लाल सिंह की मौत के जिम्मेदार कानूनी भाषा में गुर्जर हो सकते है,लेकिन वन विभाग का जानलेवा भ्रष्टाचार था- Shivpuri News

शेयर यादव@शिवपुरी। वन विभाग के जानलेवा भ्रष्टाचार के कारण बीते रोज एक जिंदा आदमी की मौत हो गई। कानूनी भाषा मे लाल सिंह के हत्यारे गुर्जर हो सकते हैं लेकिन घटना का मूल कारण तलाश किया जाए सामने जानलेवा भ्रष्टाचार आऐगा। नरवर थाना क्षेत्र में आने वाले शेरगढ़ में हुई हत्या का कारण वन भूमि पर अतिक्रमण हैं।

लालसिंह पाल उम्र 50 साल पुत्र चन्नूराम पाल निवासी शेरगढ़ पर बुधवार को दूसरे पक्ष के लोगों ने लाठियों से हमला कर दिया और गोली मार दी। लाठियों से हमला और जांघ में गोली लगने से गंभीर घायल लालसिंह को नरवर अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। शिवपुरी से भी ग्वालियर रेफर किया गया लेकिन ग्वालियर पहुंचने से पहले रास्ते में ही लालसिंह की मौत हो गई।

लड़ाई की जड़ वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत

गुर्जर वन विभाग की 500 बीघा से अधिक जमीन जोतते हुए है। मृतक लाल सिंह ने भी जमीन जोतने की कोशिश की थी। लाल सिंह पाल ने गुर्जरों की इस अवैध खेती की शिकायत की थी,जिस पर उल्टा वन विभाग ने लाल सिंह का ट्रैक्टर पकड़ लिया,यही से इस दुश्मनी खुनी रंजिश में बदल गई इस टैक्टर को पकडने की पीआर वन विभाग ने काटी थी। इसके लेकर लाल सिंह और इनके परिजनों ने मंगलवार को जनसुनवाई में एक शिकायती की जो की वनभूमि में अवैध अतिक्रमण के लेकर थी, यही शिकायत को लेकर ये लोग डीएफओ मैडम के पास पहुंचे थे।

जिले में हजारो बीघा वन भूमि पर अतिक्रमण

जिले के सतनवाडा परिक्षेत्र में हजारों बीघा जंगल साफ कर खेती की जा रही है। वन भूमि पर अतिक्रमण आपसी रंजिश का शिकार वन रहे हैं। जानकारी मिल रही हैं कि कलोथरा पंचायत में आने वाले गांव भैसोरा में सगोन के पेड काटकर 500 बीघा जमीन पर स्थानीय गुर्जरों ने वन भूमि पर कब्जा कर खेती की जा रही हैं।

इस जमीन पर कभी वन विभाग ने सागौन के पेड़ के नर्सरी लगाई थी। वही गुनाया में लगभग 300 बीघा जंगल साफ कर खेती की जा रही हैं। वही इमलिया पंचायत में भी लगभग 100 बीघा जंगल पर कब्जा कर खेती की जा रही है। सबसे बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि भानगढ़ में एबी रोड की पट्टी पर ही वनभूमि पर कब्जा कर अवैध अतिक्रमण कर रखा है।

जंगल की भूमि पर कब्जा किए जाने के कारण गौवंश को लेकर ग्रामीण परेशान हो रहे है। अतिक्रमणकारियों ने अपनी खेती के लिए तार फेंसिंग की है जिससे पशुधन के जंगल में जाने के रास्ते अवरूद्ध हो गए जिससे ग्रामीणों में आपसी रंजिश बढ रही हैं। ऐसे में शिकवे शिकायतों का क्रम चलता है इस कारण शेरगढ़ जैसे उदाहरण हमारे सामने आ रहे है।

वही इस प्रकार संरक्षित जंगल की कटाई की जाएगी तो शिवपुरी जिले में वन भूमि समाप्त हो जाऐगी। अतिक्रमण स्पष्ट दिखता है,जंगल की कटाई स्पष्ट दिखाई दे रही है लेकिन रेंज अधिकारी शांत बैठे है ऐसा क्यों यह सवाल बार बार उठता हैं और यह जानलेवा भ्रष्टाचार ऐसे ही चलता रहा तो ऐसे कई काण्ड जिले में आगे देखने को मिल सकते हैं।