SP के आदेश को दिखाया ठेंगा, पिछोर में ट्रांसफर के बाद भी नहीं जा रहे है आरक्षक / SHIVPURI NEWS


शिवपुरी। जिले के पिछोर कानून व्यवस्था संभालने वाले पुलिस विभाग में इन दिनों भर्रेसाही का आलम है। स्थानांतरण के बावजूद दो पुलिसकर्मी वर्षों से एक ही थाने में जमे हुए है। जहां उन्हें पुलिस अधीक्षक के आदेश तक का डर नहीं है। जिसके चलते लगातार रिमांडर करने के बाद भी उनका संबंधित थानों से मोहभंग नहीं हो रहा है।

यहां तक की समय-समय पर बैठकों में थानों के जिम्मेदारों को निर्देश भी दिए जा चुके है कि वह अपने थानों से स्थानांतरित कर्मचारियों की रवानगी दें। लेकिन थाना प्रभारियों के चहते होने के कारण आज तक जमे हुए है।

जब तब शिवपुरी जिले के पिछोर अनुविभाग की बात आती है तो बहुत कुछ लीक से अलग हटकर ऐसी जानकारी सामने आती है जो बेहद आश्चर्यजनक होती है। इसी तरह राजापुर, मायापुर खदान पर अवैध उत्खनन के रूप में प्रसिद्धि की बात हो, नदियों से अवैध रेत उत्खनन की बात हो या बाहुबलियों के द्वारा अवेध शराब बिकवाने की सभी पिछोर क्षेत्र से ही निकलकर आता है।

पिछोर अनुविभाग में इस समय जो चर्चा सर्वाधिक गर्म है वहां दो आरक्षकों का प्रभाव, जो इस समय सभी के मुख से सुनी जा सकती है। दरअसल पुलिस विभाग के दो आरक्षक रामअवतार गुर्जर और मलखान सिंह गुर्जर फरवरी 2020 में पुलिस लाइन शिवपुरी व इंदार थाने में क्रमशः स्थानातंत्रित काफी समय यानी वर्षो के बाद हुए थे।

लेकिन पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल का ये आदेश महज कागजी बनकर रह गया और दोनो आरक्षक वही जमे हुए रह गए, जिसके बाद स्वाभाविक रूप से ये चर्चा उठनी शुरु हो गई कि शिवपुरी के ईमानदार और बेहद सजग पुलिस अधीक्षक के आदेश पर भी जिन दो आरक्षको का रुतबा भारी है आखिरकार उनके पीछे ऐसी ताकत क्या है?

दबे मुह किसी ने सीधे पुलिस महानिरीक्षक से सम्बन्ध की बात कही तो किसी ने निरीक्षक के अत्यंत आत्मीय होना उनकी मूल शक्ति बताई। अपने आप मे ये महत्वपूर्ण समाचार बन गया जब पूरे जिले में शायद ही ऐसा कोई थाना होगा जहां वर्षो से जमे आरक्षक से लेकर निरीक्षक तक को बदला नहीं गया हो, फिर पिछोर अनुविभाग के इस थाने पर वर्षो से पदस्थ इन दोनों आरक्षकों के स्थानांतरण का न हो पाना अपने आप मे विभाग की इन दोनों आरक्षकों के सामने समपर्ण की कहानी कह गया।

पुलिस अधीक्षक के आदेश के बाद भी जमे इन दोनों आरक्षकों की पहुच वाकई काफी ऊपर तक है सिद्ध स्वतः ही हो जाती है, जिसके चलते सवाल यह भी खडा होता है कि जिन पर पुलिस अधीक्षक का आदेश लागू नही होता उन पर भला आदेश लागू होगा।

इन दोनों आरक्षकों के इस रुतबे और अंगद के समान जमे पांव की इस समय पूरे पिछोर में सर्वत्र चर्चा है। लोग का यह कहना है कि इनकी पीएचक्यू तक सेटिंग है। वरिष्ट अधिकारी दबाव बनाने की कोशिश किए तो पहले ही इनका रसूख हावी हो जाता है। लेकिन अब पीएचक्यू से भी इनका स्थानांतरण आदेश हो गया लेकिन अभी तक पिछोर थाने में इनका पदस्थ होना समझ से परे है।