शिवपुरी जिले के 1638 शिक्षकों पर लटकी नौकरी जाने की तलवार, देना होगा TET टेस्ट, पढ़िए क्यों

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक को टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है। इस परीक्षा की गाइडलाइन भी तैयार कर दी है। अब शिवपुरी जिले में पदस्थ 1638 शिक्षक को TET (Teacher Eligibility Test) की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। इस परीक्षा की घोषणा होने के बाद शिवपुरी जिले के शिक्षा विभाग का मैदानी अमला टेंशन में आ गया है। ऐसे शिक्षक जो इस परीक्षा की अग्निपरिक्षा से गुजरेंगे वह इस टेस्ट में सफल नहीं हो पाते तो उनको अपनी नौकरी से हाथ धोना होगा।

Jobs of 1,638 teachers in Shivpuri district at risk; they will have to take the TET.

जानकारी मिल रही है कि शिवपुरी जिले में अब शिवपुरी के 1,638 शिक्षकों को परीक्षा देकर अपनी योग्यता साबित करनी होगी। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर शिक्षक यह परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें सेवा से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है।

कौन से शिक्षक को देनी होगा होगा टेस्ट

इस आदेश की जद में वे शिक्षक आ रहे हैं जिन्होंने अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं की है। इसमे वह शिक्षक है जिनकी अनुकंपा नियुक्ति हुई है,इस टेस्ट से उन शिक्षकों को भी गुजरना होगा जिन्होंने बिना TET पास किए उच्च पदों पर प्रमोशन लिया और वह शिक्षक है जो लंबे समय से प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पदस्थ हैं।

857 को मिली छूट
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई सूची के अनुसार, 6 मई 2008 से पहले के कुल 2,495 शिक्षक पदस्थ हैं। इनमें से 857 शिक्षकों को इस परीक्षा से राहत दी गई है। राहत का आधार सेवानिवृत्ति  है, जिन शिक्षकों की सेवा के मात्र 5 वर्ष शेष बचे हैं, उन्हें इस तनावपूर्ण परीक्षा से गुजरना नहीं पड़ेगा।

प्रशासनिक तैयारी और विरोध
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विवेक श्रीवास्तव ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश जारी कर उन शिक्षकों की संकुलवार सूची मांगी है जिन्होंने अब तक पात्रता परीक्षा नहीं दी है।

दूसरी ओर, इस आदेश ने शिक्षक संगठनों को लामबंद कर दिया है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रमुख राजेंद्र पिपलोदा का तर्क है कि पुराने भर्ती सेवा अधिनियमों में TET का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब एक प्रतिनिधि मंडल इस संबंध में शिक्षा मंत्री और प्रमुख सचिव से मुलाकात करने की तैयारी कर रहा है।

1988 से 2018 तक का सफर
इतिहास देखें तो 1988 में सीधी भर्ती से लेकर 2018 के नए राजपत्र तक, भर्ती के नियमों में कई बदलाव हुए। 1998 के शिक्षाकर्मी अधिनियम और 2008 के अध्यापक कैडर के समय पात्रता परीक्षा की वैसी अनिवार्यता नहीं थी जैसी आज है। 2018 में नए संवर्ग के गठन के बाद नियमों को कड़ा किया गया है।