शिवपुरी। प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग भले ही सुरक्षित प्रसव और जननी सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करे, लेकिन शिवपुरी जिले के बदरवास क्षेत्र में ये दावे महज कागजी साबित हो रहे हैं। शनिवार को एक बार फिर बदरवास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के अंतर्गत आने वाले ग्राम खिरिया में स्वास्थ्य सेवाओं की शर्मनाक तस्वीर सामने आई, जहां एंबुलेंस न मिलने के कारण एक प्रसूता को ट्रैक्टर-ट्रॉली में बच्चे को जन्म देना पड़ा।
पांच बार कॉल, फिर भी नहीं पसीजा सिस्टम
जानकारी के अनुसार, ग्राम खिरिया निवासी तूरसा (24) पत्नी निलेश कुशवाह को शनिवार शाम अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। पति निलेश और बड़े भाई वीर सिंह ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को फोन लगाया। परिजनों का दावा है कि उन्होंने शाम 4:30 बजे से लेकर लगातार 5 बार कॉल किए, लेकिन हर बार उन्हें मदद का आश्वासन ही मिला, एंबुलेंस नहीं पहुंची।
ट्रॉली बनी लेबर रूम, सड़क पर हुआ जन्म
जब प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी, तो मजबूरन परिजन उसे ट्रैक्टर-ट्रॉली में लिटाकर बदरवास अस्पताल के लिए निकले। अभी ट्रैक्टर पावर हाउस के पास ही पहुँचा था कि प्रसूता का दर्द असहनीय हो गया और उसने ट्रॉली में ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दे दिया। गनीमत रही कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं और फिलहाल अस्पताल में उनका उपचार जारी है।
10 दिन में दूसरी बड़ी घटना
कभी बैलगाड़ी, कभी ट्रॉली बदरवास में स्वास्थ्य सेवाओं की यह बदहाली नई नहीं है। महज 10 दिन पहले गारेला निवासी ममता आदिवासी को भी एंबुलेंस नहीं मिली थी, जिसके बाद परिजन उसे बैलगाड़ी में लादकर अस्पताल लाए थे और अस्पताल के गेट पर ही उसकी डिलीवरी हुई थी।
कोई ध्यान नहीं देता इस पूरे मामले में बदरवास बीएमओ चेतन कुशवाह ने अपनी लाचारी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि क्षेत्र में एंबुलेंस और अन्य सुविधाओं की कमी को लेकर वे लगातार वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिख रहे हैं और शिकायत कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और शासन स्तर पर इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
पांच बार कॉल, फिर भी नहीं पसीजा सिस्टम
जानकारी के अनुसार, ग्राम खिरिया निवासी तूरसा (24) पत्नी निलेश कुशवाह को शनिवार शाम अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। पति निलेश और बड़े भाई वीर सिंह ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को फोन लगाया। परिजनों का दावा है कि उन्होंने शाम 4:30 बजे से लेकर लगातार 5 बार कॉल किए, लेकिन हर बार उन्हें मदद का आश्वासन ही मिला, एंबुलेंस नहीं पहुंची।
ट्रॉली बनी लेबर रूम, सड़क पर हुआ जन्म
जब प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी, तो मजबूरन परिजन उसे ट्रैक्टर-ट्रॉली में लिटाकर बदरवास अस्पताल के लिए निकले। अभी ट्रैक्टर पावर हाउस के पास ही पहुँचा था कि प्रसूता का दर्द असहनीय हो गया और उसने ट्रॉली में ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दे दिया। गनीमत रही कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं और फिलहाल अस्पताल में उनका उपचार जारी है।
10 दिन में दूसरी बड़ी घटना
कभी बैलगाड़ी, कभी ट्रॉली बदरवास में स्वास्थ्य सेवाओं की यह बदहाली नई नहीं है। महज 10 दिन पहले गारेला निवासी ममता आदिवासी को भी एंबुलेंस नहीं मिली थी, जिसके बाद परिजन उसे बैलगाड़ी में लादकर अस्पताल लाए थे और अस्पताल के गेट पर ही उसकी डिलीवरी हुई थी।
कोई ध्यान नहीं देता इस पूरे मामले में बदरवास बीएमओ चेतन कुशवाह ने अपनी लाचारी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि क्षेत्र में एंबुलेंस और अन्य सुविधाओं की कमी को लेकर वे लगातार वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिख रहे हैं और शिकायत कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और शासन स्तर पर इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।