पोहरी मे 3 बच्चे कुपोषित मिले, कमिश्नर और कलेक्टर को जबाव देना होगा - Pohri News

पोहरी। कोरोना की तीसरी लहर का अंदेशा सभी को हैं,इसके लिए सरकारो ने तैयारी शुरू कर दी। जिले के स्वास्थय विभाग ने भी इसकी तैयारी करते हुए 20 डॉक्टर और 1 करोड रूपए दवा और उपकरणो के लिए मांग की हैं। यह तय माना जा रहा है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर आती हैं बच्चो को अधिक खतरा हैं,लेकिन पोहरी में तीसरी लहर से पूर्व ही बच्चो को कुपोषण का खतरा अधिक हैं।

पोहरी के मडखेडा में 2 साल के अति कुपोषित बच्ची का पत्रकार नरेन्द्र कुशवाह के द्धवारा सामने लाते ही सोती हुई सरकारी मशीनरी जाग गई और पोहरी एसडीएम विभाग की टीम लेकर गांव पहुंच गए। 70 से अधिक बच्चों का परीक्षण कराने पर तीन और बच्चे कुपोषित मिले हैं।

इनमें एक बच्ची अति कुपोषित है। वहीं इस मामले में मप्र मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। इसे मानव अधिकार हनन से जुड़ा मानते हुए कमिश्नर सहित कलेक्टर और जिला कार्यक्रम अधिकारी से 15 दिन में जांच प्रतिवेदन मांगा है।

जिला अस्पताल शिवपुरी के पीआईसीयू में भर्ती मडख़ेड़ा गांव की रजनी आदिवासी उम्र 2 वर्ष पुत्री राकेश आदिवासी का मामला उजागर होने के पर पोहरी एसडीएम जेपी गुप्ता गुरुवार को एकीकृत बाल विकास परियोजना पोहरी की टीम को लेकर गांव पहुंच गए। गांव में पांच साल से कम उम्र के 70 से अधिक बच्चों का परीक्षण कराया।

जिसमें श्रीराज पुत्र दिग्विजय आदिवासी और वरुण पुत्र दिग्विजय आदिवासी कुपोषित मिले और यलो जोन में शामिल कर एनआरसी में भर्ती कराया जाएगा। वहीं सोनाक्षी पुत्री अनरी आदिवासी का वजन काफी कम है, इसलिए अति कुपोषित मानकर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने को कहा है।

मड़खेड़ा गांव से लौटने के बार अधिकारियों का कहना है कि रजनी आदिवासी का पिता राकेश मजदूरी करके झांसी से लौटा है। वहीं से बच्ची की हालत खराब हाेकर आई है। जबकि राकेश ने मीडिया को बताया कि वह कोरोना महामारी के कारण गांव छोड़कर कहीं नहीं गया।