शिवपुरी में करोड़ों की वन भूमि पर कब्जे की कोशिश, विभाग ने मामला दर्ज कर पट्टे निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी

Adhiraj Awasthi

राजेंद्र बाथम @ शिवपुरी। शिवपुरी जिले में सक्रिय हुए भूमाफियो की चाल रामनिवास धाकड़ ने फैल कर दी। इन राजनीति से जुड़े माफियाओं ने कोलारस क्षेत्र के एक आदिवासियों के नाम वन भूमि को राजस्व मे दर्शाकर पट्टे करा दिए और स्वयं ने कब्जा कर लिया। बताया जा रहा है कि यह वह लोग है सत्ताधारी सफेद पॉश से जुडे है। लेकिन एक शिकायत ने इस वन भूमि को ना ही मुक्त कराने की प्रक्रिया मे आगे कदम बढ़ाया बल्कि वन विभाग ने पत्राचार भी शुरू कर दिया है कि यह जमीन राजस्व की नहीं बल्कि वन विभाग की है। वन विभाग ने मामला भी दर्ज कर लिया है।

शिवपुरी जिले के सतनबाड़ा वन विभाग रेंज के अंतर्गत नयागांव (वारा) क्षेत्र में भू-माफियाओं द्वारा करोड़ों की सरकारी वन भूमि पर कब्जा करने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता रामनिवास धाकड़ की शिकायत पर प्रशासन और वन विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए न केवल अतिक्रमण को रोका, बल्कि अब विवादित पट्टों को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

क्या है पूरा मामला ?
शिकायतकर्ता रामनिवास धाकड़ के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित बीट नयागांव (कक्ष क्रमांक पी.एफ. 935) की लगभग 20.640 हेक्टेयर (करीब 100 बीघा) भूमि पर, जहां खैर (कत्था) के कीमती वृक्षों का जंगल खड़ा है, कुछ रसूखदारों द्वारा तार-फेंसिंग कर कब्जा किया जा रहा था। आरोप है कि 29 और 30 जून 2025 को जेसीबी और ट्रैक्टरों के जरिए जंगल को नष्ट करने का प्रयास भी किया गया।

सीमांकन और वन विभाग की कार्रवाई
वन परिक्षेत्राधिकारी सतनबाड़ा की जांच रिपोर्ट के अनुसार विजय पुत्र फैली निवासी कोलारस के नाम पर कुछ सर्वे नंबरों (227, 228, 230, 231, 232) का सीमांकन राजस्व विभाग द्वारा कराया गया था, जिसे वन विभाग ने वन सीमा के अंदर बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। वन अमले ने कार्रवाई करते हुए वन अपराध प्रकरण क्रमांक 598/24 दर्ज किया है। विभाग का दावा है कि मौके पर की गई फेंसिंग को हटा दिया गया है और वर्तमान में भूमि वन विभाग के आधिपत्य में है।

सुझाव श्रेणी में डालकर शिकायत बंद करने पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर वन विभाग पट्टे निरस्त करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों (वन मण्डलाधिकारी) को पत्र लिख रहा है, वहीं सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर इस गंभीर शिकायत को सुझाव श्रेणी में परिवर्तित कर बंद कर दिया गया है। विभाग का तर्क है कि मामला प्रक्रियाधीन है और वर्तमान में कोई अतिक्रमण नहीं है।

अधिकारी का पक्ष
वन भूमि पर अतिक्रमण के प्रयास को विफल कर दिया गया है। विवादित पट्टों को निरस्त करने हेतु वरिष्ठ कार्यालय को पत्राचार किया जा चुका है। 1970 के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार यह भूमि वन विभाग की है।-
वन परिक्षेत्राधिकारी, सतनबाड़ा