नेशनल पार्क में टाइगर के लिए सचिवालय ने डीपीआर मांगी- Shivpuri news

शिवपुरी। सालो से शिवपुरी का नेशनल पार्क टाइगर विहीन रहा हैं,कई बार पार्क में टाइगर को लाने की कवायद के प्रयास किए गए लेकिन योजना को दिशा नही मिली,लेकिन अब लगता हैं कि शिवपुरी का नेशनल पार्क टाइगर विहीन नही रहेगा। जल्द ही शिवपुरी को टाईगरो का जोडा मिलने की उम्मीद हैं। इसके लिए पूरी योजना बना ली गई हैं।

बताया जा रहा है कि गत सप्ताह भोपाल में हुई बैठक में इस संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा चुके हैं और प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हो गया है। माधव नेशनल पार्क में कान्हा टाइगर रिजर्व की तर्ज पर टाइगर को बसाया जाएगा। यहां की टाइगर सफारी का डिजाइन भी इसी से प्रेरित होगा।

माधव राष्ट्रीय उद्यान को छोड़कर एवं राष्ट्रीय उद्यान से लगे हुए उपयुक्त वन क्षेत्र में टाइगर सफारी के लिए 100 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान कर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार नक्शे पर दर्शाते हुए योजना तैयार की जाएगी। यह कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की में टाइगर सफारी के लिए तैयार किए गए डिजाइन के अनुसार होगी।

इसके लिए मास्टर ले आउट प्लान, इन्क्लोजर डिजाइन, डीपीआर सीजेडए को भेजना होगा। इसे लेकर भोपाल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) कार्यालय में गत सप्ताह बैठक हुई थी जिसमें प्रधान मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार, एनटीसीए के अतिरिक्त वन महानिदेशक एसपी यादव, लॉयन प्रोजेक्ट शिवपुरी के संचालक सीएस निनामा, माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी के सहायक संचालक अनिल सोनी सहित उच्च अधिकारी मौजूद थे। टाइगर आने के साथ शहर के पर्यटन की दिशा में बड़ा बदलाव होगा। एक बार फिर पर्यटक शिवपुरी की ओर रुख करेंगे और यहां रोजगार बढ़ेगा।

बांधवगढ़ से आ सकते है टाइगर का जोड़ा

एक अच्छी खबर यह है कि शिवपुरी में सिर्फ एक टाइगर नहीं, बल्कि टाइगर का जोड़ा लाने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो यहां एक से अधिक जोड़े भी आ सकते हैं। बांधवगढ़ में अभी टाइगरों की संख्या वहां की कैपेसिटी से अधिक है। ऐसे में वहां से टाइगर का जोड़ा मिलने की अधिक उम्मीद की जा रही है। हालांकि इसका अंतिम निर्णय भोपाल स्तर पर होगा।

पहले इन्क्लोजर में रहकर नई जगह से होंगे अभ्यस्त, फिर खुले में रहेंगे

टाइगर के सॉफ्ट रिलीज के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व के घोरेला इन्क्लोजर की तर्ज पर माधव राष्ट्रीय उद्यान में भी करीब 5 से 10 हेक्टेयर का इन्क्लोजर बनाया जाएगा। शाकाहारी प्राणियों के लिए 20 से 25 हेक्टेयर का इन्क्लोजर तैयार होगा। इसी तरह का करीब 25 हेक्टेयर का बाड़ा शाकाहारी वन्यप्राणियों के प्रजनन और संख्य वृद्धि के लिए भी बनाया जाएगा।

शाकाहारी प्राणियों और टाइगर का यह इन्क्लोजर पास-पास बनाया जाएगा जिसके बीच में एक गेट भी होगा। यहां से शाकाहारी जानवर टाइगर के इन्क्लोजर में जा सकेंगे। फिर टाइगर इनका शिकार कर अपनी भूख शांत कर सकेगा। जब टाइगर नए वातावरण के प्रति अभ्यस्त हो जाएगा तो फिर उसे पूरे क्षेत्र में घूमने के लिए खुला छोड़ दिया जाएगा।

दो महीने में सीसीएफ ने दिखाई तेजी, सिंधिया के प्रयास रहे महत्वपूर्ण

टाइगर प्रोजेक्ट को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली में उच्चस्तीयर बैठक की थी। इसके साथ ही वे लगातार खुद इस प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग भी कर रहे हैं। दो माह पूर्व ही लॉयल प्रोजेक्ट के सीसीएफ सीएस निनांसा यहां पदस्थ हुए और टाइगर प्रोजेक्ट में तेजी आई। सीसीएफ निनांसा के प्रयासों से अब शिवपुरी को जल्द ही यह सौगात मिलने की उम्मीद है क्योंकि विभाग ने कंसल्टेंट से भी इस बारे में मशविरा कर लिया है। अधिकांश निर्णयों पर अमल भी शुरू हो गया है।

करीब 70 हजार जानवर हैं नेशनल पार्क में

स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट जबलपुर की वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार माधव नेशनल पार्क में 53294 जानवर थे। हर साल इनकी संख्या में 10 प्रतिशत का इजाफा होने का अनुमान लगाया जाता है जिससे इनकी संख्या करीब 70 हजार है। यदि प्रतिवर्ग किमी के अनुसार जानवरों की संख्या देखें तो यहां पर तेंदुए की एनकांउटर रेट 0.487, आलसी भालू की 0.195, लकड़बग्धा की 0.278 है। यहां 13689 हिरण हैं। 70 हजार से अधिक वन्यप्राणी होने से टाइगर को यहां भोजन और शिकार की कोई परेशानी नहीं होगी। टाइगर की बसाहट के चलते इंस्टीट्यूट से फिर से गणना करने के लिए भी कहा गया है और जल्द ही जबलपुर से टीम शिवपुरी आ सकती है।

यह महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए

नेशनल हाइवे अथॉरिटी से कॉरिडोर में वन्यप्राणियों के आवागमन को सुचारू रखने के लिए अंडरपास तैयार किए जाने की समय-सीमा और मॉनीटरिंग की जाए। टाइगर की पुर्नस्थापना के लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाने के साथ वर्षवार आवश्यक राशि केंपा व अन्य मद से प्राप्त करने संबंधी योजना बनाई जाए।

पूर्व में माधव राष्ट्रीय उद्यान में टाइगर थे। यहां से टाइगर विलुप्त होने के कारणों का पता भी लगाया जाए। भविष्य में नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व के रूप में नोटिफाई कराने के लिए सामान्य वनमंडल शिवपुरी के उन कक्षों को चिन्हित किया जाए जिनसे कॉरिडोर के रूप में कूनो पालपुर को जोड़ा जाए।

इनती है वन्य प्राणियों की संख्या

तेंदुआः 166,आलसी भालूः 66,लकड़बग्धाः 95,हिरणः 13689,सांभरः 2156,चिंकाराः 2977,नील गायः 8761,जंगली सुअरः 8658,काले हिरणः 205,बार्किंग डिअरः 387 और लंगूरः 16461
(वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार)

इनका कहना है
भोपाल में उच्च अधिकारियों की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णल लिए गए थे जिन पर हमारे द्वारा काम भी शुरू कर दिया गया है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द नेशनल पार्क में टाइगर को बसा सकें।
अनिल सोनी, सहायक संचालक, माधव राष्ट्रीय उद्यान