Shivpuri News- 16 सहायक वार्डन की नौकरी पर लटकी तलवार, बर्खास्त करने का नोटिस

शिवपुरी। शिक्षा विभाग से जुडी कर्मचारियो की खबर आ रही है कि जिले में शिक्षा विभाग द्धवारा संचालित कस्तूरबा गांधी छात्रावास की 16 सहायक वार्डन की नौकरी पर तलवार लटक गई हैं। जिला प्रशासन ने इन वार्डर्नो को बर्खास्त करने का नोटिस दिया और 3 दिन में जवाब मांगा हैं, वही अब तक मिला लाखो रूपए वेतन वापस करने की भी मांग की हैं। आक्रोशित सहायक वार्डन बोलीं- न कोई जांच कमेटी आई न पूछताछ हुई, फिर किस आधार पर पद से हटा रहे।

अब से कुछ साल पहले वार्डन और सहायक वार्डन में आपसी विवाद हुआ था। और इस विवाद के बाद मामला कोर्ट तक जा पहुंचा। जहां से जब इन 16 सहायक वार्डन की नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया की जानकारी ली गई तो जिला प्रशासन ने 4 सदस्य समिति गठित की। जिसने सहायक वार्डन की नियुक्ति प्रक्रिया की जांच की तो उसमें कई कमियां पाई।

जिसके आधार पर नियुक्तियों को अवैध मानकर समिति ने प्रशासन को नियुक्ति निरस्त करने की अनुशंसा कर दी। इसके बाद 14 जुलाई को जिला पंचायत सीईओ एचपी वर्मा द्वारा जारी किए गए आदेश में 16 अप्रैल को एक पत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि आपके पास 3 दिन का समय है,अब अपने नियुक्ति संबंधी दस्तावेज और अन्य जानकारियां प्रस्तुत करें,यदि दस्तावेज नहीं दे पाते हैं तो फिर एक तरफा कार्रवाई करते हुए आप को पद से पृथक करने की कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही सेवाकाल के दौरान आपके द्वारा अर्जित किए गए मानदेय को भी आपको वापस करना होगा। इस नोटिस के मिलने के बाद सभी सहायक वार्डन सोमवार को जिला पंचायत कार्यालय पहुंची, जहां उन्होंने विरोध जताकर कहा कि उनकी नियुक्ति पूरी तरह से वैध है और उन्हें वह दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं जो नियुक्ति के समय लगाए गए थे। वह नस्ती रिपोर्ट भी दिखाई जाए जिसमें उनकी नियुक्ति संबंधी दस्तावेज है।

इसके साथ ही उन्होंने 10 दिन का समय मांगा, जिसमें प्रशासन उन्हें दस्तावेज उपलब्ध करा दे तो वह जवाब देने भी तैयार है। सहायक वार्डन ने यह आरोप भी लगाया कि ना जांच समिति बनी, ना सवाल- जवाब हुए, प्रशासन ने एक तरफा पद से पृथक करने की तैयारी की है।

सहायक वार्डन ने आरोप लगाया कि हम में से कई सहायक वार्डन ऐसी है जो 2006 से नियुक्त हैं और कुछ की नियुक्ति बाद में हुई है। ऐसे में काम करते-करते 16 साल हो गए, फिर भी हमें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

प्रशासन ने नोटिस जारी कर लिखा है कि विभाग से मिले दिशा निर्देश के बाद जांच समिति गठित की, समिति रिपोर्ट के बाद नियुक्तियों को अवैध पाया। जबकि कोई जांच समिति प्रशासन ने गठित नहीं की और ना ही हम लोगों से पूछताछ हुई।

ऐसे में हम पर कार्रवाई क्यों, वह भी पद से पृथक करने की। इस संबंध में सहायक वार्डन ने डीपीसी कार्यालय, जिला पंचायत और कलेक्ट्रेट पहुंच आवेदन जांच के लिए प्रस्तुत किया।

जवाब देने 3 दिन का समय दिया है
4 सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था । जिसमें पाया कि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। इसलिए इनको पद से पृथक करने की कार्रवाई के साथ सेवा काल के दौरान लिए गए मानदेय को वापस करने की मांग की गई है। अपना जवाब प्रस्तुत करने इन्हें 3 दिन का समय भी दिया गया है। एचपी वर्मा, सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी

नियुक्ति प्रक्रिया सही नहीं है, यह अवैध है
हमने पाया कि नियुक्ति प्रक्रिया सही नहीं है, यह अवैध है। इसीलिए इन्हें जिला पंचायत सीईओ द्वारा नोटिस जारी किए गए। इनसे पक्ष मांगा गया है, वह अपना जवाब प्रस्तुत कर दें।
शिवांगी अग्रवाल,डिप्टी कलेक्टर और प्रभारी अधिकारी डीपीसी शिवपुरी

फर्जीवाड़ा मिला तो एफआईआर कराएंगे
अभी तो जांच करा रहे हैं और इसके लिए इन्हें समय भी दिया है। यदि नियुक्ति प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा मिला तो हम एफआईआर कराने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर शिवपुरी