मुक्ति-धाम के लॉकर में हैं लॉक है 72 अस्थि-कलश, 22 कलश कर रहे 1 साल से मौत के बाद मोक्ष का इंतजार - Shivpuri News

शिवपुरी। किलर कोरोना ने जिले में सैकडो लोगो की जान चली गई। पिछले डढे माह से मुक्धिाम अग्नि मुक्त नही हुआ हैं एक आकडे के हिसाब से पिछले डेढ माह में लगभग 647 शवो का दाह संस्कार किया गया जिसमें से 236 शवो को दाह संस्कार कोविड की गाईड लाईन के हिसाब से हुआ है। मुक्ति धाम के लॉकर 72 अस्थि कलश रखे हुए हैं जिसमें से 22 कलश पिछले 1 साल से इंतजार कर रहे हैं।

सनातन संस्कृति के हिन्दू धर्म में मानव के 16 संस्कार होते हैं जिसमें से मानव के अंतिम संस्कार को अंतिम 16वां संस्कार माना जाता है। जिसमें 16 संस्कारों में सबसे अंतिम और महत्वपूर्ण संस्कार भी इस महामारी के डर के कारण पूरा नहीं हो पा रहा है। शिवपुरी मुक्तिधाम के लॉकर में करीब 72 लोगों की अस्थियां रखी हुई हैं जिन्हें लेने के लिए अभी तक कोई नहीं आया है। कोरोना की दूसरी लहर तो अब बीत चली है और संक्रमण दर 1 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है, लेकिन सैकड़ों जिंदगियों में यह रिक्तता छूट गई है।

कोरोना ने बना दिया 5 बच्चो को अनाथ

कोरोना महामारी कई परिवारों के लिए ऐसा काल बनकर टूटी कि आने वाले कई सालों में भी उनके घाव नहीं भर सकेंगे। एक ही परिवार में कई लोगों को मौत हुई। कई बच्चे इस दौरान अनाथ भी हो गए। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार 5 बच्चे कोरोना की इस दूसरी लहर में अनाथ हो गए। इसमें तीन बच्चे कमलांगज क्षेत्र और दो श्रीराम कॉलोनी से हैं।

नरेंद्र नगर में पुत्र की कोरोना से मौत होने के बाद पिता कोरोना को हराने के बाद भी गम को नहीं सह पाए और उनकी मौत हो गई। कितने ही बच्चे हैं जो पिता का साया सर से उठ जाने के बाद दादा-दादी से पूछते हैं कि अब हमे खिलौने कौन लाकर देगा।

एक साल से इंतजार कर रहीं 22 अस्थियां

शिवपुरी मुक्तिधाम में कोरोना काल के अलावा 22 लोगों की अस्थियां पिछले 1 साल से अपनों का इंतजार कर रही हैं। अभी तक कोई भी उन्हें लेने के लिए नहीं आया है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी अस्थियों को चिता से समेटकर गंगा में सिराने की परंपरा है। ये अस्थियां दाह संस्कार के तुरंत बाद ही चिता से अस्थि संचय किया जाता हैं और कलश में एकत्रित करके रखाी जाती हैं।

माना जाता है कि मौत के बाद गंगाजी में अस्थि विर्सजन के बाद मौत के बाद मोक्ष का रास्ता खुलता है,लेकिन 22 लोगो के अस्थि कलश अपनो का इंतजार कर रहे हैं और मौत के बाद मोक्ष का इंतजार कर रहे है। ऐसे में अब मानवता ग्रुप ने निर्णय लिया है कि इन लोगों की अस्थियों का विसर्जन वे लोग हरिद्वार या सोरोंजी करके आएंगे। हालांकि इनमें कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनका अंतिम संस्कार प्रशासन द्वारा कराया जाता है क्योंकि शव मिलने के बाद कोई स्वजन का पता ही नहीं चल पाता है।

इनका कहना है

यदि कुछ दिन और कोई भी अस्थियां लेने के लिए नहीं आता है तो हम लॉकडाउन खुलने के बाद इसकी सूचना प्रकाशित कराएंगे। इसके बाद भी कोई नहीं आया तो नगर पालिका की टीम जाकर अस्थियों का विधिवत विसर्जन करेगी। हमारे कामगारों ने ही मुख्याग्नि दी है। हमने अंतिम संस्कार कराया है तो अस्थियां विसर्जित कराने का काम भी करेंगे। यह तो पुण्य का काम है।
जीपी भार्गव, सीएमओ नगर पालिका शिवपुरी