रौद्र रूप में आ रहा है हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083, गुरु संभालेंगे राजपाट और मंगल संभालेंगे कमान

Adhiraj Awasthi

भोपाल। हिंदू पंचांग के अनुसार नए वर्ष की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस वर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च, गुरुवार से होगी। नववर्ष की शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग और मीन लग्न में होगी। यह समय ज्ञान, अध्ययन, गुरु-पूजन, दान-पुण्य और जप के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी आरंभ होगी, जो 27 मार्च तक नौ दिनों तक चलेगी। पहले दिन 19 मार्च को घट स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.52 से 10.10 बजे तक रहेगा। रौद्र संवत्सर वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण रह सकता है।अस्थिरता, मतभेद,आगजनी व दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं। वहीं, मंत्री मंगल होने के नाते लोगों में धर्म के प्रति रुझान भी बढ़ेगा।

धर्म और मंगलोत्सव के आयोजनों में वृद्धि
भारत की आजादी के समय की जन्म कुंडली और प्रधानमंत्री की कुंडली में मंगल की महादशा चल रही है। रौद्र प्रभाव से भारत रक्षा क्षेत्र में मजबूत-आत्मनिर्भर बनेगा। मंगल के प्रभाव से धर्म-मंगलोत्सव के आयोजनों में वृद्धि भी होगी।

इसलिए नाम रखा 'रौद्र'
ज्योतिर्विद पं. अजय कृष्ण शंकर व्यास के अनुसार हिंदू नववर्ष की शुरुआत गुरुवार से होने के कारण वर्ष के राजा बृहस्पति होंगे, जो ज्ञान, धर्म, नीति और न्याय के ग्रह माने जाते हैं। वहीं, वर्ष के मंत्री मंगल ग्रह होंगे, जो ऊर्जा, साहस, संघर्ष और त्वरित निर्णय के प्रतीक हैं। राजा और मंत्री के इस संयोजन वाले नए संवत का नाम 'रौद्र' रखा गया है।