जिस हत्यारे वायरस ने कुसुम की जान ली, डेथ सर्टिफिकेट में उसको दोषमुक्त कर दिया: क्या गेम प्लान हैं सरकार का - Shivpuri News

शिवपुरी। मेडिकल कॉलेज से लगातार लापरवाही भरी खबरे आ रही हैं,अभी कोरोना पॉजीटिव शिक्षक के डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण सामान्य बताने की खबरो की स्यायी सूखी नही थी कि फिर हत्यारे कोरोना वायरस के कारण हुई एक महिला के डेथ सर्टिफिकेट में मेडिकल कॉलेज ने इस वायरस को दोष मुक्त कर दिया हैं।

जानकारी के अनुसार श्रीमति कुसुम मिश्रा उम्र 51 वर्ष निवासी सुभाष कॉलोनी शिवपुरी को अपने घर पर अचानक सांस लेने की शिकायत हुई। प्राईवेट डॉक्टर को दिखाया और सीटी स्कैन कराया गया। सीटी स्कैन रिर्पोट
में कुसम मिश्रा के 44 प्रतिशत लंग्स डैमेज थे और आक्सीजन लेवल 92 चल रहा था।

कुसुम मिश्राा को 21 अप्रैल की शाम जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया,कोविड का इलाज शुरू किया गया,लेकिन स्वास्थय में सुधार नही हो रहा था। डॉक्टरो ने 23 तारिख को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाना शुरू कर दिया था। आक्सीजन का स्तर लगातार गिरने के कारण कुसुम मिश्रा को 24 अप्रैल को मेउिकल कॉलेज के अस्पताल में शिफ्ट किया गया।

मेडिकल कॉलेज में जिस दिन कुसम मिश्रा को भर्ती किया था उस दिन का आक्सीजन का लेवल 70 चल रहा था। बताया जा रहा है कि कुसुम मिश्रा को मेडिकल कॉलेज में 4 रेमेडसिवर के इंजेक्शन और लगाए गए।

29 अप्रैल की रात कुसुम मिश्रा कोरोना से जंग हार गई और उनकी मौत हो गई। अंतिम संस्कार भी कोरोना की गाईडलाइन से किया गया,लेकिन आज जब उनका मेडिकल कॉलेज ने मृत्यु प्रमाण बनाकर दिया उसमें उनको निगेटिव लिखा गया हैं,यह बात सत्य है कि कुसुम मिश्रा की आरटीपीसीआर की जांच नही हुई थी।

सवाल:कुसुम मिश्रा की मौत फिर किस कारण हुई

अगर कुसम मिश्रा निगेटिव थी फिर उनकी मौत किस वायरस से हुई है,ईलाज पूरा कोविड की गाईडलाईन से हुआ हैं मेडिकल कॉलेज में बिना संक्रमित व्यक्ति को भर्ती नही किया जा सकता हैं,लेकिन कुसुम मिश्रा ने अपनी अंतिम सांस मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में ही ली थी।

जब मरीज की हालत बिगड गई सांस लेने में तकलीफ होने लगी इस कारण ही परिजनो ने उन्है जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया। आरटीपीसीआर की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की बनती थी। जैसा महिला की मौत के मृप्यु प्रमाण पत्र में कोरोना निगेटिव लिखा हैं अगर प्रबंधन ने जांच कराई तो परिजनो को निगेटिव की रिर्पोट नही दी।

सवाल: अगर निगेटिव थी तो कोरोना गाइडलाइन से अंतिम संस्कार क्यों करवाया

कोरोना के संक्रमण का शिकार हुई कुसुम मिश्रा का अंतिम संस्कार भी कोरोना की गाईड लाईन के अनुसार ही किया गया था। मेडिकल कॉलेज ने कुसुम मिश्रा का शव परिजनो को न सुपुर्द कर सीधे मुक्तिधाम पहुंचाया था। अगर कुसुम मिश्रा की मौत में कोरोना का हाथ नही था तो परिजनो को शव सौपते। परिजन पूरे हिन्दू रिति रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार करते। हिन्दू धर्म के अनुसार दाह संस्कार को अंतिम संस्कार कहा गया हैं और मानव जीवन के 16 संस्कारो में यह अंतिम संस्कार हैं।

शिक्षक के मृत्यु प्रमाण पत्र में भी कोरोना को दोष मुक्त किया

इससे पूर्व जिले के बदरवास क्षेत्र के खतौरा निवासी प्राथमिक विद्यालय रामगढ़ में पदस्थ शिक्षक गोपाल सोनी ने कोरोना से लड़ाई लड़ते हुए पिछले माह 29 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज के कोविड आईसीयू में दम तोड़ दिया था। शिक्षक का अंतिम संस्कार भी कोविड गाइड लाइन के तहत सरकारी अमले ने स्थानीय मुक्तिधाम में किया था। शिक्षक के मृत्यु प्रमाण पत्र में भी मौत का कारण समान्य लिखा हैं।

आखिर क्या है सरकार का गेम प्लान

सरकार ने कोविड से मरने वालो के मामलो में राहत के पिटारे खोल दिए हैंं,कई वादे मप्र सरकार ने कर दिए हैं। किसी भी योजना का लाभ जब ही मिलेगा जब मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु का कारण कोविड लिखा होगा। लेकिन मौत कोरोना से होती हैं और कारण समान्य मौत लिखा जा रहा हैं। मेडिकल कॉलेज बार—बार ऐसी लापरवही नही कर सकता कही यह आदेश सीधे भोपाल से तो नही........सवाल बडा हैं।