Shivpuri News- जिन परिवारों में इन APP का उपयोग होता है वह कभी नहीं टूटता: प्रसिद्ध जैन संत के दर्शन विजय जी

शिवपुरी। यह मनुष्य का पुण्य है कि प्राणी जगत में सिर्फ इंसान को जन्म लेने के साथ ही परिवार मिल जाता हैं, जो जीवन की अंतिम सांस तक हर सुख दुख में उसके साथ रहता है। जिंदगी की संपदा चाहे धन हो या यश हो, उसे प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है। जबकि परिवार की प्राप्ति पुण्य से होती है। लेकिन आज के दौर में क्षुद्र कारणों से परिवार टूटते जा रहे हैं और इसके साथ ही जीवन में तनाव, घुटन, बेचैनी, डिप्रेशन, हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं।

उक्त उद्गार शिवपुरी में अपने दादा गुरु की समाधि भूमि पर चार्तुमास कर रहे प्रसिद्ध जैन संत के दर्शन विजय जी ने आराधना भवन में आयोजित साप्ताहिक आध्यात्मिक शिविर में व्यक्त किए। शिविर में सेव फैमिली ;परिवार बचाओ विषय पर जैन मुनि ने अधिकारपूर्वक वक्तव्य दिया और बताया कि किन कारणों से परिवार टूटते हैं और परिवारों को टूटने से कैसे बचाया जा सकता है।

धर्मसभा में जैनाचार्य कुलचंद्र विजय जी महाराज साहब के मांगलिक पाठ का लाभ धर्मावलंबियों ने उठाया। आध्यात्मिक शिविर के लाभार्थी केवल चंद्र जी, अशोक गुलिया परिवार रहे। जिनके सौजन्य से शिविर और साधर्मिक वात्सल्य का लाभ लोगों ने उठाया।

तीन कारणों से टूटते हैं परिवार
पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी ने परिवार टूटने के कारणों का जिक्र करते हुए कहा कि संपत्ति शक्ति और शब्दों के दुरुपयोग से परिवार टूटते हैं। संपत्ति और शक्ति की तुलना में शब्दों के बाण परिवार टूटने ेमें अधिक अहम भूमिका निभाते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अंधों के जाये अंधे होते हैं। यह यदि द्रौपदी दुर्योधन से नहीं कहती तो महाभारत नहीं होता।

उसी तरह रामायण भी मंथरा के शब्द बाण से घटित हुई। घर.घर में रामायण और महाभारत न हो इसलिए आवश्यक है कि हम अपने शब्दों पर अंकुश लगाएं और तोल.तोल कर बोले। महाराज श्री ने बताया कि परिवार टूटने से बचाने के लिए 6 ऐप हैं और इन 6 ऐप्स के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया।

01 फिनिश फाइट ;झगड़ा समाप्त करो,

महाराज श्री ने अपने उदबोधन में कहा कि हर परिवार में मतभेद होते हंै। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि मतभेद मनभेद की सीमा तक न पहुंचे। बल्कि उसके पहले ही अपनी फाईट को समाप्त कर दें। इसके लिए परिवार के मुखिया को चाहिए कि वह अपने इगो को न बचाएंए बल्कि इसके स्थान पर संबंध को बचा लें।

02 फाइंड एबिलिटी ; परिवार के सदस्यों की योग्यताओं को तरासें

परिवार बचाने के दूसरे एप फाइंड एबिलिटी का जिक्र करते हुए जैन संत ने कहा कि परिवार के मुखिया का यह भी दायित्व है कि वह अपने कुटुम्ब के एक.एक सदस्य की योग्यता को बाहर निकालने का प्रयास करें। यदि वह पारिवारिक सदस्यों की योग्यता को तरासेंगे तो इससे घर का माहौल अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि संसार में हर व्यक्ति सार्थक है कोई निरर्थक नहीं है। सार्थकता बाहर निकलकर आए इसके लिए आवश्यक है कि प्रोत्साहन प्रेम और प्रेरणा से मुखिया अपने सदस्यों को निखारें।

03 फ्रीक्वेंटिली मोटिवेट: लगातार प्रेरित करना

परिवार की सुख शांति और उसके संरक्षण के लिए मुखिया का यह भी दायित्व है कि वह अपने घर के एक.एक सदस्य को लगातार प्रेरित करें। समय.समय पर उन्हें प्रेम और सम्मान दें। उन्होंने कहा कि पहले के समय मेें इंसान का मन इतना कमजोर नहीं था, और उसे मोटिवेशन की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन आज तो व्यक्ति को हर पल मोटिवेशन ;प्रेरणा द्ध की आवश्कता होती है। शायद इसी कारण वर्तमान में मोटिवेशनल स्पीकर की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

04 फील इम्पोर्टेंस: आप खास हो इसे महसूस कराना

महाराज श्री ने चौथे एप का जिक्र करते हुए कहा कि मुखिया का यह भी दायित्व है कि वह एक.एक सदस्य को महसूस कराए कि वह उसके लिए खास है। परिवार का हर व्यक्ति उसके लिए इम्र्पोटेंट है। संसार में लोग पैसे के भूखे कम हैं लेकिन उन्हें सम्मान मिले इसकी भूख सब में हैं और जब आप सम्मान देंगे तो परिवार क्यों नहीं बचेगा। हर व्यक्ति खराब है यह धारणा मुखिया की नहीं होनी चाहिए। उन्होंने एक कविता सुनाते हुए कहा कि माना कि दुनिया बुरी है हर तरफ धोखा हैए हम तो अच्छे बन जाए हमको किसने रोका है।

05 . फॉरवर्ड लव: प्रेम को विस्तार 

महाराज श्री ने परिवार बचाने के 5वें एप फॉरवर्ड लव का जिक्र करते हुए कहा कि मुखिया का यह भी प्रमुख दायित्व है कि वह एक.एक सदस्य को समान भाव से प्रेम करे। किसी भी सदस्य को यह एहसास नहीं होना चाहिए कि मुझसे प्रेम कम और दूसरे से ज्यादा किया जा रहा है। अपने प्रेम को संर्कीण मत बनाओ उसे केन्द्रित मत करो। बल्कि प्रेम को फैलाओ। महाराज श्री ने कहा कि प्रेम लेने वाला धनवान बन जाता है। लेकिन प्रेम देने वाला तो परमात्मा बन जाता है।

6 . फोरगिव यस्टर्डे: अतीत को भूल जाओ,

जैन संत कुलदर्शन विजय जी ने परिवार बचाने के 6वें एप फोरगिव यस्टर्डे का जिक्र करते हुए कहा कि परिवारों में अशांति का कारण इसलिए भी होता है क्योंकि हम भूतकाल की बुरी बातों को भूल नहीं पाते। किसी ने कोई गलती की होती हैए तो उसे बार.बार दोहराते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि डेढ़ साल पहले मैंने शिवपुरी में प्रवचन दिया था। वह आपको याद नहीं होगा। लेकिन पांच साल पहले दी गई गाली याद रखी जाती है। यहीं अशांति का कारण है।