Shivpuri News- भाजपा के अंर्तविरोध से जनता में निराशाः एक ही सवाल चुनाव में धनबल चला तो विकास कैसे होगा

शिवपुरी।
नगर पालिका शिवपुरी के पार्षद पदों के चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद जनता ने इस संदर्भ में राहत की सांस ली थी कि अब अध्यक्ष पद के चुनाव में पैसों का खेला नहीं होगा। भाजपा अध्यक्ष पद के प्रत्याशी का चयन कर लेगी और इससे चुनाव या तो निर्विरोध होगा और यदि चुनाव हुआ भी तो भाजपा प्रत्याशी को जीतने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

जब धनबल का बोलबाला नहीं होगा तो शहर का विकास प्राथमिकता के आधार पर होने की संभावना प्रबल रहेगी। लेकिन ऐसा होता हुआ नजर नहीं आ रहा। भाजपा में ही अध्यक्ष पद की खींचतान को लेकर दो धड़े बन गए हैं। एक धड़ा अपने पार्षदों को गुजरात ले गया है और दूसरे धड़े ने भी अपने पार्षदों को गुप्त जगह पर शिफ्ट कर दिया है।

अधिकांश पार्षदों के फोन बंद आ रहे हैं। आगामी 3 अगस्त को जबकि नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होना हैए ऊंट किस करवट बैठेगा यह अभी कोई कहने की स्थिति में नहीं है। बताया जाता है कि आज नगर पालिका चुनाव हेतु भाजपा द्वारा नियुक्त किए गए प्रभारी रूस्तम सिंह और प्रदेश सरकार की मंत्री तथा स्थानीय विधायक यशोधरा राजे सिंधिया पार्षदों से रायशुमारी हेतु शिवपुरी आ रही हैं। लेकिन इस बैठक में कोई ऐसा हल निकलेगा जिससे टकराव रूक जाए यह संभावना कुछ कम प्रतीत हो रही है।

नगर पालिका शिवपुरी के चुनाव में 39 वार्डों में से 22 वार्डों में भाजपा पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं और सूत्रों के अनुसार जीते गए 7 निर्दलीय पार्षदों में भाजपा के बागी पार्षदों की संख्या लगभग 4 है। नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए ये 22 पार्षद स्पष्ट रूप से दो गुटों में बंट गए हैं। नगर पालिका चुनाव में प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने विशेष रूचि लेकर मेहनत की थी और उन्होंने लगातार 5 दिन भाजपा प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रचार किया।

कुछ वार्डों में उन्होंने जनसम्पर्क किया और यहां जनसम्पर्क के लिए नहीं पहुंची वहां उन्होंने वार्ड के प्रभावी लोगों से बातचीत कर भाजपा की जीत के लिए जुट जाने को कहा। नपा चुनाव मेंं भाजपा प्रत्याशी चुनने की कमान भी उनके हाथों में केन्द्रित रही। यहीं कारण है कि भाजपा को परिषद में बहुमत मिला तो इसका श्रेय बहुत कुछ यशोधरा राजे के खाते में गया। लेकिन इसके बाद भी वह पार्टी को गुटबाजी से मुक्त नहीं करा पाईं।

सूत्रों के अनुसार चुने गए भाजपा के 22 पार्षदों में से अधिकांश पार्षद यशोधरा राजे खैमे के हैं। इस खैमे के पार्षदों की संख्या 14 से 15 बताई जा रही है। जबकि नरेंद्र सिंह तोमर खैमे और ज्योतिरादित्य सिंधिया खैमे के 7 से 8 पार्षद भी चुनाव जीतकर आए हैं। कोई कुछ भी कहे लेकिन सच्चाई यह है कि दोनों खैमों के पार्षदों में अंर्तविरोध जर्बदस्त है। दोनों खैमे चाहते हैं कि अध्यक्ष पद पर उनका कब्जा हो। नपाध्यक्ष पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित है।

यशोधरा राजे खैमे की ओर से फिलहाल जो नाम चर्चा में हैंए वह दीप्ति भानू दुबे का बताया जा रहा है। हालांकि अधिकृत रूप से अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस नाम के सामने आने के बाद दूसरे खैमे में प्रतिक्रिया और तीव्र हुई है। नरेंद्र सिंह तोमर खैमे की ओर से अध्यक्ष पद के लिए सरोज रामजी व्यास का नाम सामने आ गया है। दोनों खैमे भाजपा के पार्षदों को अपनी तरफ लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

लेकिन पार्षद जाएंगे किधर यह कहने की स्थिति में कोई भी नहीं है। अविश्वास के बादल इतने घने हैं कि पार्षदों की भले ही खैमेबंदी हो गई हो लेकिन उनका वोट किधर जाएगा यह कोई कहने की स्थिति में नहीं है। चूकि अध्यक्ष पद के चुनाव में दो खैमे आ गए हैं। इसलिए पार्षदों की खरीद फरोख्त की भी चर्चा होने लगी है।

सूत्रों के अनुसार पार्षद की रेट 10 लाख तक पहुंच गई है। ऐसी स्थिति में बड़ा सवाल यह है कि यदि नपाध्यक्ष पद का चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी को करोड़ों रूपए की राशि खर्च करनी पड़ी तो क्या शहर का विकास उसके लिए प्रथम पायदान पर होगा। इस सवाल का जबाव क्या है शायद सबको पता है और यह एक बड़ी चिंता का कारण है।