गरीबों के निवाले पर दंबगो का कब्जा, सहकारी दुकान से राशन नहीं मिल रहा - kolaras News

कोलारस। प्रदेश सरकार द्वारा गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए करोना काल के समय में भेजे गए खाद्यान्न राशन को किस कदर उचित मूल्य की दुकानदारों द्वारा बंदरबांट किया जा रहा हैं। यह राशन मध्यमवर्गीय लोगों के बीच आज तक नहीं पहुंचा हैं।

जबकि शासन के खजाने से पूरा माल गोदामो पर पहुंचा दिया गया, लेकिन यह सारा राशन ब्लैक मार्केट के हवाले कर दिया गया। जिसके चलते जरूरतमंद गरीब आदिवासी राशन से पूरी तरह से वंचित हो रहे हैं, अधिकांश राशन की दुकाने राजनीतिक नेताओं के खासम खास लोगों पर मौजूद हैं जिसके चलते प्रशासन भी कार्रवाई करने से परहेज करता है।

कोरोना संक्रमण के चलते आगामी 31 मई तक लॉकडाउन लगा हुआ है सरकार द्वारा जरूरतमंद गरीबों को पूरे 3 माह का राशन वितरित करने के लिए राशन दुकानों पर भेजा है और इस बार बिना अंगूठे लगाए ही राशन देने के निर्देश दिए गए हैं साथ ही आला अधिकारियों ने भी सख्त निर्देश दिए हैं, कि किसी भी राशन की दुकान पर जरूरतमंदों गरीबों को मिलने वाला राशन मिलना चाहिए।

कोलारस के अंतर्गत आने वाले अधिकांश ग्रामों में संचालित राशन दुकानों पर दबंगों का कब्जा अनेक वर्षों से बना हुआ है, कोलारस में पदस्थ खाद्यय विभाग के आला अधिकारी की मेहरबानी के चलते उन पर कोई कार्यवाही नहीं करता और कार्यवाही करेगा भी कैसे इन राशन दुकान संचालकों पर सत्ताधारी दल के नेताओं का हाथ होने के चलते इन पर कार्यवाही नहीं की जाती।

इनकी शिकायतें आने के बाद भी सिर्फ नोटिस देकर अपने कर्तव्य का पालन आला जिम्मेदार अधिकारी कर लेते हैं, कोलारस के अंतर्गत आने वाले अनेक ग्रामों में स्थित राशन की दुकानें ना तो समय पर खुल रही हैं, आदिवासी बाहुल क्षेत्रों में भी आदिवासियों से लेकर जरूरतमंद लोग राशन से पूरी तरह से वंचित दिखाई दे रहे हैं।

इन ग्राम पंचायतों में नहीं बटा तीन माह का राशन
कोलारस अनु विभाग के अंतर्गत आने वाले ग्राम झाड़ेल, रांची, टीला, बसाई, गणेश खेड़ा, सहित अधिकांश ग्रामों में संचालित राशन दुकानों पर तीन-तीन माह का राशन तक नहीं वितरित किया है, अधिकांश लोगों को राशन से पूरी तरह से वंचित रखा है।

एक सेल्समैन पर 2 से लेकर 3-3 दुकानें मौजूद
बड़ी बात तो यह है कि कोलारस अनु विभाग के अंतर्गत आने वाली राशन दुकान को संचालित करने वाले सेल्समैनओं पर एक से लेकर अन्य ग्रामों की राशन की दुकानें मौजूद हैं, इनके मामा से लेकर अन्य रिश्तेदारों के नाम दुकान आवंटित हैं।

जिसके चलते पिंकी दबंगई के आगे अधिकारी भी कुछ नहीं कर पाते हैं, सत्ताधारी दल के नेताओं का हाथ होने के चलते उनकी शिकायतें होने के बावजूद भी उन पर कार्रवाई नहीं की जाती। जिसके चलते इनके हौसले बुलंद बने हुए हैं और यह जमकर गरीबों जरूरतमंदों के लिए आने वाला राशन डकार रहे हैं।