पोहरी। शिवपुरी जिले के पोहरी अनुविभाग के अंतर्गत आने वाले पवा सिद्ध स्थान पर बरसात के मौसम में जहां नदियों और झरनों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, वहीं श्रद्धालु खतरे को नजरअंदाज करते हुए अब भी पवा झरने पर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। हाल ही में आई बाढ़ जैसी स्थिति के दौरान कई लोग झरने के पास पानी के तेज बहाव में फंस गए थे, जिन्हें प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से बचाया गया। इसके बावजूद लोग चेतावनी की अनदेखी कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक कलेक्टर द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि बरसात के दौरान झरनों और नदियों के समीप जाने पर रोक रहेगी। बावजूद इसके रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवा झरने के नीचे घूमते, नहाते और फोटो खींचते नजर आ रहे हैं। यह लापरवाही किसी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।
स्थानीय ग्रामीण रामनारायण आदिवासी का कहना है कि "हमने कई बार श्रद्धालुओं को समझाया है कि बारिश में पानी का बहाव तेज होता है, लेकिन लोग हमारी बात नहीं मानते। प्रशासन को यहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी चाहिए।"
वहीं क्षेत्र के एक अन्य ग्रामीण राजेश राठौर ने बताया कि "पिछले सप्ताह ही कुछ लोग पानी में फंस गए थे, जिन्हें बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। अगर समय पर मदद न मिलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।"
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की चेतावनी और आदेशों के बावजूद न तो झरने पर पुलिस की तैनाती हो रही है और न ही रोको-टोको की व्यवस्था। यही कारण है कि लोग बिना डर-भय के पानी में उतर रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि "कलेक्टर के निर्देश का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और चौकीदारों की ड्यूटी लगाने की तैयारी की जा रही है।"
लोगों का कहना है कि जब तक झरने पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं की जाती, तब तक हादसे होने की आशंका बनी रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि वह पवा झरने पर सुरक्षा गार्ड, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग की व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित करे, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखा जा सके और किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
जानकारी के मुताबिक कलेक्टर द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि बरसात के दौरान झरनों और नदियों के समीप जाने पर रोक रहेगी। बावजूद इसके रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवा झरने के नीचे घूमते, नहाते और फोटो खींचते नजर आ रहे हैं। यह लापरवाही किसी भी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।
स्थानीय ग्रामीण रामनारायण आदिवासी का कहना है कि "हमने कई बार श्रद्धालुओं को समझाया है कि बारिश में पानी का बहाव तेज होता है, लेकिन लोग हमारी बात नहीं मानते। प्रशासन को यहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी चाहिए।"
वहीं क्षेत्र के एक अन्य ग्रामीण राजेश राठौर ने बताया कि "पिछले सप्ताह ही कुछ लोग पानी में फंस गए थे, जिन्हें बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। अगर समय पर मदद न मिलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।"
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की चेतावनी और आदेशों के बावजूद न तो झरने पर पुलिस की तैनाती हो रही है और न ही रोको-टोको की व्यवस्था। यही कारण है कि लोग बिना डर-भय के पानी में उतर रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि "कलेक्टर के निर्देश का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और चौकीदारों की ड्यूटी लगाने की तैयारी की जा रही है।"
लोगों का कहना है कि जब तक झरने पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं की जाती, तब तक हादसे होने की आशंका बनी रहेगी। प्रशासन को चाहिए कि वह पवा झरने पर सुरक्षा गार्ड, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग की व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित करे, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखा जा सके और किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
