जिले की देसी मूंगफली ने देश में बनाई हैं अपनी पहचान, टेस्ट में काजू को देती हैं टक्कर- Shivpuri News

शिवपुरी
। जिले के करैरा क्षेत्र में पैदा होने वाली देशी मूंगफली ने देश में अपनी पहचान बनाई हैं। अपने स्वाद के लिए यह मूंगफली काजू को भी टककर देती है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली सहित अन्य प्रांतों में देशी काजू के नाम से पहचानी जाती हैं,लेकिन स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधि की दूरगामी सोच नही होने के कारण अब इसकी पैदावार पर असर पड रहा है। लगातार मूंगफली का रकबा घट रहा हैं।

काजू का टेस्ट: लोगो को रोजगार भी देता हैं

मूंगफली की पैदावार हर जगह होती है, लेकिन करैरा की देसी मूंगफली को रोस्ट करने के बाद कतई तिलहन की महक नहीं आती हैं। रोस्ट करने के बाद इसको लंबे समय तक रखा जा सकता है, इसको खाने में काजू जैसा स्वाद लगता है। करैरा नगर में मूंगफली के करीब 35 से 40 मिल हैं, जहां से सैकड़ों मजदूरों को काम मिलता है। इसके अलावा और कोई भी औद्योगिक धंधे नहीं हैं, जिससे मजदूरों को काम मिल सके।

देश के जवान की पहली पसंद: देशी काजू

करैरा में भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस बल की एसपीटी बटालियन और आरटीसी सहित दो शाखाएं होने के कारण यहां आने वाले सैनिकों को करैरा की मूंगफली खूब भाती हैं। जब भी कोई जवान करैरा आईटीबीपी में कोर्स या अन्य काम के लिए आता है तो वह अपने घर मूंगफली ले जाना नहीं भूलता है। इस संबंध में जब आईटीबीपी के जवान हाकिम सिंह, अश्वनी, पंकज से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि करैरा की मूंगफली का जो स्वाद है, वह हमारे यहां की मूंगफली में नहीं है। इसको खाने पर बिल्कुल तिलहन की महक नहीं आती और ऐसा स्वाद खाने में आता हैं जैसे काजू खा रहे हों।

आम के आम गुठलियों के दाम, छिक्कल पर्यावरण को बचता हैं

करैरा नगर में लगे मूंगफली के मिलो से जो छिलके निकलते हैं, वह राजस्थान के उदयपुर और मप्र के गुना में इसका प्लांट लगा है, जहां इससे लकड़ी बनाई जाती है। इससे बनने वाली लकड़ी मजबूत होती है।

गजक के टेस्ट में चार चांद लगाती हैंं

करैरा की मूंगफली की बात ही निराली है। इससे कई प्रकार की खाने के चीजें बनाई जाती हैं, जैसे गुड़ और शकर की गजक, टेस्टी, मिक्चर, नमकीन आदि चीजें बनाई जाती हैं।

सिंचाई के कारण पैदावार पर असर:कही पहचना न खो दे

करैरा में हर साल मूंगफली की फसल में गिरावट आने लगी है, क्योंकि करैरा में सिंचाई करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी के संसाधन होने के कारण धान की पैदावार बढ़ने लगी है। जहां एक ओर कभी 45 से ज्यादा मूंगफली के मिल चलते है । 20 से 25 मिल बंद भी हो गए हैं। जिले के उद्योग व्यापार संघ के जिलाध्यक्ष संजय पहारिया ने बताया कि हर साल जितना मूंगफली का रकबा होता था, इस साल धान का रकबा अपने आप बढ़ गया है।

किसान परेशान:धान की पैदावार में अधिक पैसा

बटानी मूंगफली से भी आई देसी मूंगफली की फसल में गिरावट पहले करैरा में देशी मूंगफली की ही खेती होती थी। इस साल देशी के अलावा बटाना मूंगफली की पैदावार अच्छी है। जो किसान मूंगफली की पैदावार करते हैं, उनका कहना है कि मूंगफली की जगह धान में ज्यादा फायदा है। जब धान की ज्यादा पैदावार होने लगेगी तो हम भी धान के प्लांट लगाएंगे। वैसे करैरा में देशी मूंगफली की कीमत 45 सौ से 55 सौ रुपए प्रति क्विंटल है और बटानी मूंगफली की कीमत 4 हजार से 42 सौ तक है।