आने वाले हैं गुप्त नवरात्रि क्या खास है इस बार की गुप्त नवरात्रि में, पढिए गुप्त नवरात्रि की कथा - Shivpuri News

शिवपुरी। वर्तमान में अंग्रेजी कलेंडर की बात करे तो फरवरी माह शुरू हो चुका हैं। हिन्दू कलैंडर के हिसाब से माघ का महीना शुरू हो गया है, हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है. क्योंकि इस महीने की नवरात्र गुप्त नवरात्र आती हैं।

इस नवरात्र में व्यक्ति ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करते है. माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है. गुप्त नवरात्र को खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिए बहुत ही खास माना जाता हैं।

साल में आती हैं 4 बार नवरात्रि

साल में चार नवरात्र को खास माना गया हैं। लेकिन साल की दो नवरात्रि को ही अधिकांश लोग जानते है. जो चैत और शारदीय नवरात्र कहलाते है. वहीं, इन दो नवरात्र के अलावा भी दो नवरात्र होते है. जिन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है. यह गुप्त नवरात्र माघ और आषाढ़ मास में आते हैं. माघ महीने में पड़ने के कारण इन नवरात्र को माघी नवरात्र भी कहा जाता है।

इस बार 10 दिन की हैं गुप्त नवरात्रि

हिन्दू कलेंडर के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक माघ गुप्त नवरात्र मनाए जाते हैं. ये नवरात्रि भी नॉर्मल नवरात्रियों की तरह नौ दिन ही मनाई जाती हैं. गुप्त नवरात्रियों में मां भगवती की पूजा की जाती हैं।

गुप्त नवरात्रियों का महत्व चैत्र और शारदीय नवरात्रियों से ज्यादा होता है, क्योंकि गुप्त नवरात्रियों में मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं। गुप्त नवरात्र को खासतौर से तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना आदि के लिए बहुत ही खास माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति ध्यान-साधना करके दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करते है।

इस बार माघ महीने में खास मानी गई मौनी अमावस्या 11 फरवरी को है। इसके अगले ही दिन 12 से माघ की गुप्त नवरात्र शुरू होंगी। खास बात यह है कि फरवरी में शुक्ल पक्ष का पखवाड़ा 15 की बजाए 16 दिन का जबकि गुप्त नवरात्र इस बार 9 की बजाय दस दिन के होंगे।

पंडितों के अनुसार शुक्ल पक्ष व गुप्त नवरात्र में एक-एक दिन अधिक होना शुभ संयोग है, जो मंगलकारी रहेगा। इन योगों में की गई पूजा, दान-पुण्य और खरीद-फरोख्त विशेष फलदायी व समृद्धिकारक रहेगी।

पूजा विधिः होती है 10 महाविधाओ की अराधना

इस नवरात्र को करने में साधक को पूर्ण संयम और शुद्धता के साथ मां भगवती की आराधना करनी चाहिए, गुप्त नवरात्रि की पूजा के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों के साथ-साथ दस महाविद्यियाओं की भी पूजा का विशेष महत्व है, ये दस महाविद्याएं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगुलामुखी, मातंगी और कमला देवी हैं।

इस दौरान मां की आराधना गुप्त रुप से की जाती है, इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्र कहा जाता है. यह नवरात्र भी चैत्र और शारदीय नवरात्रियों की तरह मनाये जाते है. गुप्त नवरात्रों के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है. मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा नवरात्र के भिन्न-भिन्न दिन की जाती है।

गुप्त नवरात्र पौराणिक कथा

गुप्त नवरात्र के महत्व को बताने वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है कथा के अनुसार एक समय की बात है कि ऋषि श्रंगी एक बार अपने भक्तों को प्रवचन दे रहे थे कि भीड़ में से एक स्त्री हाथ जोड़कर ऋषि से बोली कि गुरुवर मेरे पति दुर्व्यसनों से घिरे हैं जिसके कारण मैं किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्य व्रत उपवास अनुष्ठान आदि नहीं कर पाती।

मैं मां दुर्गा की शरण लेना चाहती हूं लेकिन मेरे पति के पापाचारों से मां की कृपा नहीं हो पा रही मेरा मार्गदर्शन करें। तब ऋषि बोले वासंतिक और शारदीय नवरात्र में तो हर कोई पूजा करता है सभी इससे परिचित हैं। लेकिन इनके अलावा वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र भी आते हैं इनमें 9 देवियों की बजाय 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है।

यदि तुम विधिवत ऐसा कर सको तो मां दुर्गा की कृपा से तुम्हारा जीवन खुशियों से परिपूर्ण होगा। ऋषि के प्रवचनों को सुनकर स्त्री ने गुप्त नवरात्र में ऋषि के बताये अनुसार मां दुर्गा की कठोर साधना की स्त्री की श्रद्धा व भक्ति से मां प्रसन्न हुई और कुमार्ग पर चलने वाला उसका पति सुमार्ग की ओर अग्रसर हुआ उसका घर खुशियों से संपन्न हुआ।

माघ गुप्त नवरात्रि 2021

नवरात्रि शुरू 12 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार
नवरात्रि समाप्त 21 फरवरी 2021 दिन रविवार
कलश स्थापना मुहूर्त
सुबह 08 बजकर 34 मिनट से 09 बजकर 59 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक