शिवपुरी। आज 11 अगस्त और 12 अगस्त को पंचाग भेद के कारण दो दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी। शिवपुरी में कल 12 अगस्त को जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा। जो शैव सम्प्रदाय से जुड़े हैं वह आज ही जन्माष्टमी मनाएंगे। जबकि वैष्णव सम्प्रदाय मेें उदयकालीन अष्ठमी तिथि का महत्व है इसलिए इस सम्प्रदाय के लोग 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे।
जबकि श्री सम्प्रदाय और निंबार्क सम्प्रदाय में रोहणी नक्षत्र में जन्माष्टमी बनाने की परम्परा है। इस बजह से यह लोग 13 अगस्त को रोहणी नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाएंगे। शिवपुरी में अधिकतर वैष्णव सम्प्रदाय से जुडे लोग निवास करते हैं।
जिस कारण कल ही अधिकतर स्थानों पर जन्म उत्सव का महोत्सव होगा। हालांकि कोरोना काल के चलते महोत्सव में ज्यादा भीड़ एकत्रित नहीं की जाएगी। सिर्फ मंदिरों पर ही भगवान का श्रृंगार और भोग का कार्यक्रम होगा। जिसमें मंदिर के पुजारी और कुछ भक्त ही सोशल डिस्टेंसिंग के साथ उपस्थित रहेंगे।
60 वर्ष बाद तिथि तारीख और नक्षत्र का बन रहा है अद्भूत योग
ज्योतिषाचार्यो के अनुसार इस वर्ष 11 और 12 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। लेकिन इन दोनों दिनों की रात में रोहणी नक्षत्र नहीं रहेगा। इस समय गुरू अपनी स्वयं की राशि धनु में स्थित है। 11 अगस्त की रात 12 बजे भरणी नक्षत्र और 12 अगस्त की रात 12 बजे कृत्तिका नक्षत्र रहेगा।
ऐसा योग्य 60 वर्ष पहले 13 और 14 अगस्त 1960 को बना था। इस साल भी गुरू धनु राशि में थे। 13 अगस्त की रात भरणी और 14 अगस्त की रात को कृत्तिका नक्षत्र था और इन दो दिनों में जन्माष्टमी मनाई गई थी।

