क्यो मनाई जाती हैं नवरात्रि, श्रीराम-रावण हैं कथा में, महिषासुर का वध किया था- Shivpuri News

शिवपुरी।
सोमवार 26 सितंबर से शारदीय नवरात्रि का आरंभ हो रहा हैं। पूरे देश में नवरात्रि बडी ही धूम धाम से मनाई जाती हैं। नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान शक्ति देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है,यह तो लगभग सभी पर ज्ञात है कि नवरात्रि में मां के नौ रूपों की पूजा होती हैं लेकिन क्यों आइए जानते है क्या कथा हैं............

नवरात्रि से जुड़ी प्रमुख कथाएं

नवरात्रि की कथा लंका युद्ध में ब्रह्मा जी ने श्री राम से रावण वध के लिए चंडी देवी का पूजन कर देवी को प्रसन्न करने को कहा और विधि के अनुसार चंडी पूजन और हवन हेतु दुर्लभ 108 नीलकमल की व्यवस्था भी करा दी। वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरत्व प्राप्त करने के लिए चंडी पाठ प्रारंभ कर दिया। यह बात इंद्र देव ने पवन देव के माध्यम से श्रीराम के पास पहुँचाई और परामर्श दिया कि चंडी पाठ यथासंभव पूर्ण होने दिया जाए।

यह बात इंद्र देव ने पवन देव के माध्यम से श्रीराम के पास पहुँचाई और परामर्श दिया कि चंडी पाठ यथासंभव पूर्ण होने दिया जाए। इधर हवन सामग्री में पूजा स्थल से एक नीलकमल रावण की मायावी शक्ति से गायब हो गया जिससे श्रीराम की पूजा बाधित हो जाए। श्री राम का संकल्प टूटता नजर आया। भय इस बात का था कि देवी माँ रुष्ट न हो जाएँ । दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्था तत्काल असंभव जाएँ।

दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्था तत्काल असंभव थी, तभी श्रीराम को याद आया कि उन्हें कमल नयन नवकंज लोचन भी कहा जाता है तो क्यों न एक नेत्र को वह माँ की पूजा में समर्पित कर दें और प्रभु राम जैसे ही तूणीर से एक बाण निकालकर अपना नेत्र निकालने के लिए तैयार हुए, तब देवी ने प्रकट हो हाथ पकड़कर कहा - राम मैं प्रसन्न हूँ और ऐसा कहकर भगवान राम को विजयश्री का आशीर्वाद दिया।

दूसरी तरफ़ रावण की पूजा के समय हनुमान जी ब्राह्मण बालक का रूप धरकर हनुमान जी की सेवा में जुट गए और पूजा कर रहे ब्राह्मणों से एक श्लोक "जयादेवी भूर्तिहरिणी" में "हरिणी" के स्थान पर "करिणी” उच्चारित करा दिया। हरिणी का अर्थ होता है भक्त की पीड़ा हरने वाली और करिणी का अर्थ होता है पीड़ा देने वाली। इससे माँ दुर्गा रावण से नाराज़ हो गईं और रावण को श्राप दे दिया। रावण का सर्वनाश हो गया।

दूसरी कथा इस पर्व से जुड़ी एक अन्य कथा अनुसार देवी दुर्गा ने एक भैंस रूपी असुर अर्थात महिषासुर का वध किया था। महिषासुर को उसकी उपासना से ख़ुश होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वरदान दिया था। उस वरदान को पाकर महिषासुर ने उसका दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और नरक को स्वर्ग के द्वार तक विस्तारित कर दिया।

महिषासुर ने सूर्य, चन्द्र, इन्द्र, अग्नि, वायु, यम, वरुण और अन्य देवताओं के भी अधिकार छीन लिए और स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा। देवताओं को महिषासुर के भय से पृथ्वी पर विचरण करना पड़ रहा था। तब महिषासुर के दुस्साहस से क्रोधित होकर देवताओं ने माँ दुर्गा की रचना की । महिषासुर का वध करने के लिए देवताओं ने अपने सभी अस्त्र-शस्त्र माँ दुर्गा को समर्पित कर दिए थे जिससे वह बलवान हो गईं। नौ दिनों तक उनका महिषासुर से संग्राम चला था और अन्त में महिषासुर का वध करके माँ दुर्गा महिषासुर मर्दिनी कहलाईं।तब से ही नवरात्रि का पर्व मनाने की शुरुआत हुई।