शिवपुरी। शिवपुरी जिले में 3 बच्चों में खसरा की पुष्टि होने की खबर मिली है,बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में खनियाधाना विकासखंड के गुदर गांव से भोपाल भेजे गए पांच सैंपलों में से तीन बच्चों में खसरे की पुष्टि हुई है। सैंपलों को जांच के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) भोपाल भेजा गया था,इस पूरे मामले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि मेरे पर आकडे नही है,इसके प्रभारी डॉ रोहित भदकारिया हैं,इस मामले में डॉ भदकारिया का कहना है कि मुझे अभी स्पष्ट आंकड़ों की जानकारी नहीं है।कुल मिलाकर जिला और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग का काम जीरो निकलकर आया है वही जिला स्वास्थ्य अधिकारी का बयान भी जीरो जैसा ही लगता हैं।
इधर बच्चों में खसरे की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। नेशनल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य संचालनालय से मिली रिपोर्ट में शिवपुरी के आंकड़ों का खुलासा हुआ है। डीआईओ डॉ रोहित भदकारिया का दावा है कि विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) प्रभावित क्षेत्र एवं ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच कर रही है। साथ ही गांव में सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान की जा रही है।
संक्रमित बच्चों को लक्षणों के अनुसार उपचार दिया जा रहा है तथा उन्हें विटामिन ए सॉल्यूशन भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि हकीकत में रन्नौद कोलारस एवं शिवपुरी शहर के कई इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि ऐसी कोई टीम उनके इलाके में पहुंची ही नहीं है। बीते तीन से चार माह पहले लुकवासा क्षेत्र में भी खसरे के आठ से अधिक बच्चे चिह्नित किए गए थे। जिनके आंकड़ों का अभी खुलासा ही अभी तक नहीं किया गया है। लुकवासा के रामदयाल व्यास का कहना है कि उनके इलाके में चार माह पहले कुछ बच्चों को खसरे की बीमारी हुई, जिसका अस्पताल में इलाज भी हुआ, लेकिन इलाके में विटामिन-ए सॉल्यूशन हर जगह उपलब्ध नहीं कराया गया।
एनएचएम ने निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश खसरे की बीमारी को
लेकर स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को संक्रमण से बचाव के बारे में जागरूक करना शुरू कर दिया है। लोगों को बीमार बच्चों को अलग रखने, साफ-सफाई बनाए रखने और पौष्टिक आहार देने की सलाह दी जा रही है। वहीं नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) और भोपाल स्थित स्वास्थ्य संचालनालय ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
समय पर टीकाकरण न होना प्रमुख कारण
जिला अस्पताल के डॉक्टर डॉ बीएल यादव ने बताया कि खसरे के मामलों का प्रमुख कारण समय पर टीकाकरण नहीं होना है। खासकर विमुक्त और घुमक्कड़ समुदाय के लोग लगातार पलायन करते रहते हैं, जिससे कई बच्चों को समय पर टीके की डोज नहीं मिल पाती। इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान भी टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुआ था।
इन लक्षणों से होगी पहचान
डॉक्टरों के अनुसार खसरा बच्चों में तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्तों के साथ उल्टी, डायरिया और डिहाइड्रेशन जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है। गंभीर मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन का खतरा भी रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मीजल्स-रुबेला (एमआर) वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगवाने से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है। इसके अलावा बीमारी के प्रारंभिक लक्षण तेज बुखार. सूखी खांसी, बहती नाक और लाल आंखें। दानों से 2-3 दिन पहले मुंह के अंदर गालों पर छोटे सफेद धब्बे। 3-5 दिन बाद माथे से शुरू होकर पूरे शरीर में फैलने वाले लाल, धब्बेदार दाने। अत्यधिक थकान और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता।
आंकड़ों की पूरी जानकारी नहीं है
जिले में खसरे की बीमारी के प्रभारी डॉ रोहित भदकारिया हैं, आंकड़ों सहित खसरे के मरीजों की सम्पूर्ण जानकारी उन्हीं के पास है। मुझे अभी आंकड़ों की पूरी जानकारी नहीं है।
डॉ संजय ऋषिश्वर, सीएमएचओ.
इसकी जानकारी अभी मुझे नहीं है।
जिले में खसरे के कितने मरीज सामने आए हैं, इसकी जानकारी अभी मुझे नहीं है। एनएचएम से जो आंकड़े आपको मिले हैं, उन सभी मरीजों को टीके लगा दिए गए हैं। ग्रामीणों इलाकों में विटामिन-ए सॉल्यूशन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे अधिक जानकारी अभी मुझे नहीं है।
डॉ रोहित भदकारिया , डीआईओ, शिवपुरी
इधर बच्चों में खसरे की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। नेशनल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य संचालनालय से मिली रिपोर्ट में शिवपुरी के आंकड़ों का खुलासा हुआ है। डीआईओ डॉ रोहित भदकारिया का दावा है कि विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) प्रभावित क्षेत्र एवं ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर मरीजों और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच कर रही है। साथ ही गांव में सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान की जा रही है।
संक्रमित बच्चों को लक्षणों के अनुसार उपचार दिया जा रहा है तथा उन्हें विटामिन ए सॉल्यूशन भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि हकीकत में रन्नौद कोलारस एवं शिवपुरी शहर के कई इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि ऐसी कोई टीम उनके इलाके में पहुंची ही नहीं है। बीते तीन से चार माह पहले लुकवासा क्षेत्र में भी खसरे के आठ से अधिक बच्चे चिह्नित किए गए थे। जिनके आंकड़ों का अभी खुलासा ही अभी तक नहीं किया गया है। लुकवासा के रामदयाल व्यास का कहना है कि उनके इलाके में चार माह पहले कुछ बच्चों को खसरे की बीमारी हुई, जिसका अस्पताल में इलाज भी हुआ, लेकिन इलाके में विटामिन-ए सॉल्यूशन हर जगह उपलब्ध नहीं कराया गया।
एनएचएम ने निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश खसरे की बीमारी को
लेकर स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को संक्रमण से बचाव के बारे में जागरूक करना शुरू कर दिया है। लोगों को बीमार बच्चों को अलग रखने, साफ-सफाई बनाए रखने और पौष्टिक आहार देने की सलाह दी जा रही है। वहीं नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) और भोपाल स्थित स्वास्थ्य संचालनालय ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
समय पर टीकाकरण न होना प्रमुख कारण
जिला अस्पताल के डॉक्टर डॉ बीएल यादव ने बताया कि खसरे के मामलों का प्रमुख कारण समय पर टीकाकरण नहीं होना है। खासकर विमुक्त और घुमक्कड़ समुदाय के लोग लगातार पलायन करते रहते हैं, जिससे कई बच्चों को समय पर टीके की डोज नहीं मिल पाती। इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान भी टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हुआ था।
इन लक्षणों से होगी पहचान
डॉक्टरों के अनुसार खसरा बच्चों में तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्तों के साथ उल्टी, डायरिया और डिहाइड्रेशन जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है। गंभीर मामलों में निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन का खतरा भी रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मीजल्स-रुबेला (एमआर) वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लगवाने से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है। इसके अलावा बीमारी के प्रारंभिक लक्षण तेज बुखार. सूखी खांसी, बहती नाक और लाल आंखें। दानों से 2-3 दिन पहले मुंह के अंदर गालों पर छोटे सफेद धब्बे। 3-5 दिन बाद माथे से शुरू होकर पूरे शरीर में फैलने वाले लाल, धब्बेदार दाने। अत्यधिक थकान और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता।
आंकड़ों की पूरी जानकारी नहीं है
जिले में खसरे की बीमारी के प्रभारी डॉ रोहित भदकारिया हैं, आंकड़ों सहित खसरे के मरीजों की सम्पूर्ण जानकारी उन्हीं के पास है। मुझे अभी आंकड़ों की पूरी जानकारी नहीं है।
डॉ संजय ऋषिश्वर, सीएमएचओ.
इसकी जानकारी अभी मुझे नहीं है।
जिले में खसरे के कितने मरीज सामने आए हैं, इसकी जानकारी अभी मुझे नहीं है। एनएचएम से जो आंकड़े आपको मिले हैं, उन सभी मरीजों को टीके लगा दिए गए हैं। ग्रामीणों इलाकों में विटामिन-ए सॉल्यूशन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे अधिक जानकारी अभी मुझे नहीं है।
डॉ रोहित भदकारिया , डीआईओ, शिवपुरी