नेताओं के खास ने फूड पार्क ही खरीद लिया- Shivpuri News

शिवपुरी। देश की आजादी को 75 साल हो चुके हैं, लेकिन शिवपुरी की धरा पर ऐसा कोई उद्योग धंधे की कोई बडी यूनिट नही लगी जिसमें शिवपुरी के युवाओं को रोजगार मिला हो। प्रकृति द्वारा एक ओर जहां उद्योगों के लिए पर्याप्त कच्चा माल जड़ी बूटी, पत्थर के रूप में दिया हैं वहीं कृषि के रूप में मूंगफली, टमाटर, कद्दू का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता हैं।  

उद्योग लगाने के लिए जनता द्वारा उठाई जा रही मांग पर जनप्रतिनिधियों ने सार्वजनिक मंचों से घोषणा करते हुए उद्योग लगाने के लिए स्थान चिन्हित कर भूमि पूजन भी एक बार नहीं कई बार किए जा चुके हैं, लेकिन वहां भूमि पूजन के पत्थर के अलावा आज तक कोई काम नहीं हुआ। हालात यह हैं कि बढ़ती हुई बेरोजगारी के कारण शिक्षित व अशिक्षित युवा रोजगार की तलाश में यहां से पलायन कर दीगर प्रांतों में अपना घर बाहर छोड़कर पड़े हुए हैं।

शिवपुरी जिले के रोजगार का हब बनाने के लिए तमाम तरह की अनुकूलता हैं एक ओर जहां से राजस्थान, उत्तर प्रदेश की सीमाएं लगी हुई हैं वहीं दूसरी ओर महानगर भी महज यहां से 100 कि.मी. की दूरी पर स्थित हैं आवागमन के सुगम पहुंच मार्ग हैं जहां से कच्चे और पक्के माल को आसानी से दीगर प्रांतों से लाया व पहुंचाया जा सकता हैं। वहीं दूसरी ओर प्रकृति ने भी रोजगार के लिए कई सौगातें दी हैं।

उद्योग को बढ़ावा देने के लिए वनों के रूप में जड़ी बूटियां, उच्च क्वालिटी का पत्थर दिया हैं।  वहीं पर्यटकों को लुभाने के लिए आकर्षक झरनों के साथ-साथ कई दर्शनीय स्थल भी मौजूद हैं। कृषि भूमि भी अपने हृदय से मूंगफली, टमाटर, कद्दू का उत्पादन प्रचुर मात्रा  पैदावार होती हैं यदि कमी हैं तो वह राजनीतिक इच्छाशक्ति की जिसके कारण आजादी के 70 साल बाद भी उद्योग स्थापित नहीं हो सका।

चुनाव के समय जनता में विरोध होने के कारण पिछले 10-12 सालों में उद्योग लगाने की घोषणायें बरसात की तरह मंचों से खूब की गई हैं। इतना ही नहीं जनता में विश्वास जगा कर वोट खींचने के लिए उद्योग क्षेत्र घोषित कर भूमि पूजन भी दर्जनों स्थानों पर किए गए हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी राजनीतिक दल जिसके द्वारा घोषणा की गई थी और भूमि पूजन किए थे उन नेताओं ने इस ओर मुड़ कर भी नहीं देखा।

बताया गया हैं कि लगभग 12 वर्ष पूर्व गुरावल में उद्योग लगाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा उद्योग लगाने के लिए भूमि पूजन किया जा चुका हैं। वहीं परिच्छा, पचीपुरा बैराड़, डेहरबारा, भेड़ फार्म पड़ोरा, बड़ौदी में फूड पार्क, पिछोर, करैरा सहित अन्य स्थानों पर उद्योग लगाने के लिए सैकड़ों बीघा जमीन चिन्हित कर वहां भूमि पूजन किया जा चुका हैं।

इन स्थानों पर उद्योग के लिए चिन्हित की गई भूमि पर लोगों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिए हैं। जिसकी तरफ भी शासन प्रशासन को देखने की फुर्सत नहीं हैं। एक आंकड़े के मुताबिक जिले के प्रत्येक गांव से बेरोजगार युवा बड़ी तादात में रोजगार की तलाश में दीगर प्रांतों में पहुंच चुका हैं। वहीं शहरी क्षेत्र के शिक्षित युवा भी रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं।

शासकीय योजनाओं से भी नहीं खड़ा कर पा रहे रोजगार  

शासन द्वारा चलाई जा रही स्वरोजगार योजना भी यहां के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में न कामयाब साबित हुई हैं। स्वयं का रोजगार स्थापित करने वाले युवाओं को भी प्रशासनिक स्थर पर भी कई समस्याओं का सामना करने को मजबूर हो जाते हैं। जी तोड़ मेहनत के बाद भी बेरोजगार युवा अपना रोजगार खड़ा नहीं कर पाते।

बताया गया हैं कि कुछ रोजगार स्थापित करने वाले युवाओं को भूमि तो आवंटित कर दी जाती हैं, लेकिन बैंकों से समय पर ऋण नहीं मिल पाने के कारण वह हार थक कर वह अपने घर बैठ जाता है और लीज पर ली हुई भूमि को उद्योग के स्थान पर किराये पर उठाकर अपना रोजगार चलाता हैं जबकि नियम यह हैं कि जिस उद्योग के लिए भूमि उद्योग विभाग द्वारा स्वीकृत की गई हैं उस भूमि पर वहीं उद्योग चालू करना आवश्यक होता हैं।

फूड पार्क उद्योग स्थापित करने के लिए आवंटित हुए प्लाट भी खरीदे जमीन कारोबारियों ने
शिवपुरी में फूड पार्क में उद्योग स्थापित कराने के लिए शासन द्वारा सस्ती दरों पर भूखंड आवंटित किए गए थे। जिससे शिवपुरी में रोजगार के अवसर पर पैदा किए जाए। लेकिन शिवपुरी के जमीन कारोबारियों द्वारा इन भू खण्डों को उद्योग विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर गुपचुप तरीके से डेढ़ घंटे के अंतराल में ही भू खण्डों को ऑनलाइन बुक कर दिए गए जिससे यह साफ जाहिर होता हैं कि कहीं न कहीं उद्योग विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी शिवपुरी में उद्योग स्थापित कराने में न काम साबित हो रहे हैं।