नहीं आ रहा आखिर इस समस्या का निदान कब तक होगा।
गौरीशंकर बाथम संजय कॉलोनी
अभी कमर्शियल सिलेंडर के लिए वरिष्ठ कार्यालय से कोई आदेश नहीं आया है। घरेलू सिलेंडर की अभी हम लोग बुकिंग कर सिलेंडर पहुंचा रहे है। जैसा की सभी को पता है कि अभी युद्ध चल रहा है। जब हालात सामान्य होंगे, तभी यह गैस की दिक्कत से निजात मिल पाएगी।
तुलेश्वर कुर्रे, जिला खाद्य अधिकारी
कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रुकने के कारण चाट ठेले वाले को रोजगार ठप हो गया है,ई ठेले वाले अपना काम बंद कर दिया है वही कई चाट के ठेले वाले अब वापस अपने रोजगार पर वापस लौट चुके है। इन ठेल वालो ने बताया कि हम 30 साल पुरानी लकड़ी की भट्टी पर लौट आए है अब हम भट्टी पर अपना माल बना रहे है।
वही इस संकट में चाउमीन,इटली और डोसा और चाइनीज फूड बनाकर बेचने वाले दुकानदार मैदान से गायब हो चुके है कारण सिर्फ एक है कि यह सभी फूड केवल गैस पर ही बन सकते है लकडी की देशी भठ्ठी पर इनको नहीं बनाया जा सकता है। अब बाजार के ठेलो पर समोसा कचौड़ी,बेडई,पकौड़े और जलेबी मुस्करा रही है और चाइनीज फूड मैदान से गायब हो चुके है।
गैस सिलेंडर से इंडक्शन पर आये दुकानदार-लेकिन नहीं आ पा रहा यूज में
वहीं शहर के फिजिकल स्थित संवेल के पास बनी चौपाटी भी खाली पड़ी हुई हैं इसका कारण है महंगा गैस सिलेंडर,हालांकि कुछ लोगों ने गैस सिलेंडर की जगह इंडक्शन को सिलेंडर भी इनकी पहुंच से काफी दूर उपयोग में लेना शुरू किया है, लेकिन यह दुकानदार अपने ठेले पर इंडक्शन का उपयोग नहीं कर सकते, क्योंकि उसके लिए बिजली नहीं मिलती और इतना बड़ा काम इंडक्शन पर संभव नहीं होता।
कस्टम गेट पर लगे ठेले बंद
वहीं अगर कस्टम गेट पर लगी लगभग 20 दुकानों की अलग-अलग चाट व्यंजन के ठेले की बात करें तो कुछ ठेले तो बंद हो चुके है और कुछ दुकानदारों का कहना है कि उनके पास भी एक या दो दिन की गैस बची है। दुकानदार नीरज लखेरा, गोपाल यादव आदि ने बताया कि यह भी गैस खत्म होने के बाद अपना ठेला बंद कर देंगे। इस समय पहले तो सिलेंडर आसानी से मिल रहे और ज्यादा मशक्कत करो तो 1600 या 2200 रुपए तक सिलेंडर के लिए जा रहे है। इसलिए जब हालात सही होंगे तब फिर काम धंधा शुरू कर लेंगे।
होटलों में घरेलू सिलेंडर का उपयोग
वहीं बता दें कि इस समय गैस सिलेंडर की इतनी किल्लत हो रही हैं कि स्थिति यह आन पड़ी हैं कि होटल संचालकों को आज अपने घर के सिलेंडरों का यूज करना पड़ रहा है,लेकिन आखिरकार कब तक यह घरेलू सिलेंडरों चलेंगे। होटलों पर तो लोग बागों का रोज का आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में दुकानदारों का हमेशा यह डर सताता है कि कब गैस सिलेंडर खत्म हो जाये।
वैसे तो नियम है कि सभी होटलों में कमर्शियल सिलेंडर लगना चाहिए, लेकिन युद्ध के बाद से कमर्शियल सिलेंडर मिलना ही बंद हो गए तो अब यह होटल संचालक सीधे तौर पर घरेलू सिलेंडर का ही उपयोग कर रहे है। वह अलग बात है कि इन लोगों को भी यह सिलेंडर 2 हजार रुपए में ही ब्लैक में लेना पड़ रहा है। कुछ होटल व मंडी में मौजूद कैंन्टीन गैस सिलेंडर न होने से बंद हो गए है। होटल संचालकों का कहना है कि अगर दो या चार दिन में इस समस्या का निदान नहीं हुआ तो जल्द ही होटलों पर भी ताला डालना पड़ेगा,या फिर लकडी के गट्टो की भट्टी या डीजल भट्टी की ओर लौटना पडेगा।
यह बोले दुकानदार
मैने तो अपना ठेला ही बंद कर दिया। हालांकि हम परिवार के तीन लोग मिलकर ठेले पर काम करते थे और दिनभर में तीनो की मजदूरी निकल जाती थी। अब सिलेंडर ही 2 हजार रुपए का बड़ी मुश्किल से मिल रहा है। इसलिए काम बंद है। पर दिक्कत यह है कि काम कब तक बंद रखेंगे। कर्जा लेकर घर खर्च चलाना पड़ रहा है।
गोपाल यादव स्टोल स्थान कस्टम गेट ने बताया कि हमारे पास वो दिन काम चलाने के लिए गैस बची है। गैस खत्म होने पर हम भी अपनी दुकान बंद कर देगें। इतना महंगा सिलेंडर खरीद कर दुकान चलाना तो बहुत मुश्किल है। दूसरा कोई विकल्प है नही। स्थिति बहुत खराब है। यह सभी समझ में नहीं आ रहा आखिर इस समस्या का निदान कब तक होगा।
गौरीशंकर बाथम संजय कॉलोनी
अभी कमर्शियल सिलेंडर के लिए वरिष्ठ कार्यालय से कोई आदेश नहीं आया है। घरेलू सिलेंडर की अभी हम लोग बुकिंग कर सिलेंडर पहुंचा रहे है। जैसा की सभी को पता है कि अभी युद्ध चल रहा है। जब हालात सामान्य होंगे, तभी यह गैस की दिक्कत से निजात मिल पाएगी।
तुलेश्वर कुर्रे, जिला खाद्य अधिकारी