विधायक वीरेंद्र रघुवंशी की घेराबंदी- महेंद्र और देवेंद्र के गठबंधन ने सेमीफाइनल हराया- kolaras News

शिवपुरी।
नगर पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कोलारस भाजपा में अंदरूनी खींचतान के चलते विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को मात खानी पड़ी है। बदरवास, रन्नौद और कोलारस नगर पंचायत चुनाव में विधायक समर्थक प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ा है। उनके समर्थक प्रत्याशियों को पराजित करने में पूर्व विधायक महेंद्र यादव और देवेंद्र जैन एकजुट हुए। जिसके परिणामस्वरूप न तो नगर पंचायत बदरवास में दोनों पदों पर भाजपा समर्थक प्रत्याशियों को सफलता मिली और न ही वह कोलारस और रन्नौद में अपने समर्थक प्रत्याशियों को उपाध्यक्ष बनवा सके।

यहां तक कि अफसरशाही भी उनके शिकंजे में नहीं आई और कोलारस नगर पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव में तो एसडीएम ब्रजबिहारी श्रीवास्तव और विधायक वीरेंद्र रघुवंशी सार्वजनिक रूप से आमने.सामने आ गए। श्री रघुवंशी ने एसडीएम श्रीवास्तव पर टेंडर वोट के नियम में अनियमितता करने का आरोप लगाया। यह चुनाव आने वाले विधानसभा चुनाव की तस्वीर भी साफ करता हैं कि आने वाले समय में पूर्व विधायकों की जोडी महेंद्र और देवेंद्र विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी पर भारी पडने वाले है। इससे पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष गोटू से मुंह की खा चुके है।

जिला पंचायत की वार्ड क्रमांक 20 से आमने सामने सदस्य के चुनाव में रघुवंशी पूर्व जिला पंचायत गोटू से चुनाव हारे,इसके बाद विधायक महोदय ने अपनी धर्म पत्नी विभा रघुवंशी को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लडया,लेकिन गोटू की गोटियों के आगे विधायक महोदय के आंकड़े बिगड गए थे और विभा रघुवंशी पर पर्याप्त संख्या बल होते हुए भी चुनाव हार गए।

कोलारस विधानसभा में आने वाली बदरवास निकाय चुनाव में भी विधायक रघुवंशी और नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भूपेंद्र यादव भोले खुलकर एक.दूसरे के आमने.सामने आ गए। श्री भोले जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लाल साहब यादव के पुत्र हैं। एक जमाने में विधायक वीरेंद्र रघुवंशी और लाल साहब यादव तथा पूर्व विधायक महेंद्र सिंह यादव के पिता जिला कांग्रेस और जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष स्व. रामसिंह यादव तीनोंं ही कांग्रेस में थे और कट्टर सिंधिया समर्थक माने जाते थे। लेकिन ज्योतिरादित्य ङ्क्षसंधिया से बाद में नाराजगी के चलते वीरेंद्र रघुवंशी ने कांग्रेस छोड़ दी और वह भाजपा में आ गए। कांग्रेस में भी विधायक वीरेंद्र रघुवंशी की स्व. लाल साहब यादव और स्व. रामसिंह यादव से राजनैतिक अदावत चलती रहती थी और आज भी यह रिश्ते सामान्य नहीं हो पाए हैं।

नगर पंचायत बदरवास के चुनाव में स्व. लाल साहब यादव के पुत्र भूपेंद्र यादव भोले और स्व. रामसिंह यादव के पुत्र पूर्व विधायक महेंद्र यादव एकजुट हुए और इस खैमे को पूर्व विधायक देवेंद्र जैन ने जुड़कर और मजबूती प्रदान कर दी। नगर पंचायत बदरवास के अध्यक्ष पद के चुनाव में इस खेमे ने प्रयाग बाई परिहार को अध्यक्ष और भूपेंद्र यादव भोले को उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित किया। 

दोनों प्रत्याशियों के पक्ष में भाजपा ने मेंडेट जारी किया। लेकिन विधायक वीरेंद्र रघुवंशी सहमत नहीं थे कि प्रयाग बाई अध्यक्ष और भूपेंद्र यादव उपाध्यक्ष बने। हालांकि भाजपा स्पष्ट बहुमत में थी और उसे 15 में से 10 पार्षदों का समर्थन हासिल था। निर्दलीय पार्षद 5 वार्डों में  जीते थे और कांग्रेस का खाता शून्य था। लेकिन इसके बाद भी भाजपा नेताओं की टकराहट के चलते चुनाव की स्थिति बन गई।

प्रयाग बाई के विरोध में निर्दलीय नीलम परिहार और भूपेंद्र यादव के विरोध में निर्दलीय मनीषा ग्वाल ने फॉर्म भर दिया। इस चुनाव में भूपेंद्र यादव के साथ खुले रूप में पूर्व विधायक महेंद्र यादव थे। भूपेंद्र महेंद्र और देवेंद्र की तिकड़ी ने तीन पार्षदों के बदले टेंडर वोट डलवाए। जिसका विरोध विधायक रघुवंशी ने किया। 

यहां तक कि अध्यक्ष पद की प्रत्याशी प्रयाग बाई का भी टेंडर वोट डाला गया। नगर पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों के चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को सफलता मिली। विजयी प्रत्याशियों को 9-9 मत और पराजितों को 3-3 मत मिले। इस चुनाव में विधायक वीरेंद्र रघुवंशी को मात खानी पड़ी। बताया जाता है कि दोनों पराजित प्रत्याशियों का उन्होंने समर्थन किया था।

नगर पंचायत रन्नौद के उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी विधायक रघुवंशी अपनी समर्थक प्रत्याशी को नहीं जिता पाए। उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिलाकर भावना राजेश केवट को भाजपा में शामिल किया और उन्हें उपाध्यक्ष पद का मेंडेट भी दिलवाया। जबकि भाजपा पार्षद अमित बोहरे को मेंडेट नहीं मिला और वह निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में उतर गए। विधायक रघुवंशी की रणनीति सफल नहीं हो पाई और कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं भावना केवट को सिर्फ 4 मत मिले। जबकि विजयी प्रत्याशी अमित बोहरे 11 मत पाकर चुनाव जीत गए।

नगर पंचायत रन्नौद के उपाध्यक्ष पद के चुनाव में सब कुछ अनुकूल होने के बाद भी भाजपा को मात खानी पड़ी। विधायक रघुवंशी को कोलारस नगर पंचायत के उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी मात खानी पड़ी। उनके प्रेशर के फलस्वरूप भाजपा ने कोलारस में उपाध्यक्ष पद हेतु किसी को मेंडेट नहीं दिया। विधायक रघुवंशी के समर्थन से विकास कुशवाह ने उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। जबकि पूर्व विधायक महेंद्र यादव और देवेंद्र जैन ने रोहित वैश्य को चुनाव मैदान में उतारा और श्री वैश्य 9 मत प्राप्त कर चुनाव जीत गए। जबकि विकास कुशवाह को सिर्फ 6 मत मिले।

नवनियुक्त भाजपा नेताओं के दबाव में प्रशासन काम कर रहा है: विधायक रघुवंशी

विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने पूर्व विधायक महेंद्र यादव पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र कोलारस में प्रशासन नवनियुक्त भाजपा नेताओं के दबाव में काम कर रहा है। कोलारस एसडीएम ब्रज बिहारी श्रीवास्तव का व्यवहार बहुत शर्मनाक है। मुझे शर्म आती है कि वह मेरे निर्वाचन क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी हैं। श्री रघुवंशी ने एसडीएम पर नगर पंचायत चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि नगर पंचायत बदरवास के चुनाव में अपात्र लोगों को टेंडर वोट डालने की पात्रता दी गई। जबकि टेंडर वोट सिर्फ उन्हीं के डल सकते हैं जो जनप्रतिनिधि निरक्षर या विकलांग है। लेकिन एसडीएम ने पढ़े.लिखे बीए एमए लोगों के टेंडर वोट डालने की अनुमति दी। विधायक ने एसडीएम को चेताया कि यदि आपने चुनाव में कुछ भी गड़बड़ी करने की कोशिश की तो मैं ऐसे हालात बना दूंगा जिससे व्यवस्था संभालना मुश्किल हो जाएगा। अभी यहां इतना बड़ा हंगामा होगा। जिसे पूरा देश देखेगा।

इनका कहना है.
मुझ पर विधायक द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। मैंने विधायक को यह समझाने की कोशिश की थी कि टेंडर वोट की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की ही बनाई गई है। यदि कोई पात्र होता तो टेंडर वोट डलवाएंगे। कोलारस में कोई टेंडर वोट नहीं डाला गया।
ब्रज बिहारी श्रीवास्तव एसडीएम कोलारस