शिवपुरी में सिस्टम का सर्वर डाउन, स्ट्रेचर पर पड़ा मुर्दा - PM का इंतजार कर रहा है, 2 मामले

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और तकनीकी पेचीदगियों ने जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस को इंतज़ार का घर बना दिया है। यहाँ अपनों को खोने का गम झेल रहे परिवारों को अब उनके अंतिम संस्कार के लिए घंटों, बल्कि दिनों तक गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। बुधवार शाम से लेकर गुरुवार दोपहर तक दो शवों का पोस्टमार्टम न होना, अस्पताल प्रबंधन और पुलिस विभाग के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है।

20 घंटे तक स्ट्रेचर पर पड़ा रहा मुनीम का शव
मामला सतनबाड़ा खुर्द का है, जहाँ 35 वर्षीय एक युवक कोलारस में एक कृषि फार्म पर मुनीम का काम करता था। बुधवार दोपहर वह अचानक बेहोश हुआ और अस्पताल लाते ही शाम 4 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया। नियमतः उसी शाम या अगली सुबह तड़के पोस्टमार्टम होना था, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ऐसी रही कि गुरुवार दोपहर तक परिजन सिर्फ अस्पताल की सीढ़ियां नापते रहे। 20 घंटे बीत जाने के बाद भी शव का पोस्टमार्टम शुरू नहीं हो सका, जिससे परिजनों का सब्र जवाब दे गया।

सड़क हादसे में जान गंवाने वाले किशोर का भी बुरा हाल
यही हाल नबाब साहब रोड निवासी 15 वर्षीय ऋषभ रावत के मामले में दिखा। गुरुवार सुबह 7 बजे एसपी कोठी के पास हुए दर्दनाक हादसे में ऋषभ की मौत हो गई। परिजन सुबह से ही पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े रहे, लेकिन दोपहर 12 बजे तक उन्हें भी केवल 'प्रक्रिया' का हवाला देकर टाल दिया गया।

तकनीकी बदलाव या लापरवाही का बहाना?
जब इस देरी का कारण पूछा गया, तो विभाग ने अपनी जिम्मेदारी 'डिजिटल सिस्टम' पर डाल दिया है।  सिविल सर्जन डॉ. बी.एल. यादव का कहना है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अब बदल गई है। अब पुलिस जब तक CCCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) पर दर्ज विशिष्ट नंबर के दस्तावेज नहीं देती, तब तक डॉक्टर हाथ नहीं लगा सकते।

कोतवाली प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन भरने पड़ते हैं, लेकिन अक्सर सर्वर डाउन होने की वजह से प्रक्रिया अटक जाती है।