शिवपुरी शहर में खेतो मे मुरम बिछाकर चूना डालकर लोगो को चूना लगा गए कॉलोनाइजर

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। शिवपुरी को सुंदर नगर बनाने के नाम पर सिर्फ चूना डाला जा रहा है,खेतो मे मुरम बिछाकर और चूना डालकर शहर की सुदंरता और लोगों को चूना लगाने का खेल पिछले 15 साल से अनवरत जारी है। शहर के चारो आरे नजर दौड़ाएं तो खेता मे प्लाट उगाने का खेल अभी जारी  हैं। अवैध कॉलोनी को बेचने के लिए दलाल पूरे के पूरे चंद्रकांता नाटक के मुख्य किरदार अईयार अपनी पूरी भूमिका इन खेतों मे उगे प्लाटो को बेचने मे मदद करते है,इधर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी केवल आफिस मे बेठकर कत्था-चूना सुपाडी और गुलकंद डला हुआ पान खाते रहते है।

मुरम बिछाई और लगा दिया चूना
खेल बड़ा सीधा और शातिर है। कॉलोनाइजर पहले सस्ते में खेत खरीदते हैं, फिर उस पर थोड़ी मुरम डलवाकर और चूने से रास्तों की मार्किंग कर उसे एक लग्जरी कॉलोनी कागतो मे प्रोजक्ट बनाकर और उसे फुलफ्रुप नंबर वन की कॉलोनी बताकर बेचना शुरू कर देते हैं। भोले-भाले लोग बिजली, पानी और चौड़ी सड़कों के वादों में फंस जाते हैं,और लोगो के फसाने का काम इन कॉलोनाईजरो के दलाल करते हैं। लेकिन जैसे ही आखिरी प्लाट बिकता है, कॉलोनाइजर गायब हो जाते हैं।

शहर की न्यू दर्पण कॉलोनी,दर्पण कॉलोनी, करौंदी, नमो नगर,और हवाई पट्टी के आगे वाली कॉलोनी जैसी कालोनियां एक बड़ा उदाहरण हैं। जहां प्लाटिंग के बाद बसाहट तो हो गई लेकिन जिन लोगों ने मकान बनाए वे सड़कों के लिए परेशान हैं। ऐसी कालोनियों के रहवासियों को बारिश के दिनों में कच्चे और बदहाल रास्तों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं पांच से सात साल बाद भी लोगों को पक्की सड़क या सौसी तक की सुविधा नहीं मिल सकी। अब लोग बदहाल और कच्चे रास्तों की समस्याएं लेकर जन सुनवाई में पहुंच रहे हैं,यहां के निवासी सालों बाद भी लोग पक्की सड़क और नालियों के लिए तरस रहे हैं।

प्रशासन की चुप्पी या मूक सहमति?
हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका की बिना अनुमति के शहर में कई स्थानो पर अवैध प्लाटिंग हो रही है। जब आम आदमी मकान बनाने की अनुमति लेने जाता है, तब उसे पता चलता है कि वह जिस जमीन पर खड़ा है, उसका तो डायवर्जन ही नहीं हुआ। इस पूरे गोरखधंधे पर जब एसडीएम आनंद राजावत से पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। वहीं एडीएम दिनेशचंद शुक्ला ने बड़ी चतुराई से गेंद दूसरे पाले में डालते हुए कह दिया कि—यह काम मेरे पास नहीं है, कलेक्टर या एसडीएम से बात करें।

रास्ता गायब, घर बने जेल
कसाना फार्म के पीछे का हाल तो और भी बुरा है। यहाँ कॉलोनाइजर ने 60 प्लाट तो काट दिए और मुख्य मार्ग का सपना भी दिखाया, लेकिन हकीकत में कोई रास्ता ही नहीं दिया। अब लोग प्लाट खरीदकर पछता रहे हैं क्योंकि बिना रास्ते के निर्माण सामग्री वहाँ तक पहुँच ही नहीं पा रही। ठकुरपुरा और ग्वालियर बायपास के पास की अवैध कॉलोनियों का हाल यह है कि बारिश में यहाँ पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।

पीड़ितों की जुबानी: मजबूरी और मलाल
हमने जैसे-तैसे अपना आशियाना बनाया, लेकिन अब रास्ता ऐसा है कि घर आने में भी डर लगता है। बारिश में हमारा घर टापू बन जाता है।
अक्षत अग्रवाल, निवासी शिवपुरी

कॉलोनी काटते समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, अब कोई पलटकर देखने वाला नहीं है। हम आज भी कच्ची सड़कों पर चलने को मजबूर हैं।
महेश कुमार, निवासी न्यू दर्पण कॉलोनी

शिवपुरी समाचार का निष्कर्ष
शिवपुरी में अवैध कॉलोनियों का यह नासूर बढ़ता ही जा रहा है। अगर समय रहते प्रशासन ने इन चूना लगाने वाले कॉलोनाइजरों पर नकेल नहीं कसी, तो आने वाले समय में शहर का ड्रेनेज और ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। फिलहाल तो जनता की गाढ़ी कमाई धूल और मुरम में दफन हो रही है।