युवा संवाद: कानून के विद्यार्थीयों ने विवेकानंद जयंती पर रखे मौलिक विचार- Shivpuri News

शिवपुरी।
आज विवेकानन्द जयन्ती के अवसर पर विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी शाखा शिवपुरी द्वारा आज शासकीय पी.जी. कॉलेज शिवपुरी के विधि विभाग के सभागार में लॉ स्टूडेंट्स के बीच 'युवा संवाद कार्यक्रम' का आयोजन किया गया. विवेकानंद केंद्र द्वारा आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम का नवाचार और उल्लेखनीय रोचक पहलू यह रहा कि लॉ स्टूडेंट्स ने भारतीय चेतना के सशक्त प्रवक्ता स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के पहुलओं से जुड़े विभिन्न प्रेरक प्रसंगों पर अपने मौलिक विचार व्यक्त किये।

लॉ स्टूडेंट आकांक्षा रघुवंशी ने कहा कि विवेकानन्द जी का जीवन सिर्फ खुद के लिए नहीं बल्कि देश और समाज के लिए जीने की प्रतिबद्धता का भाव हम सबके भीतर विकसित करता है. अनिकेत अग्रवाल ने कहा कि विवेकानंद जी ने आत्महीनता से ग्रस्त भारतीयों को अपनी संस्कृति, अपने धर्म और अपने राष्ट्र पर गर्व करना सिखाया. लॉ स्टूडेंट कृष्ण कुमार सिंह भदौरिया ने कहा कि विवेकानंद जी के जीवन से हम लक्ष्य केंद्रित और समाधान केंद्रित व्यक्तित्व के निर्माण की प्रेरणा ले सकते हैं।

लॉ स्टूडेंट सोनाली मिहोरिया ने कहा कि विवेकानन्द जी का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि हम जीवन का एक एक क्षण किस तरह 'राष्ट्र प्रथम' के भाव के साथ जी सकते हैं. लॉ स्टूडेंट अनुश्री चतुर्वेदी ने कहा कि विवेकानंद जी के जीवन से हम तार्किकता सीख सकते हैं कि किस तरह हमें खुद अपने विचारों की कसौटी पर किसी भी अवधारणा को सत्यापित करने के बाद ही उस पर यकीन करना चाहिए।

मयंक गुप्ता ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने फुटबॉल और खेल खेलने का आव्हान युवाओं से किया था क्योंकि खेल इंसान की ध्यान की प्रवृत्ति को संवर्धित करता है. टेक्नॉलाजी के आज के इस समय में स्पोर्ट्स की प्रासंगिकता बहुत बढ़ गयी है।

हर्षवर्धन गौर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी की ध्यान और एकाग्रता की शक्ति इतनी तीव्र थी कि वो महज कुछ घंटों में किताबों को पढ़कर याद कर लेते थे. लॉ स्टूडेंट अनामिका उपाध्याय ने विवेकानंद जी के जीवन के प्रसंगों को सामने रखते हुए कहा कि समय की उपयोगिता के माध्यम से हम किस तरह राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

अर्पण शर्मा ने विवेकानन्द जी के 11 सितम्बर 1893 के भाषण को भारत का दुनिया को जोड़ने वाला चिंतन बताया। लॉ स्टूडेंट तैयबा कुरैशी ने कहा कि विवेकानन्द जी के जीवन से देश को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखने का भाव सीखने की प्रेरणा मिलती है. पलक खंडेलवाल ने कहा कि विवेकानंद जी ने भारत की संस्कृति के उदार विचारों का प्रतिनिधित्व किया है. ऋषभ करोसिया ने विवेकानन्द और रामकृष्ण परमहंस के गुरु-शिष्य के आध्यात्मिक सम्बंधों को रेखांकित किया।

इससे पूर्व 'युवा संवाद कार्यक्रम' में बतौर मुख्य वक्ता विचार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर पल्लवी गोयल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का कर्म के सिद्धांतों पर प्रगाढ़ विश्वास था. उनके जीवन से कर्म करने की अद्भुत प्रेरणा हमें मिलती है. विवेकानन्द जी का मानना था कि ईश्वर कभी भी थाली में सजाकर किसी को कुछ नहीं देता।

विवेकानंद जी के वक्तव्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विवेकानन्द जी ने एक बार कहीं कहा था कि - "जब मैंने ईश्वर से रोटी और अनाज मांगा तो उन्होंने मुझे पहेलियाँ थमा दीं, जब पैसा मांगा तो ईश्वर ने मुझे मेहनत करने की प्रेरणा दी, जब मैंने खुशियां चाहीं तो ईश्वर ने मुझे दुःख से भरे लोग दिखाए, जब मैंने शांति चाही तो ईश्वर ने मुझे दूसरों की मदद करने का रास्ता दिखाया. कुलमिलाकर ईश्वर ने मुझे वो नहीं दिया जो मैंने चाहा था, ईश्वर ने मुझे वो दिया जो मेरे लिए जरूरी था।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रोफेसर दिग्विजय सिंह सिकरवार ने कहा कि विवेकानन्द जी का जीवन सही दिशा में सोचने वाले हर इंसान की ज़िंदगी मे आने वाले संघर्ष, त्रासदी और विजित होकर देश और समाज की प्रेरणा बन जाने की एक रोमांचक कहानी है. युवा संवाद कार्यक्रम में प्रस्ताविक वक्तव्य जन अभियान परिषद के ब्लॉक समन्वयक शिशुपाल सिंह जादौन ने रखा।कार्यक्रम की अध्यक्षता विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के संरक्षक गोपाल कृष्ण सिंघल ने की। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर नरेंद्र दीक्षित, जनअभियान परिषद की जिला समन्वयक डॉ. रीना शर्मा, ब्लॉक समन्वयक शिशुपाल जादौन, प्रमोद पाण्डेय, विमलेश गोयल मुख्य रूप से उपस्थित रहे।