कोलारस में नि:शुल्क बटने वाला बीज कृषि विभाग ने पता नही किसे बांट दिया, आदिवासी वंचित

कोलारस। शिवपुरी जिले के कोलारस कृषि विभाग कार्यालय में जमकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। हरिजन आदिवासी मध्यमवर्ग के किसानों के लिए आने वाला नि:शुल्क बीज यहां पर अनेक वर्षों से अंगद की जगह पैर जमाए बैठे  ग्राम सेवकों द्वारा अपने चहेते किसानों और रिश्तेदारों तथा दबंग किसानों को दे दिया जाता है। इतना ही नहीं फर्जी कागज लगवा कर कृषि विभाग को गुमराह किया जा रहा है।

यहां पर पदस्थ ग्रामसेवक पंचायतों में नहीं जाते इतना ही नहीं कार्यालय में बैठकर ही खानापूर्ति कर लेते हैं।  स्थानीय कृषकों का कहना हैं कि शासन द्वारा किसानों को खेती के तरीके बताए जाते हैं लेकिन आज तक अधिकारियों नहीं बताए गए हैं। इन किसानों को घर पर बैठक अपनी कागजों की खाना पूर्ति की जाती हैं।  कितना बीज खेतों में डाला जाता है प्रदर्शन के लिए आने वाला बीज भी फर्जीवाड़ा कर अपने चहेतों रिश्तेदारों को दे दिया जाता है।

कृषि विभाग में ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को जागरूक करने के लिए आने वाला बजट भी  फर्जी तरीके से कार्यक्रम कर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया जाता हैं। किसानों को कोलारस में ही बुलाकर उनके अंगूठा या हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने आप को किसान का बेटा कहते हैं भाई किसानों की तुलना भगवान से तक कर देते हैं,लेकिन कोलारस क्षेत्र का किसान सबसे अधिक परेशानी में है कृषि मंत्री द्वारा किसानों के हित के लिए भेजी जा रही जन कल्याणकारी योजना का लाभ लेने से तक क्षेत्र के किसान वंचित बने हुए है।

कृषि विभाग कोलारस द्वारा किसानों के लिए आने वाले कृषि यंत्र अपने चहेते दुकानदारों के पास रख दिए? केंद्र की मोदी सरकार से लेकर प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार जहां हरिजन आदिवासियों मध्यम वर्ग के किसानों को खेती को लाभ का धंधा बनाने में जुटे हुए हैं।


शासन द्वारा किसान को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से कृषि यंत्र भी भेजे जाते हैं लेकिन उनके अधीनस्थ अधिकारी किसानों को लाभ दिलाने की जगह स्वयं के लाभ के लिए इन यंत्रों को दुकानदारों को के माध्यम से बिचवा देते हैं। दुकान संचालक से लेकर कृषि विभाग के ग्राम सेवक फर्जीवाड़ा कर अपने चहेतों रिश्तेदारों दबंग किसानों को दे रहे हैं जिसके चलते हरिजन आदिवासी मध्यम वर्ग के किसान जन कल्याणकारी योजनाओं से पूरी तरह से वंचित बने हुए हैं।