गरीब मजदूरों की हक की रोटी पर मशीने चल रही हैं, प्रभारी मंत्री ने भी स्वीकारा था - Shivpuri News

शिवपुरी। ग्रामीण मजदूरो का पलायन रूके और ग्रामीण लोगो पर पंचायत स्तर पर ही रोजगार मिले इस लिए महात्मा गांधी रोजगार गांरटी योजना शुरू की गई थी,लेकिन पंचायत विभाग में अपनी जडे जमा चुका भ्रष्टाचार ने गरीबो की रोटी पर मशीने चल रही है।

नियमानुसार ग्राम पंचायत में होने वाले निर्माण कार्य व अन्य कार्य मजदूरो से कराने होगें। और इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत के सचिव और सरंपचो की होती हैं,लेकिन भ्रष्टाचार के कारण निर्माण कार्यो में मजदूरो के हाथ नही बल्कि मशीने चल रही है।

कागजों में मजदूर दर्शाए जा रहे हैं। बकायदा मस्टर रोल तैयार कर मजदूरों के नाम से पैसे भी निकाले जाते हैं, लेकिन यह मजदूरों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के इस खेल पर पाबंदी नहीं लग पा रही है क्योंकि सरपंचों और सचिवों को अधिकारियों को सरंक्षण प्राप्त है।

बदरवास के धामनटूक गांव में तो तब हद हो गई जब वहां मनरेगा योजना में प्रसूताओं से भी मजदूरी करा ली गई। हालांकि यह मजदूरी सिर्फ कागजों में हुई क्योंकि व्यवाहरिक रूप से यह संभव नहीं है। महीनों तक महिलाओं को इस बात का पता भी नहीं चला। जब इसकी जानकारी मिली तो गत दिनों सीएम हेल्पलाइन में इसकी शिकायत की।

यह पूरा मामला बदरवास जनपद सीईओ की जानकारी में भी है, लेकिन उनके द्वारा कार्रवाई नहीं की गई। कोरोना काल में जब मजदूर पलायन कर अपने-अपने घरों को लौटे तो मुख्यमंत्री ने कहा था कि इन्हें यहीं काम दिया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि काम सिर्फ कागजों पर ही मिल रहा है जबकि मौके पर काम पूरी तरह से मशीनों से हो रहा है।

सरपंच और सचिव अपने कुछ चिन्हित लोगों की सूची रखते हैं। हर काम में इन्हीं लोगों के नाम मजदूर के रूप में चढ़ा दिए जाते हैं। इनकी 90 दिनों की मजदूरी निकाल ली जाती है और बदले में 15 से 20 प्रतिशत राशि दे दी जाती है। इससे वे भी विरोध नहीं करते हैं क्योंकि इस दौरान वे कुछ और काम कर लेते हैं। इस सब में शासन की जो मंशा है वह धरी की धरी रह जाती है।

प्रभारी मंत्री के सामने भी उठा था मुद्दा, उन्होंने स्वीकार भ्रष्टाचार
गत दिनों जब जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के पंचायत मंत्री महेंद्र सिसौदिया शिवपुरी आए थे तब उनसे मनरेगा में मशीनों से काम कराए जाने और फर्जी तरीके से पैसे निकालने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने स्वीकारा की मनरेगा में बहुत गड़बड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए अलग से लोकपाल बनाया गया है जो जांच कर कार्रवाई भी करते हैं। इसके बाद भी मनरेगा में मशीनों से काम कराया जा रहा है जिसे सुधारने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। जिले में इसे लेकर बुरी स्थिति है और करीब-करीब हर पंचायत में मजदूरों के हक पर मशीन चल रही हैं।

हर ग्राम पंचायत में चल रही मशीनें

करैरा, बदरवास, कोलारस, पिछोर, पोहरी से लेकर नरवर, खनियांधाना आदि तक लगभग सभी जगह मशीनों से ही काम कराया जा रहा है। जिला पंचायत कार्यालय के साथ सीएम हेल्पलाइन में भी इनकी सैकड़ों शिकायतों का अंबार लगा हुआ है, लेकिन निराकरण नहीं हो पा रहा है क्योंकि अधिकारी निराकरण चाहते ही नहीं है। सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को एल-4 पर पहुंचते ही फोर्स क्लोज कर दिया जाता है। वहीं शिकायती आवेदन पंचायत के कार्यालय में धूल खाते रहते हैं।

174 रुपये मिलती है मजदूरी

वर्तनाम में प्रदेश में मनरेगा में प्रतिदिन की 174 रुपये मजदूरी मिलती है। सभी प्रदेशों में यह अलग-अलग है और मध्यप्रदेश में कई राज्यों की तुलना में यह कम भी है। यदि मजदूर बाहर काम करे तो उसे एक दिन के करीब 300 रुपये मिलते हैं।

इस कारण भी मजदूर मनरेगा में अपना नाम तो लिखा देते हैं, लेकिन बाहर दूसरी जगह मजदूरी कर लेते हैं। नाम लिखाने और उनके नाम से मस्टर बनवाने के बदले में कुल मजदूरी से कुछ हिस्सा ठेकेदार मजदूर को दे देता है। यही सिलसिला हर पंचायत में चलता है।

इनका कहना है
यदि ऐसा हुआ है तो पीडित या ग्रामीण मुझे इसका शिकायती आवेदन दे दें। इसकी तुरंत जांच कराकर दोषियों को चिन्हित करेंगे और कार्रवाई करेंगे।
एचपी वर्मा, जिला पंचायत सीईओ ।

केस-1ः ग्राम पंचायत धामनटूक में मनरेगा के मस्टर रोल में नीता पत्नी संजीव ओझा को 8 अक्टूबर 2020 में मनरेगा में काम करते हुए दर्शाया गया है। जबकि 6 दिन पहले 2 अक्टूबर को उसकी गुना में डिलीवरी हुई थी जिसमें मृत बच्चे बपैदा हुए थे। उसके खाते से मजदूरी की राशि भी निकाल ली गई और लंबे समय तक यह बात महिला को पता भी नहीं चली।

केस-2ः रश्मि पत्नी गोलू धाकड़ इसकी डिलीवरी 13/1/21 को हुई और 14/1/21 से काम शुरू कर दिया और उनकी राशि भी निकाल ली। जबकि यह संभव ही नहीं है प्रसव के एक दिन बाद महिला मजदूरी करने के लिए चली जाए।