शिवपुरी। जनपद पंचायत शिवपुरी में जिंदा लोगों को मृत बताकर संबल योजना के तहत उनके रुपये निकालने का मामला सामने आया है। इसमें जनपद सीईओ से लेकर कंप्यूटर आपरेटर, शाखा प्रभारी और बाबू ने मिलकर कई जिंदा लोगों को कागजों में मृत बता दिया। इसके बाद संबल योजना के तहत मिलने वाली 4 लाख रुपये की राशि फर्जी तरीके से दूसरे खातों में डाल दी।
जांच में जनपद सीईओ गगन वाजपेई, राजीव मिश्रा व अन्य तीन पर धारा 420 और 120 बी के तहत कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों ने करीब 93 लाख रुपये की राशि फर्जी तरीके से निकाली है। यह पूरा घोटाला जनपद में किया गया है।
जानकारी के अनुसार वर्तमान शिवपुरी जनपद सीईओ गिर्राज शर्मा ने कोतवाली में एक आवेदन दिया। मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार मंडल भोपाल अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि गलत तरीके से निकाली गई। पूर्व में इस पर फिजिकल थाना क्षेत्र में एक मामला कंप्यूटर आपरेटर शैलेंद्र परमार व उसकी महिला मित्र पलक शर्मा पर मामला दर्ज हुआ था जिसमें जिंदा को मृत बताकर संबल की राशि निकाली गई थी।
मामले के खुलासे के बाद जब जांच हुई तो कई नाम सामने आए। इस पर कलेक्टर और सचिव के पत्रानुसार जिला पंचायत सीईओ की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई थी। जांच समिति ने पाया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी गगन वाजपेई एवं राजीव मिश्रा, कंप्यूटर आपरेटर शैलेंद्र परमार, शाखा प्रभारी साधना चौहान, सहा ग्रेड-3 लता दुबे की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इस विवरण के आधार पर कोतवाली पुलिस ने आरोपियों पर धारा 420 व 120बी के तहत मुकदमा लिखा है। यह घोटाला वर्ष 2018 से चल रहा था।
घोटाले का मास्टर माइंड कम्प्यूटर आपरेटर शैलेन्द्र परमार
पूर्व जनपद सीईओ सृष्टि भदौरिया ने 15 दिसंबर 2022 को फिजिकल थाने में संबल में हुए फर्जीवाड़े को लेकर एक शिकायती आवेदन दिया था। शिकायत में शिवपुरी तहसील के ग्राम इंदरगढ़ निवासी हरिओम शर्मा पुत्र रघुवर दयाल शर्मा को मृत बताकर उनकी पत्नी भारती शर्मा निवासी इंदरगढ़ को 4 लाख 6 हजार रुपए की राशि केनरा बैंक शाखा के खाता क्रमांक 110014778536 में भुगतान किया जाना बताया गया है। यह खाता भारती शर्मा का नहीं, बल्कि पलक शर्मा का था।
पलक ने भारती बनकर भुगतान ले लिया। बाद में चेक के जरिए पलक ने कंप्यूटर आपरेटर शैलेंद्र परमार को उसके हिस्से का भुगतान किया। मामला दर्ज करने के जब पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो करीब 25 ऐसे लोगों के नाम सामने आए जो जिंदा हैं, लेकिन उनको कागजों में मारा जा चुका है।
इस घोटाले में कंप्यूटर ऑपरेटर को मास्टर माइंड बताया गया है। हालांकि सीईओ की भूमिका भी पूरी तरह से स्पष्ट होकर आ चुकी है। शैलेंद्र कांट्रेक्ट पर कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर भर्ती हुआ था। महज 10 हजार रुपये की तनख्वाह वाले कंप्यूटर ऑपरेटर के पास एमजी हेक्टर प्लस, ग्लास्टर, स्कॉर्पियो सहित तीन लाख रुपये की कीमत की बाइक थी। इसे लेकर पंचायत में अक्सर उसके चर्चे रहते थे कि 10 हजार वेतन वाले कर्मचारी पर लग्जरी वाहनों का काफिला कहां से आया।
संबल योजना की राशि के गबन के मामले में मामला दर्ज किया गया है। इसकी जांच चल रही है।
अमित भदौरिया कोतवाली थाना प्रभारी
