प्रत्येक ब्लॉक से 5 शिक्षक सस्पेंड करने का टारगेट, DPC ऑफिस से मौखिक आदेश - Shivpuri News

शिवपुरी। कोरोना के कारण सबसे बाद में शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौटी है। लगभग 2 साल बाद स्कूल खुले हैं। स्कूल खुलने के साथ ही शिक्षको की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा शुरू हो चुकी हैं। इस समीक्षा में शिक्षको को संस्पैंड करने के टारगेट फिक्स हो चुके हैं। यह हम नही कह रहे हैं यह स्वयं डीपीसी कार्यालय से निकला एक आदेश हैं। अभी तक टारगेट पढाई व्यवस्था को लेकर बनाए जाते थे,लेकिन यह शिवपुरी के इतिहास में पहली बार हुआ है कि हर ब्लॉक स्तर पर शिक्षको को सस्पैंड करने के टारगेट की संख्या डीपीसी आफिस से निकाली गई है।

जानकारी के अनुसार नियम विरूद्ध डीपीसी के पद पर जमी डिप्टी कलेक्टर शिवांगी अग्रवाल ने जिले के सभी बीआरसीसी को मौखिक रूप से आदेश दिए कि अपने अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले स्कूलो में से कम कम से 5 शिक्षको के विरूद्ध निलबंन के प्रस्ताव तैयार करे जो अपने कार्य में लापरवाही बरत रहे है। इस बात का विरोध नही करते हैं कि लापरवाही शिक्षको पर कार्यवाही न हो लेकिन संख्या का टारगेट स्वागत योग्य नही है।

डीपीस के द्धवारा मौखिक रूप से दिया गया आदेश प्रिंट जब हो गया जब बीआरसीसी ने ग्रुपों में एक मैसेज पोस्ट किया कि सभी सीएसी ऐसे शिक्षको का निलबंन प्रस्ताव बनाकर भेजे जो समय पर स्कूल नहीं पहुंच रहे और अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। इसके बाद शिक्षा विभाग में लगातार निरीक्षण का दौर शुरू हो गया।

वहीं विभाग में यह चर्चा भी शुरू हो गई कि सभी को 5-5 शिक्षकों को निलंबित कराने का टागरेट मिला है जिसे किसी निजी कंपनी की तरह पूरा करना ही है। डीपीसी शिवांगी अग्रवाल ने मंगलवार शाम तक प्रस्ताव मांगा था जिसमें से कई नाम पहुंच भी गए हैं। इससे लग रहा है कि आगामी दिनों में शिक्षा विभाग में बड़ा एक्शन होना तय है।

जनपद शिक्षा केंद्र के अंतर्गत बीआरसीसी के अधीनस्थ कार्य करने वाले जन शिक्षकों को भी डीपीसी शिवांगी अग्रवाल ने साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि ऐसे शिक्षक जिनके द्वारा डिजीलैप सामग्री बच्चों को प्रदान नहीं की गई है या फिर जो स्कूल में नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं, ऐसे शिक्षकों की जानकारी होने के बाद भी अगर जन शिक्षक उनके खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित नहीं कर रहे हैं तो इस प्रकार के जन शिक्षक का 1 दिन का वेतन काटा जाएगा। वहीं निरीक्षण के दौरान स्कूल और शौचालय मेँ साफ सफाई न मिलने और शासन के आदेशों को गंभीरता से न लेने पर भी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने के निर्देश सभी बीआरसीसी को दिए गए हैं।

स्कूलों की सामने आई थी दयनीय स्थिति

जब माध्यमिक और प्राथमिक स्कूल खुले तो स्कूलों की असली बदहाली सामने आई। इसमें शिक्षकों की लापरवाही भी साफतौर पर देखी गई। कहीं स्कूल में भैंसों का तबेला मिला तो कहीं पर आटा चक्की संचालित हो रही थी। स्कूल में बच्चों का आना भले ही बंद था, लेकिन शिक्षकों की जिम्मेदारी थी कि वे जरूर जाएं। इसके बाद भी अधिकांश शिक्षकों ने कोरोना काल में छुट्टियों का लुत्फ ही उठाया। इस दौरान कुछ को कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा। अब इस बार शिक्षा विभाग में बड़ा एक्शन होता दिखाई दे रहा है।

नियमम विरुद्ध है प्रभार डीपीसा का

डिप्टी कलेक्टर शिवांगी अग्रवाल को कुछ माह पूर्व राज्य शिक्षा केंद्र आयुक्त के आदेश के विरुद्ध डीपीसी का कार्यभार सौंपा गया है, जबकि शिक्षा विभाग में डीपीसी का पद रिक्त होने की स्थिति में इस पद का प्रभार किसी प्रशासनिक अधिकारी को सौपे जाने की बजाए जिला शिक्षा अधिकारी को प्रभारी डीपीसी का कार्यभार सौंपे जाने की व्यवस्था दी गई है।

राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश क्रमांक 6754 दिनांक 6 जुलाई 2012 तत्कालीन आयुक्त रश्मि अरुण शमी द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में पूरे प्रदेश के कलेक्टर्स को स्पष्ट रूप से आदेशित किया गया है कि जिलों में किन्ही कारणों से जिला परियोजना समन्वयक का पद रिक्त होने पर सर्व शिक्षा मिशन अंतर्गत गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए अस्थाई रूप से इस पद का प्रभार जिले के अन्य अधिकारियों को सौंपा जाकर कार्य संपादित कराया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा जिले में जिला परियोजना समन्वयक का पद किसी भी दिशा में रिक्त होने की स्थिति में इस पद का प्रभार अनिवार्यतः जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे जाने का निर्णय लिया गया है।


इस तरह का मैसेज किया था सर्कुलेट बीआरसीसी ऑल
डिप्टी कलेक्टर/डीपीसी शिवपुरी द्वारा दिए गए निर्देश निम्नानुसार है।
प्रत्येक विकासखंड से 5 शिक्षकों के निलंबन प्रस्ताव भेजें।
1.ऐसे शिक्षक जिनके द्वारा डीजीलेप सामग्री बच्चों को प्रदाय नही की गई है।
2.स्कूल में नियमित रूप से नहीं आ रहे हैं ग्रामीणों से चर्चा अनुसार।
3.जनशिक्षक को जानकारी होने के बाद भी शिक्षक के विरूद्ध कार्रवाई प्रस्तावित नहीं करना इस प्रकार के जनशिक्षक का एक दिन का वेतन काटा जाए।
4.स्कूल में निरीक्षण के दौरान स्कूल और शौचालय का साफ सफाई ना होना।
5. शासन के आदेशों को गंभीरता से नहीं लेना

मैने कोई टागरेट नहीं दिया, निरीक्षण का टारगेट होगा

स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जाता है और वही करने के लिए कहा गया है। यदि किसी के क्षेत्राधिकार में 50 स्कूल आते हैं और सभी में कमी मिलती है तो 50 पर भी कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। निरीक्षण में यदि जन शिक्षक ठीक से भूमिका नहीं निभाते हैं तो वे भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। वेतन कटने के साथ उन पर अनुशानात्मक कार्रवाई होगी। कोई टागरेट नहीं दिया है कि पांच शिक्षकों के निलंबन का प्रस्ताव चाहिए ही, ऐसा रहा होगा कि हर किसी को कम से कम पांच जगहों का औचक निरीक्षण करना है।
शिवांग्री अग्रवाल, डीपीसी व डिप्टी कलेक्टर।