साल में 400 करोड रूपए उगलने वाले ATM बूथों की सुरक्षा भगवान भरोसे, पुलिस करेगी बैंको को नोटिस जारी

शिवपुरी। बैंक की लापरवाही पुलिस को भारी पड गई। शुक्रवार-शनिवार की रात शहर के ग्वालियर बाईपास और कमलागंज स्थित एसबीआई के एटीएम बूथो पर सिक्योरिटी गार्ड न होने के कारण 42 लाख रूपए की चोरी हो गई। अब इस चोरी ने पुलिस के सिर में दर्द तो दिया हैं साथ में गश्त व्यवस्था को लेकर बदनाम भी हो रही है। अब इस मामले में बताया जा रहा है कि पुलिस बैंक प्रबंधन को नोटिस जारी कर सकती हैंं।

बताया जा रहा हैं कि सिर्फ शहरी क्षेत्र में 60 से अधिक एटीएम बूथ हैं जिसमें एसबीआइ के 22 एटीएम हैं। 25 लाख रुपये की कैपिसिटी के हिसाब से इनमें हर दिन 15 करोड़ रुपये लोड रहते हैं। वहीं पूरे जिले की बात करें तो रुपयों का यह आंकड़ा 20 करोड़ रुपये के भी पार होगा। इतनी बड़ी रकम की सुरक्षा के लिए सिर्फ वहां के कैमरे ही मौजूद हैं।

गार्ड तो सिर्फ कागजों में तैनात रहते हैं। निजी बैंक तब भी इस मामले में सावधानी बरतते हैं और वहां गार्ड देखे जा सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंकों का सिस्टम पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है। करैरा में अगस्त माह में एटीएम में विस्फोट कर की गई लूट की कोशिश के बाद भी बैंकों ने सबक नहीं लिया जिसके चलते इस बार बदमाश कामयाब हो गए। एटीएमों की सुरक्षा को लेकर बरती जा रही उदासीनता का डराने वाला पक्ष यह भी है कि कई एटीएम के दरवाजे तक ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं।

एटीएमों में सुरक्षा को लेकर पुलिस विभाग कई बार बैंकों को निर्देशित कर चुका है। चूंकि हर एटीएम में 10 से 20 लाख रुपये तक कैश होता है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बैंक को रखना चाहिए। लेकिन बैंकों ने पुलिस विभाग के निर्देशों को अनदेखा कर गार्ड नहीं रखे हैं। यदि हर दिन एटीएम को रिफिल किया जाए तो महीने में एक ही एटीएम में 4 से 5 करोड़ से अधिक का कैश डाला जाता है।

जिले में 100 से भी अधिक एटीएम मशीन हैं। इस तरह यहां पर हर महीने 400 करोड़ रुपये से भी ज्यादा एटीएमों में रखा जाता है। इतना ज्यादा का कैश होने के बाद भी यहां सुरक्षा न रखना बहुत गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। अब पुलिस ने भी बैंकों को नोटिस देने की तैयारी कर ली है।

रविवार को अवकाश होने के कारण नोटिस नहीं दिए जा सके। सोमवार को सभी बैंकों को पुलिस की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे कि यदि अब इस तरह की घटना हुई और वहां गार्ड नहीं मिला तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बैंकों की ही होगी। साथ ही इसके लिए उन्हें कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।