व्यापार में ईमानदारी और मेहनत को धर्म बनाकर ही सोच से बड़ा एम्पायर खड़ा किया सेठ चंद्रकुमार जैन पत्ते वालो ने- Shivpuri News

 

शिवपुरी। संस्कृत में महावाक्य धर्मो रक्षति रक्षितः यह शब्द आपने अवश्य सुना होगा,इसका अर्थ होता हैं धर्म की रक्षा करने पर( रक्षा करने वाले की धर्म रक्षा करता है)। इस महावाक्य को अपने जीवन और अपने व्यवसाय की आत्मा मानते हुए व्यवसाय करने वाले शिवपुरी शहर के प्रसिद्ध तेंदूपत्ता व्यवसाई सेठ चंद्रकुमार जैन पत्ते वाले की फर्म ने मध्य प्रदेश में सबसे बडा आयकर दाता की पुरस्कार प्राप्त किया,

यह क्षण शिवपुरी के प्रत्येक व्यापारी के लिए गौरव का क्षण हैं कि शिवपुरी जिले के व्यापारी को यह पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस पुरस्कार के पीछे इस सफल व्यवसायी के 2 गुण सामने आए कि अपने व्यापार में ईमानदारी और प्रतिदिन प्रतिपल कार्य करने का गुण आपके व्यापार को भी इतना बड़ा बना सकते हैं।

आज का युवा एमबीए की पढाई कर व्यापार के गुण प्राप्त कर रहा हैं,लेकिन जिले की कोलारस तहसील में अपनी पढाई करने वाले सेठ चंद्रकुमार जैन में व्यापार के यह गुण उनके डीएनए में ही थे। उनके पिता स्व जयनारायण जैन से सीखे थे और अपने पिता के व्यापार के गुणों को विकसित कर कोलारस में जन्म लेने वाला बालक चंद्रकुमार मप्र नहीं पूरे भारत में सेठ चंद्रकुमार जैन पत्ते वाले के नाम से जाना गया।

मध्यप्रदेश ही नही बल्कि पूरे भारत में शिवपुरी के तेंदूपत्ते की पहचान कराई। अब जिले का यह व्यवसाय इतना बड़ा है कि शिवपुरी के मजदूरों को 1 हजार करोड़ का बोनस बांटना पड़ता हैं। इसके लिए कोलारस में जन्म लेने वाले एक बालक चंद्र कुमार को एक पथ पर चलना पड़ा अपने व्यापार में ईमानदारी को धर्म मानते हुए अपने धर्म पर चलना पडा,साथ में अपने परिवार के जिम्मेदारी और समाज के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए यह मुकाम हासिल किया।

शिवपुरी के व्यापारियो के लिए सेठ चंद्रकुमार जैन के व्यापारिक गुणों को आत्मसात करना चाहिए। क्योंकि ऐसा माने की एक बंजर जमीन में एक पेड़ बरगद का ऐसा लहराया जिसने अपनी जडे तो मजबूत की साथ में अपनी छांव में लोगों को शीतलता प्रदान की और शिवपुरी जैसे व्यापार में पिछड़े जिले में मप्र में सबसे बडा आयकर पुरस्कार जिले की झोली में लाकर उदाहरण दिया कि आप भी हार नहीं मानो मैंने भी हार मानी और सफलता यह हैं।

कोलारस का जैन परिवार स्वः जयनारायण जैन के यहा बालक चंद्रकुमार जैन का जन्म हुआ,प्राथमिक शिक्षा कोलारस में हुई और व्यापार के प्राथमिक गुण भी अपने पिता के कारोबार तेंदूपत्ते के व्यापार से ही सीखे। बालक चंद्रकुमार जैन अपने पिता के साथ ही साइकिल से जंगल में तेंदूपत्ता तुडवाने जंगल जाते थे। आज का जंगल और लगभग 7 दशक पहले के जंगल में जमीन आसमान का अंतर था। वाहन के नाम पर एक साइकिल और जंगल में रोज बदलते रास्ते थे।

प्रतिदिन 100 किलोमीटर साइकिल चलती थी सेठ जी की

तेंदूपत्ता के लिए हर रोज जंगल जाना होता था,जंगल में जंगली जानवरों का डर साथ में डाकुओं की भी दहशत होती थी। मन में डर भी होता था कि डाकुओं से कही सामना हो गया इनके मन में भगवान के प्रति सच्ची आस्था और लगन के साथ ही वे अपने काम को करते थे। पहले गांव में सड़के नहीं होती थी कच्चे रास्तें तेदूपत्ता तुडवाने के लिए जाते थे। उस समय कई साधन नहीं होता था। तो साईकल चलाकर कर अपना काम करने के लिए निकल जाते थे।

हर रोज 100 किलोमीटर साइकल चलाते थे। गांव में अक्सर नदी चढ़ जाती थी। उसके भी तैरकर पार कर जान होता था तो वे यह भी करते थे। परन्तु अपना कार्य के प्रति जो ईमानदार थे।

20 वर्ष की उम्र में शादी, प्रधान परिवार के बने दामाद

शिवपुरी के प्रधान परिवार बेटी पिस्ता देवी जैन से युवा चंद्र कुमार की शादी हुई थी। पत्नी पिस्ता देवी ग्रहणी थी,लेकिन जीवन में वह भाग्य लेकर आई और शिवपुरी में व्यापार करने का एक रास्ता खुला। पत्नी ने भी हमेशा सत्कर्मों में साथ दिया।

शिवपुरी में आकर किया व्यापार का विकास

शादी के बाद 1975 में शिवपुरी आये और यहां रहकर तेंदूपत्ता का काम शुरू किया धीरे धीरे व्यापार को बढा या, उस समय शिवपुरी के तेंदूपत्ता की भारत में कोई पहचान नहीं थी ना शिवपुरी में इतना बड़ा कोई उद्योग नहीं था। चंद्रकुमार जैन ने भारत की कई राज्य में जाकर शिवपुरी के तेंदूपत्ता की मार्केटिंग की धीरे धीर शिवपुरी शहर के तेंदूपत्ता का मांग बढ़ने लगी । शिवपुरी के तेंदूपत्ता का एक भारत में एक अलग पहचान दिलाई।

आज शिवपुरी के ग्रमीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का आज लगभग 1000 करोड़ का बोनस मजदूरी मिलती है। चंदकुमार जैन को तेदूपत्ता का सबसे अधिक आयकर देने के लिए समानित किया गया एक सफल व्यवयाई के रूप में समूचे मध्यप्रदेश में अपनी पहचान वनाई ।

धर्म को अंगीकार किया: टाॅकिज के लिए खरीदी जमीन पर निर्माण हुआ जैन मंदिर का

सेठ चंद्रकुमार जैन ने विष्णु मंदिर रोड पर टॉकीज बनाने के लिए जमीन खरीदी थी,लेकिन जैन संत के कहने पर टॉकीज बनाने का प्रोजेक्ट छोड धर्म घर का निर्माण कराया। शिवपुरी के पुराने बस स्टैंड पर स्ािल आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर,इस मंदिर को सेठ चंद्रकुमार जैन ने अपने व्यय पर बनवाया,इस मंदिर की भूमि पर पहले टॉकीज बनवाने के लिए खरीदा गया था लेकिन उस समय जैन संत ने शिवपुरी जिले में चर्तुमास किया था और जमीन पर मंदिर बनाने को कहा। सेठजी ने जैन संत की वाणी को ईश्वर का आदेश मानते इस जमीन पर साल 1989 में आदिनाथ भगवान का मंदिर का निर्माण अपने व्यय से करवाया वही शहर के अन्य कई मंदिरों के निर्माण में भी आर्थिक सहयोग किया। वही शिवपुरी में जैन समाज के अध्यक्ष भी रहे,सभी सामाजिक कार्य में रूचि लेते थे।

अनुशासन और स्वच्छता पहली पसंद

सेठ जी सबसे अधिक वह स्वच्छता को महत्व देते थे,स्वयं भी अनुशासन में रहते थे और दूसरों को भी अनुशासन में रहने की प्रेरणा देते थे। इसलिए सेठजी का पूरा परिवार अनुशासन में रहा और आज भी अनुशासन में ही रहता था। सेठजी की धर्म में गहरी आस्था थी। जीवन के अखिरी 25 वर्षो में व्यापार को छोड़कर केवल मंदिर की सेवा की हमेशा सत्य बोलते थें। जैन धर्म के अुनसार आचरण रखते थे। रात के समय भोजन को निषेध मानते थे। कंद मूल फल नहीं लेते थे।

सेठ जी हमेशा कहते थे कि जीना मरना ईश्वर के हाथ में है बाकी मनुष्य का जीवन उसके हाथ में हैं अच्छा कर्म ओर अपने ईश्वर की प्रति श्रद्धा रखे तो हर काम आपका सिद्ध होगा,किसी के साथ भी धोखा नहीं देना,जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा। इसलिए भूखों को भोजन कराना,प्यार के लिए प्याऊ,ठंड में गरीबों के लिए कंबल बांटना उनका दिनचर्या का हिस्सा था।

चंद्रकुमार जैन के चार भाई थे जिसमें सबसे बडे स्वः बचनलाल जैन पूर्व विधायक देवेन्द्र जैन और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र जैन गोटू के पिताजी थे। दूसरे नम्बर के स्वयं थे। तीसरे विमल कुमार जैन 40 वर्ष पहले नगर पालिका उपाध्क्ष कोलारस रहे थे। सबसे छोटे भाई थे स्वः ऋषभ जैन चंद्रकुमार जैन के पांच बेटे और तीन बेटियां है। वीरेन्द्र कुमार जैन व्यावसाई समाजसेवी महेंद्र कुमार जैन जैन मिलन समाज के राष्ट्रीय पदाधिकारी है।

राजेश कुमार जैन भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार जैन इंदौर में इनका प्रॉपर्टी का व्यवसाय है। नेमिचंद्र जैन मुंबई में एक्सपोर्ट इम्पोर्ट का बिजनेस का बिजनेस हैं।

बड़ी बेटी स्वः कुसुम जैन दूसरी बेटी ममता जैन जो मुंबई निवास करती है। सबसे छोटी बेटी रेनू जैन सूरत में रहती है। सेठ चंद्र कुमार जैन का 90 साल की उम्र में 8-05-2021 को देवलोकगमन हुआ थां।