नाकों पर शिक्षकों की ड्यूटी लगाकर भूला प्रशासन: ढाई माह से दे रहे ड्यूटी - SHIVPURI NEWS

शिवपुरी।
कोरोना बायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने 30 जून 2020 को आदेश पारित कर जिले के नाको पर अंदर प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की सूची संधारित करने के लिए नाको पर कर्मचारियों व अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।

बदरवास के ग्राम अटलपुर के पास सड़क हादसे में एक शिक्षक की मौत के बाद यह तय किया गया था कि 50 से 60 आयु वर्ग के कर्मचारियों को नाको पर तैनात नही किया जाएगा इतना ही नहीं नाको पर तैनात होने वाले कर्मचारियों को 15-15 दिन में बदला जाएगा।

लेकिन लॉक डाउन खत्म होने बाद भी जिला प्रशासन इस आदेश को लागू करके भूल गया औऱ ढाई माह बीतने के बाद भी वही कर्मचारी नाकों पर ड्यूटी दे रहे है। नाको पर लगे कर्मचारियों की ड्यूटी 15 दिन में नही बदलने का विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है।

गौरतलब है कि लॉक डाउन के दौरान जिले की सीमा पर अधिकांशत: शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई गई है जो बाहर से आने जाने वाले लोगो के नाम , पते, मोबाइल नंबर व कहा जाना है इसकी जानकारी रजिस्टर में अंकित करने हेतु कही एक शिफ्ट तो कही तीन शिफ्टों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।

नाकों पर तैनाती का उद्देश्य पैरामेडिकल स्टाफ के साथ संक्रमित क्षेत्र से आने वाले व्यक्ति का स्केनर मशीन से टेम्परेचर लेकर 37 डिग्री से अधिक होने पर सम्बंधित व्यक्ति की कोविड-19 जांच कराना था, जिससे संक्रमण ना फैले। कुछ दिन चलने के बाद स्केनर टीम हटा ली गई और पैरामेडिकल स्टाफ भी नही आया।

वहीं लॉक डाउन समाप्ति और सीमाओं पर आने जाने पर लगी पाबंदी हट जाने के बाद इस ड्यूटी के कोई मायने नही रह जाते। बावजूद इसके इन शिक्षकों को अभी भी नाको पर तैनात किया गया है । ना तो इनकी 15 दिन में ड्यूटी बदली और ना ही कोई सुविधा दी जा रही है।

इन नाकों पर लगी ड्यूटी

कोविड-19 संक्रमण फैलने से रोकने के लिए जिले भर में इन नाको पर ड्यूटी लगाई गई गई जिनमें शिवपुरी-ग्वालियर मार्ग के गुरावल फाटक सुभाषपुरा, पोहरी का बिलौआ नाका, खनियाधाना के बामोरकला, कोलारस के कोटानाका नाके पर , बदरवास के अटलपुर नाका व करेरा के सिकन्दरा नाके पर शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।