शिवपुरी। शिवपुरी जिले के स्वास्थ्य विभाग को बदनाम करने वाला एक मामला सामने आया है। शिवपुरी जिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती प्रसूता का प्रसव होना था,प्रसव के लिए प्रसुता जिला अस्पताल मे भर्ती थी। डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ ने प्रसूता को नॉर्मल डिलीवरी ना होने की भविष्यवाणी करते हुए उसका सीजर करने की घोषणा कर दी,लेकिन प्रसूता की परिजनों का कहना था इससे पूर्व उनकी बहू के 2 प्रसव सामान्य हुए थे,लेकिन अब सीजर का दबाव डाला जा रहा है,इस कारण प्रसूता के परिजन प्रसूता को अस्पताल प्रबंधन की नजरे बचाकर अपने गांव वापस एक बस से ले गए,इसी दौरान चलती बस मे प्रसूता को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी और बस रोककर बस मे ही प्रसूता की डिलीवरी करानी पडी। प्रसूता ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया है।
मासूम के प्रसव के बाद परिजन प्रसूता और नवजात को बस से उतरकर टमटम से सिरसौद अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जच्चा-बच्चा दोनों को भर्ती कराया गया। राहत की बात यह रही कि प्रसूता और नवजात बच्ची दोनों सुरक्षित हैं।
5 दिन पहले डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था
जानकारी के अनुसार, करैरा क्षेत्र के ग्राम बधेदरी निवासी आशा वंशकार उम्र 26 साल पत्नी रविंद्र वंशकार को प्रसव के लिए करीब पांच दिन पहले शिवपुरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि कुछ समय बाद सामान्य प्रसव हो जाएगा। प्रसूता की सास कौशल्या वंशकार ने बताया कि उनकी बहू के गर्भ के पूरे नौ माह पूरे हो चुके थे, इसलिए वे डिलीवरी कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन भर्ती के बाद से ही डॉक्टर और स्टाफ लगातार यह कहते रहे कि महिला की डिलीवरी ऑपरेशन से ही होगी।
सास बोली- जब दो बच्चे पहले नार्मल हुए, तो अब ऑपरेशन क्यों ?
प्रसूता की सास कौशल्या ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों का पूरा जोर ऑपरेशन पर था, जबकि परिवार इसके लिए तैयार नहीं था। उनका कहना है कि आशा के पहले दो बच्चे-एक बेटा और एक बेटी-सामान्य प्रसव से ही हुए थे, ऐसे में तीसरे बच्चे के लिए अचानक ऑपरेशन की जरूरत समझ से परे थी। कौशल्या ने कहा कि परिवार बार-बार डॉक्टरों से नार्मल डिलीवरी की संभावना पर बात करता रहा, लेकिन अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर इस पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय सीजर डिलीवरी की ही बात करते रहे। इससे परिवार असहज और परेशान हो गया।
परेशान होकर अस्पताल से निकले, बस में बैठकर गांव लौटने लगे
परिजनों के मुताबिक, लगातार ऑपरेशन की बात सुनकर वे मानसिक रूप से दबाव में आ गए। आखिरकार सोमवार दोपहर करीब 3 बजे सास कौशल्या, प्रसूता आशा और उसका पति रविन्द्र वंशकार अस्पताल से चुपचाप निकल गए और बस में सवार होकर अपने गांव वापस जाने लगे।
परिवार को लगा कि गांव पहुंचकर किसी दूसरे स्थान पर सामान्य प्रसव की कोशिश कराई जाएगी। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि अस्पताल से निकलने के कुछ ही देर बाद स्थिति अचानक बदल जाएगी।
अमोला के पास बस बनी डिलीवरी रूम, प्रसूता ने बच्ची को दिया जन्म
गांव लौटते समय जब बस अमोला क्षेत्र के सिरसौद चौराहे के पास पहुंची, तभी प्रसूता आशा को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। बस के भीतर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ ही देर में हालात ऐसे बने कि महिला की डिलीवरी बस के अंदर ही हो गई। चलती बस में ही आशा ने एक बेटी को जन्म दिया। इस अप्रत्याशित घटना से बस में मौजूद यात्री भी घबरा गए। हालांकि बाद में परिजनों और आसपास मौजूद लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए प्रसूता को सुरक्षित बस से नीचे उतारा।
बस से उतारकर टमटम से सिरसौद अस्पताल पहुंचाया
डिलीवरी के बाद परिजनों ने तत्काल प्रसूता और नवजात को बस से उतारा। इसके बाद उन्हें टमटम से सिरसौद अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दोनों को भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया गया। बताया जा रहा है कि समय पर उपचार मिलने से जच्चा और बच्चा दोनों खतरे से बाहर हैं। हालांकि इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों का आरोप- जिला अस्पताल में जबरन ऑपरेशन के लिए अड़े थे
प्रसूता की सास कौशल्या का आरोप है कि जिला अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ उनकी बहू का जबरन ऑपरेशन करना चाहते थे। उनका कहना है कि अगर सामान्य प्रसव संभव नहीं था, तो फिर रास्ते में बस में इतनी आसानी से डिलीवरी कैसे हो गई। कौशल्या ने कहा कि अस्पताल में परिवार की बात को गंभीरता से नहीं सुना गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टाफ की बातों और रवैये से परिवार इतना घबरा गया कि उन्हें अस्पताल छोड़कर लौटने का फैसला करना पड़ा।
अस्पताल प्रबंधन बोला- बिना बताए चले गए, हम क्या करते
मामले पर करैरा बीएमओ डॉ. नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि परिजन जिला अस्पताल से बिना किसी को बताए चुपचाप चले गए। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के लिए कुछ कर पाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रसूता सिरसौद अस्पताल में भर्ती है और उसकी स्थिति सुरक्षित बताई जा रही है।
सिविल सर्जन बोले- कोई डॉक्टर नार्मल डिलीवरी की गारंटी नहीं दे सकता
वहीं, इस पूरे मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बीएल यादव ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि कोई भी डॉक्टर नार्मल या ऑपरेशन से डिलीवरी होने की गारंटी नहीं दे सकता। सुरक्षित प्रसव के लिए जरूरत पड़ने पर सर्जरी की जाती है। जबरन किसी का ऑपरेशन क्यों करेंगे। बाकी पूरे मामले को दिखवा लेता हूं। परिजनों के आरोप गलत हैं।
डॉ. यादव के इस बयान से साफ है कि अस्पताल प्रबंधन इस मामले को चिकित्सकीय आवश्यकता से जोड़कर देख रहा है, जबकि परिजन इसे अनावश्यक ऑपरेशन का दबाव बता रहे हैं।
शिवपुरी समाचार इस मामले में गंभीर सवाल खड़े करता है
अगर महिला की स्थिति इतनी गंभीर थी कि ऑपरेशन जरूरी बताया जा रहा था, तो वह अस्पताल से बिना रोक-टोक कैसे निकल गई ?
प्रसूता वार्ड में भर्ती महिला के बाहर जाने की जानकारी अस्पताल को क्यों नहीं लगी ?
अगर सामान्य प्रसव की संभावना थी, तो परिजनों को काउंसलिंग और भरोसा क्यों नहीं दिया गया ?
और अगर ऑपरेशन जरूरी था, तो रास्ते में बस में सुरक्षित डिलीवरी कैसे हो गई ?