अनिल कुशवाह @ शिवपुरी। जिले के फिजिकल थाना क्षेत्र में पिछले 24 घंटों से एक ऐसी कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिजिकल थाना पुलिस ने टीवी टावर क्षेत्र के एक मकान में चल रहे संदिग्ध मैरिज ब्यूरो पर छापा मारकर करीब 15 से 20 युवतियों और महिलाओं को हिरासत में लिया। लेकिन इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस का रवैया न केवल संदिग्ध रहा, बल्कि मीडिया के प्रति भी बेहद आक्रामक दिखा।
शादी के नाम पर ठगी का बड़ा जाल
पत्रकारों के साथ बदसलूकी और डेटा डिलीट
दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ फिजिकल पुलिस ने अभद्र व्यवहार किया। थाने के बाहर खड़े पत्रकारों के मोबाइल फोन जबरन लेकर उनमें से कार्रवाई के वीडियो डिलीट करवा दिए गए। पुलिस की इस सेंसरशिप ने इस आशंका को जन्म दे दिया है कि क्या पुलिस इस मामले में कुछ खास तथ्यों या चेहरों को छिपाने का प्रयास कर रही है?
घंटों चली पूछताछ, फिर सब आजाद
थाना प्रभारी नम्रता भदौरिया के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई में देर रात तक पुलिस कार्रवाई जारी है का रटा-रटाया जवाब देती रही। करीब 8 घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद रात 10 बजे अचानक सभी युवतियों को थाने से छोड़ दिया गया। इस मामले में न तो कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया गया और न ही यह स्पष्ट किया गया कि उन युवतियों की भूमिका क्या थी।
अधिकारियों की चुप्पी और बढ़ते सवाल जब इस मामले में एसडीओपी संजय चतुर्वेदी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि थाना प्रभारी कार्रवाई कर रही हैं और जल्द जानकारी देंगी। शहर में चर्चा है कि यदि ठगी का बड़ा गिरोह था, तो बिना एफआईआर और बिना ठोस कार्रवाई के युवतियों को क्यों छोड़ा गया? और यदि वे निर्दोष थीं, तो पत्रकारों के कैमरे से पुलिस को इतना डर क्यों था?
शादी के नाम पर ठगी का बड़ा जाल
जानकारी के अनुसार टीवी टावर के पास स्थित एक जैन समाज के व्यक्ति के मकान में लंबे समय से एक कार्यालय संचालित किया जा रहा था। यहाँ शादी कराने के नाम पर दूर-दराज से आने वाले लोगों से मोटी रकम वसूली जाती थी। आरोप है कि यह गिरोह शादी का झांसा देकर लोगों को ठगता था, लेकिन किसी की भी शादी संपन्न नहीं कराई जाती थी। यह गिरोह महीनों से पुलिस की नाक के नीचे सक्रिय था, जिसकी भनक पुलिस को अब जाकर लगी।
पत्रकारों के साथ बदसलूकी और डेटा डिलीट
दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ फिजिकल पुलिस ने अभद्र व्यवहार किया। थाने के बाहर खड़े पत्रकारों के मोबाइल फोन जबरन लेकर उनमें से कार्रवाई के वीडियो डिलीट करवा दिए गए। पुलिस की इस सेंसरशिप ने इस आशंका को जन्म दे दिया है कि क्या पुलिस इस मामले में कुछ खास तथ्यों या चेहरों को छिपाने का प्रयास कर रही है?
घंटों चली पूछताछ, फिर सब आजाद
थाना प्रभारी नम्रता भदौरिया के नेतृत्व में चली इस कार्रवाई में देर रात तक पुलिस कार्रवाई जारी है का रटा-रटाया जवाब देती रही। करीब 8 घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद रात 10 बजे अचानक सभी युवतियों को थाने से छोड़ दिया गया। इस मामले में न तो कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया गया और न ही यह स्पष्ट किया गया कि उन युवतियों की भूमिका क्या थी।
अधिकारियों की चुप्पी और बढ़ते सवाल जब इस मामले में एसडीओपी संजय चतुर्वेदी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि थाना प्रभारी कार्रवाई कर रही हैं और जल्द जानकारी देंगी। शहर में चर्चा है कि यदि ठगी का बड़ा गिरोह था, तो बिना एफआईआर और बिना ठोस कार्रवाई के युवतियों को क्यों छोड़ा गया? और यदि वे निर्दोष थीं, तो पत्रकारों के कैमरे से पुलिस को इतना डर क्यों था?