हिंदू नववर्ष के प्रथम श्रृंगार के किजिए भगवान विष्णु के दर्शन, सृष्टि के सृजन चक्र जीवंत उदाहरण है

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। सनातन हिंदू धर्म मे आज का दिन विशेष महत्वपूर्ण है,आज नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 का प्रथम दिन है,आज से हिंदू नववर्ष शुरू हो रहा है। सामान्यतः:इस दिन को गुड़ी पर्वा कहा जाता है और माना जाता है कि आज से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। आज से चैत्र नवरात्रि का भी श्रीगणेश होता हैं,आज से जहां माता के मंदिरों पर भक्तों की भीड बढ जाती है,वही आज गुरुवार का दिन होने के कारण आज शिवपुरी के भगवान विष्णु मंदिर पर आकर्षक और विशेष श्रृंगार किया गया है।

 शिवपुरी शहर के छत्री रोड पर स्थित विष्णु मंदिर में देश की एकमात्र प्रतिमा है जो सृष्टि के सृजन चक्र हो दर्शाता है। इस मंदिर में भगवान श्रीमन नारायण शयन मुद्रा में हैं,और उनकी नाभि से कमल का उदय होते हुए श्री ब्रह्मा जी विराजमान है और वही श्रीहरि के श्रीचरणों को दबा रही है। सृष्टि के सृजन चक्र को इसलिए यह दर्शाती है कि हमारे पुराणों के अनुसार ब्रह्मा ने ही इस सृष्टि की रचना की है।

शिवपुरी के इस विष्णु मंदिर पर हर गुरुवार को भक्तों की अधिक भीड़ होती है आज नववर्ष का प्रथम दिन होने के कारण और गुरुवार होने के कारण आम गुरुवार से अधिक भीड थी। शिवपुरी के विष्णु मंदिर मे भगवान सत्यनारायण की प्रतिमा  शैषयायी मुद्रा में है। यह चारों प्रतिमा एकाशिला है अर्थात एक शिला से प्रतिमा को उकेरा गया है। यह प्रतिमा दक्षिण भारत से लगभग 8 दशक पूर्व लाई गई थी। इस मंदिर की पूजा पाठ की व्यवस्था शुरुआत से शिवपुरी शहर में निवास करने वाले भार्गव परिवार के मुखिया स्व:श्री राम गोपाल भार्गव ने की थी,उनके देहावसान के बाद यह जिम्मेदारी सुशील कुमार उर्फ सनत कुमार भार्गव महाराज जी संभाल रहे है।

 मंदिर के मुख्य पुजारी श्री सुशील कुमार महाराज का कहना है कि इस सृष्टि के पालनहार श्री हरि यह शेष शय्या पर शयन मुद्रा में है,इस प्रतिमा में इस पृथ्वी का भार उठाने वाले शेषनाग के पांच फन के स्पष्ट दर्शन होते है। यह प्रतिमा दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों के प्रतिमाओ जैसी काले पत्थर से निर्मित है। भगवान यहां दक्षिणमुखी होकर विराजमान है।

सत्यनारायण भगवान की इस प्रतिमा की ऊंचाई की लगभग साढ़े पांच फुट है और लंबाई 10 फुट है। यह प्रतिमा दक्षिण भारत से शिवपुरी लाई गई थी। इस मंदिर के सबसे बडी यह विशेषता है कि लक्ष्मीपति से जिसने हृदय जो मांगा है वह उसने दिया है,वही मुख्य पुजारी का कहना है कि भक्त अपने आराध्य हो अपने चित्त ओर मन में अनुभव करता है यहां प्रत्येक क्षण श्रीहरि के होने का मुझे अनुभव होता है।