शिवपुरी। आज 9 मार्च है और हिंदू कलैडंर से आज षष्टी और चैत्र का माह चल रहा है। लेकिन सूर्यदेव ने जेठ माह जैसा अहसास दिलाना शुरू कर दिया है,अभी मार्च के माह की शुरुआत हो चुकी है और शिवपुरी में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। सर्दियों की विदाई के तुरंत बाद वसंत की गुलाबी ठंड का अहसास गायब हो गया है और उसकी जगह सूरज की झुलसाने वाली किरणों ने ले ली है।
हालात यह है कि सुबह 9 बजते ही धूप तीखी होने लगती है और दोपहर होते-होते आसमान से आग बरसने जैसा अहसास होने लगा है। रविवार को पारा 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को चुनौती दे दी है।
रंगपंचमी पर भी घरों में कैद रहे लोग
रविवार को रंगपंचमी का त्योहार और छुट्टी का दिन होने के बावजूद सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। आमतौर पर त्योहारों पर बाजारों में जो रौनक दिखती थी, उसे तेज धूप ने निगल लिया। लोग दोपहर के समय केवल बहुत जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। न्यूनतम तापमान में भी एक डिग्री की बढ़ोतरी के साथ यह 21 डिग्री पर पहुंच गया है, जिससे अब रातें भी गर्म होने लगी हैं।
बाजार का बदला मिजाज, जूस और नारियल पानी की बढ़ी मांग
गर्मी की इस अचानक दस्तक ने बाजार की तस्वीर बदल दी है। कोर्ट रोड स्थित फल मंडी और प्रमुख चौराहों पर अब शीतल पेयों की धूम है। गन्ने का रस, मौसमी का जूस और नारियल पानी के ठेलों पर दोपहर में खासी भीड़ देखी जा रही है।
बदला खान-पान: लोगों ने अब चाय-कॉफी की जगह ठंडे पेय पदार्थों को तरजीह देना शुरू कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार ठंडे उत्पादों की बिक्री मार्च की शुरुआत में ही 30% तक बढ़ गई है। बढ़ती गर्मी ने केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि फलों को भी संकट में डाल दिया है। फल विक्रेताओं के लिए अब अपने माल को ताजा रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अगर सीधे धूप फलों पर पड़ी तो उनकी नमी खत्म हो जाएगी और वे झुलस जाएंगे। झुलसे हुए फल कोई ग्राहक नहीं खरीदता। यही कारण है कि इस बार मार्च में ही फल विक्रेताओं ने बड़े-बड़े छातों और गीली बोरियों का इंतजाम कर लिया है। फल मंडी में हर ठेले पर अब रंग-बिरंगी छतरियां तनी नजर आ रही हैं।
हालात यह है कि सुबह 9 बजते ही धूप तीखी होने लगती है और दोपहर होते-होते आसमान से आग बरसने जैसा अहसास होने लगा है। रविवार को पारा 36 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को चुनौती दे दी है।
रंगपंचमी पर भी घरों में कैद रहे लोग
रविवार को रंगपंचमी का त्योहार और छुट्टी का दिन होने के बावजूद सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। आमतौर पर त्योहारों पर बाजारों में जो रौनक दिखती थी, उसे तेज धूप ने निगल लिया। लोग दोपहर के समय केवल बहुत जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। न्यूनतम तापमान में भी एक डिग्री की बढ़ोतरी के साथ यह 21 डिग्री पर पहुंच गया है, जिससे अब रातें भी गर्म होने लगी हैं।
बाजार का बदला मिजाज, जूस और नारियल पानी की बढ़ी मांग
गर्मी की इस अचानक दस्तक ने बाजार की तस्वीर बदल दी है। कोर्ट रोड स्थित फल मंडी और प्रमुख चौराहों पर अब शीतल पेयों की धूम है। गन्ने का रस, मौसमी का जूस और नारियल पानी के ठेलों पर दोपहर में खासी भीड़ देखी जा रही है।
बदला खान-पान: लोगों ने अब चाय-कॉफी की जगह ठंडे पेय पदार्थों को तरजीह देना शुरू कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार ठंडे उत्पादों की बिक्री मार्च की शुरुआत में ही 30% तक बढ़ गई है। बढ़ती गर्मी ने केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि फलों को भी संकट में डाल दिया है। फल विक्रेताओं के लिए अब अपने माल को ताजा रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अगर सीधे धूप फलों पर पड़ी तो उनकी नमी खत्म हो जाएगी और वे झुलस जाएंगे। झुलसे हुए फल कोई ग्राहक नहीं खरीदता। यही कारण है कि इस बार मार्च में ही फल विक्रेताओं ने बड़े-बड़े छातों और गीली बोरियों का इंतजाम कर लिया है। फल मंडी में हर ठेले पर अब रंग-बिरंगी छतरियां तनी नजर आ रही हैं।