रिंकू तोमर, शिवपुरी। शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के पास स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का अटल आश्रय योजना के तहत निर्माण किया गया था। इस कॉलोनी में 461 हाउस है,जिसमें एलआईजी क्लास 114 हाउस है और ईब्लूसी के 347 आवास है। इस कॉलोनी में हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने रिश्वत की दम पर करोडपतियो के दम पर कागजी गरीब बना दिया और आवास आवंटन कर दिए और जो इन आवासों के हकदार थे उनको उपेक्षित कर दिया है।
हाउसिंग बोर्ड ने शिवपुरी शहर में मेडिकल कॉलेज के पास अटल आश्रय योजना में तात्या टोपे नगर में 461 आवासों का निर्माण किया था और इसमें एलआईजी क्लास के 114 और ईडब्लूएस के 347 आवासों का निर्माण किया था। शिवपुरी समाचार की हाउसिंग बोर्ड एक्सपोज इस खबर में सबसे पहले आप यह जान ले कि एलआईजी
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में "एलआईजी" का मतलब "निम्न आय वर्ग" (Low Income Group) होता है। यह एक ऐसा आवास योजना है जो उन परिवारों के लिए बनाई गई है जिनकी आय कम है, आमतौर पर 3 लाख से 6 लाख प्रति वर्ष के बीच होती है।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ईडब्ल्यूएस (EWS) का मतलब "आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग" (Economically Weaker Section) होता है। यह एक सरकारी योजना है जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराना है।
शिवपुरी के तात्या टोपे नगर में हाउसिंग बोर्ड के कर्ताधर्ताओं ने एलईजी के आवास शहर के करोड़पतियों को आवंटित किए जाने का मामला प्रकाश में आ रहा है। इन आवासो की सूची में पटवारी,रेजंर,सहित स्वयं हाउसिंग बोर्ड के इंजीनियरो के मकान है। वही कुछ ऐसे लोगो को नाम भी 461 लोगों के नाम है जिन पर शहर के पुरानी वाली हाउसिंग बोर्ड में मकान है,जो अब कोठियों के रूप में कन्वर्ट हो चुके है। वही इस कॉलोनी में मकान मालिकों की सूची में कुछ ऐसे लोगों के नाम भी दिखाई दे रहे है जो अभी बैचलर है,और उनकी शादी भी नही है स्वाभाविक है इनके फर्जी राशन कार्ड लगाए है।
हाउसिंग बोर्ड की ये है गाइडलाइन और शर्तें
इन आवासों के स्वीकृत मालिक 15 वर्ष से पूर्व इस मकान को बेचने के लिए हाउसिंग बोर्ड से अनुमति लेनी होगी।
इन आवासों के पट्टाधारी इन आवास परिसर आवासीय उपयोग के अतिरिक्त काई उपयोग करेगा और ना ही किसी और को करने की अनुमति देगा।
इन आवासों में पट्टाधारी ही निवास कर सकता है,किराए पर नही दे सकता है। इन आवासों पर निर्माण कार्य नही किया जा सकता है।
461 आवास में 381 आवास किराए पर
सरकार से गरीब बनाकर स्वयं के रहने के लिए गए आवास शहर के करोड़पति,नौकरी पेशा लोगों ने लिए है। इनमे से 381 आवास ऐसे है जिनके पट्टाधारी अन्य किसी जगह निवास कर रहे हैं। यह अपनी आलीशान कोठी में निवास कर रहे है या फिर सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे है। इन लोगो को जब आवास की आवश्यकता नही थी तो फिर इन लोगों ने आवास क्यों लिए है यहां पात्र लोगों को आवास छिने गए है। हाउसिंग बोर्ड को इस कॉलोनी के पट्टे धारकों के जांच करनी चाहिए वही किराए पर चढ़ाए गए आवास धारियो को कब्जे से बेदखल कर इन आवासों की पुन:नीलामी प्रक्रिया करनी चाहिए।
