शिवपुरी। पिछले चार महीनों से सोने और चांदी की कीमतों में जारी अनिश्चितता और भारी उछाल ने शिवपुरी के सराफा व्यापार की कमर तोड़ दी है। कभी शादियों के सीजन में गुलजार रहने वाला बाजार आज ग्राहकों के लिए तरस रहा है। हालात यह हैं कि दीपावली से पहले जो सोना 1,10,000 रूपए प्रति तोला (जेवराती) था, वह आज 1,60,000 रूपए के आसपास पहुंच गया है, वहीं चांदी की कीमतें भी 2,92,000 रुपए प्रति किलो के स्तर को छू रही हैं,इस व्यापार में सबसे अधिक चांदी डरा रही है। सट्टा मार्केट मे सटोरिया की पहली पसंद चांदी है चांदी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ छलांग मारने के बाद एक दिन में 30 प्रतिशत का क्रश मार दिया जिससे चांदी लगभग 80 हजार रुपए प्रति किलो नीचे आ गई है।
छोटे दुकानदारों पर बेरोजगारी का साया
शहर के लगभग 300 छोटे दुकानदार, जो बड़े शोरूमों से काम लेकर या फुटकर व्यापार कर अपना घर चलाते थे, आज पूरी तरह ठप हो चुके हैं। पूंजी की कमी और रोजाना बदलते भावों के कारण बड़े व्यापारियों ने उन्हें उधार माल देना बंद कर दिया है। नतीजतन, ये छोटे कारीगर और व्यापारी अब कर्ज लेकर घर चलाने को मजबूर हैं।
शगुन तक सिमटी शादियों की खरीदारी
सहालग का सीजन होने के बावजूद बाजार में पहले जैसी रौनक गायब है। सराफा व्यापारियों के अनुसार, जहां पहले शादियों में लोग 10 तोला सोना और आधा किलो चांदी खरीदते थे, वहीं अब बजट बिगड़ने के कारण लोग केवल 5 तोला सोना और 200 ग्राम चांदी से ही शगुन की रस्म पूरी कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव ने ग्राहकों और व्यापारियों, दोनों के मन में डर पैदा कर दिया है।
पुरानी चांदी की बिक्री में झिझक
बाजार में भाव बढ़ने के बाद कई लोग पुराने जेवर बेचने पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां भी उन्हें निराशा हाथ लग रही है। अनिश्चितता के कारण दुकानदार पुरानी चांदी खरीदने में आनाकानी कर रहे हैं या फिर 50 फीसदी तक की कटौती पर माल ले रहे हैं। पुराने सोने के आभूषणों के मामले में भी केवल पुराने बिल और पहचान के आधार पर ही सीमित खरीदारी हो रही है।
90 फीसदी व्यापार कच्चे बिल के भरोसे
एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि बाजार का 90 फीसदी व्यापार कच्चे बिल पर चल रहा है। 3 फीसदी जीएसटी बचाने के चक्कर में न तो ग्राहक पक्का बिल मांग रहा है और न ही व्यापारी टैक्स के झमेले में पड़ना चाहता है। केवल 10 फीसदी बड़े शोरूम ही पक्के बिल पर काम कर रहे हैं।
जिम्मेदारों का दर्द
कीमतें बढ़ने से ग्राहकी आधी रह गई है। जो सोना-चांदी पहले महीनों में घटता-बढ़ता था, अब वह हर रोज बदल रहा है। इससे एकमुश्त माल खरीदने में भी डर लग रहा है।
सुभाष खंडेलवाल, सराफा व्यापारी
कोरोना के बाद से ही व्यापार डगमगा गया था, लेकिन अब रोजाना की तेजी-मंदी ने छोटे व्यापारियों को बर्बाद कर दिया है। धंधा पूरी तरह चौपट है।
संतोष सोनी, सराफा व्यापारी
छोटे दुकानदारों पर बेरोजगारी का साया
शहर के लगभग 300 छोटे दुकानदार, जो बड़े शोरूमों से काम लेकर या फुटकर व्यापार कर अपना घर चलाते थे, आज पूरी तरह ठप हो चुके हैं। पूंजी की कमी और रोजाना बदलते भावों के कारण बड़े व्यापारियों ने उन्हें उधार माल देना बंद कर दिया है। नतीजतन, ये छोटे कारीगर और व्यापारी अब कर्ज लेकर घर चलाने को मजबूर हैं।
शगुन तक सिमटी शादियों की खरीदारी
सहालग का सीजन होने के बावजूद बाजार में पहले जैसी रौनक गायब है। सराफा व्यापारियों के अनुसार, जहां पहले शादियों में लोग 10 तोला सोना और आधा किलो चांदी खरीदते थे, वहीं अब बजट बिगड़ने के कारण लोग केवल 5 तोला सोना और 200 ग्राम चांदी से ही शगुन की रस्म पूरी कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव ने ग्राहकों और व्यापारियों, दोनों के मन में डर पैदा कर दिया है।
पुरानी चांदी की बिक्री में झिझक
बाजार में भाव बढ़ने के बाद कई लोग पुराने जेवर बेचने पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां भी उन्हें निराशा हाथ लग रही है। अनिश्चितता के कारण दुकानदार पुरानी चांदी खरीदने में आनाकानी कर रहे हैं या फिर 50 फीसदी तक की कटौती पर माल ले रहे हैं। पुराने सोने के आभूषणों के मामले में भी केवल पुराने बिल और पहचान के आधार पर ही सीमित खरीदारी हो रही है।
90 फीसदी व्यापार कच्चे बिल के भरोसे
एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि बाजार का 90 फीसदी व्यापार कच्चे बिल पर चल रहा है। 3 फीसदी जीएसटी बचाने के चक्कर में न तो ग्राहक पक्का बिल मांग रहा है और न ही व्यापारी टैक्स के झमेले में पड़ना चाहता है। केवल 10 फीसदी बड़े शोरूम ही पक्के बिल पर काम कर रहे हैं।
जिम्मेदारों का दर्द
कीमतें बढ़ने से ग्राहकी आधी रह गई है। जो सोना-चांदी पहले महीनों में घटता-बढ़ता था, अब वह हर रोज बदल रहा है। इससे एकमुश्त माल खरीदने में भी डर लग रहा है।
सुभाष खंडेलवाल, सराफा व्यापारी
कोरोना के बाद से ही व्यापार डगमगा गया था, लेकिन अब रोजाना की तेजी-मंदी ने छोटे व्यापारियों को बर्बाद कर दिया है। धंधा पूरी तरह चौपट है।
संतोष सोनी, सराफा व्यापारी