इस बाजार का नाम नाई की गली, दिल्ली में बार-बार बेइज्जती का परिणाम प्रगति बाजार: हलवाई खाने से हलवाई गायब - Shivpuri News

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काजल सिकरवार@ शिवपुरी।
शिवपुरी समाचार लगातार आपको शिवपुरी की यूनिक हिस्ट्री से परिचय करा रहा है। आजादी से पूर्व शिवपुरी की एक रोड का नाम नाई की गली यह गली शहर की व्यस्त रोड हैं। नगर सेठ इस रोड पर निवास करते हैं। भीड भीड इतनी की आप फोर व्हीलर पार्क नही कर सकते,बीच में हलवाई खाना,लेकिन हलवाई गायब,अब प्रगति बाजार आइए समझते हैं नाई की गली से इस बाजार का नाम प्रगति बाजार तक सफर।

पहले आप समझे की नाई की गली जो अब प्रगति बाजार के नाम से जानी जाती हैं यह कहां हैं। आप समझे गांधी चौक पर से 2 सडके निकलती हैं एक सदर बाजार वाली दूसरी नाई की गली। नाई की गली गोयल मेडिकल वाली बिल्डिंग से शुरू होकर टेकरी की ओर जाती हैं। इस गली का नाम नाई की गली था यह कोई गली नही बल्कि पूरी रोड हैं जिसकी चौड़ाई सदर बाजार की रोड की बराबर लगभग 22 से 25 फीट होगी।

गोयल मेडिकल की बिल्डिंग से शुरू होकर टेकरी की ओर जाने वाली रोड जो नाई गली हैं। इसका नाम नाई की दुकाने अधिक होने के कारण इस रोड का नाम नाई की गली पड़ा था। ओम डिस्ट्रीब्यूटर के संचालक पंकज गर्ग जो इसी रोड के निवासी हैं उन्होने बताया कि इस गली में पहली दुकान हैं मोहन सेन की थी जो कि 60-70 वर्ष पुरानी है और दूसरी दुकान का घनश्याम सेन और उसका भाई किशन सेन इनकी दुकान भी 60-70 वर्ष पुरानी है इनसे पहले इनकी दुकान इनके पूर्वज चलाया करते थे,जब पूरे बाजार के लोग इन्हीं दुकानों पर अपनी सेविंग और बाल कटवाने जाया करते थे। कुछ दुकानें भी नाईयो की इस गली में थी। इस कारण ही इस रोड का नाम नाई की गली रखा गया।

यह गली गांधी चौक से टेकरी की ओर से शुरू होती हैं और इस पर टेकरी की ओर चलते है और जहां महादेव मार्केट की सड़क इससे मिलती है और इस सड़क से बताशे वाली गली निकलती है वह एक चौक या चौराहा बनता है उस स्थान का नाम हलवाई खाना हो गया यहां चाट पकौड़ी के ठेले लगते थे। कुछ छोटी मोटी हलवाइयों की दुकाने थी।

यहां पर स्व:मन्या हलवाई भी कभी ठेला लगाया करते थे। इस कारण इस चौक या स्थान का नाम हलवाई खाना पडा गया जो आज भी यह नाम प्रचलन हैं। बाकी इस स्थान पर अलंकार पैलेस जैसे स्वर्ण आभूषण की शोरूम है,लेकिन वर्तमान में इस स्थान पर हलवाई या चाट का ठेला नही है।

धीरे धीरे समय बदला इस सड़क पर रेडीमेड की दुकाने,टेलर की दुकाने,नारियल विक्रेता,स्वर्ण आभूषणों की शोरूम ने अपना स्थान बना लिया। नाई की दुकाने कम होने लगी। इस रोड के व्यवसाई जब अपना पता देते थे तो लोग सुनते ही हंसते थे कि नाई की गली।

इस बाजार के व्यापारियो ने एक राय होकर इस बाजार का नाम प्रगति बाजार रख दिया। यह लगभग 20 साल पहले हुआ। नाई की गली से प्रगति बाजार के इस हिस्से में एक रोचक तथ्य है कि इस बाजार में एक रेडीमेड कपड़े की दुकान थी जब भी वह दिल्ली से माल लाते और माल शिवपुरी तक पहुंचाने के लिए दिल्ली का व्यवसाई जब ट्रांसर्पोट के लिए शिवपुरी में रेडीमेड कपड़े की दुकान का पता नोट करते तो नाई की गली सुनकर हंसते थे।

इस बेड फील को लेकर ही नाई की गली के नाम से मुक्ति पाने के लिए इस बाजार का नाम प्रगति बाजार रखा गया। इसके पीछे का लॉजिक वहां के दुकानदारों ने दिया कि दिल्ली का प्रगति मैदान बहुत ही फेमस हैं दूसरा सब अपनी प्रगति करना चाहते हैंं नाम का एक सकारात्मक अर्थ भी था इस कारण ही इसका नाम प्रगति बाजार कर दिया गया।

इस बाजार में कविता नर्सिंग होम,ओम डिस्टीबूटर,अलंकार पैलेस,किराने की बड़ी थोक दुकाने,टेकरी ओर जाती सड़क पर रेडीमेड की बडी बडी दुकाने,साड़ियों के बडे शौ रूम है।