बसपा के बेहतरीन प्रर्दशन के बाद भी जीती पोहरी और करैरा में कांग्रेस: आंकडे कांग्रेस के पक्ष में / Shivpuri News

शिवपुरी। शिवपुरी जिले की करैरा और पोहरी विधानसभा क्षेत्र में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की विजय इसलिए उल्लेखनीय रही थी क्योंकि दोनों विधानसभा क्षेत्रों में बसपा प्रत्याशियों ने बहुत मजबूती से चुनाव लड़ा था। पोहरी विधानसभा क्षेत्र में तो बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाह ने भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती को तीसरे स्थान पर ढकेल दिया था।

जबकि करैरा विधानसभा क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव ने 40 हजार से अधिक मत प्राप्त किए। देखना यह है कि क्या कांग्रेस 2018 की जीत को दोनों विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में दोहरा पाएगी अथवा नहीं।

शिवपुरी जिले में सिर्फ करैरा और पोहरी में ही बहुजन समाज पार्टी का मजबूत जनाधार है। करैरा में तो बहुजन समाज पार्टी 2003 के विधानसभा चुनाव में विजयी होने में सफल रही थी। उस समय बसपा प्रत्याशी लाखन सिंह बघेल ने कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों की धूल चटाकर जीत का स्वाद चखा था।

इसके बाद 2008, 2013 और 2018 में भी बसपा ने करैरा विधानसभा क्षेत्र में धमाकेदार प्रदर्शन किया। 2008 में करैरा में मुकाबला भाजपा प्रत्याशी रमेश खटीक और बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल के बीच हुआ था। रमेश खटीक 35 हजार वोट प्राप्त कर 12 हजार मतों से प्रागीलाल से जीतने में सफल रहे थे।

लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी बाबू रामनरेश की जमानत जप्त हो गई थी। 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव ने 40 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे। खास बात यह है कि बसपा की इतनी मजबूती के बावजूद भी कांग्रेस ने 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हांसिल की थी।

जबकि बसपा कांग्रेस के परम्परागत मतों में सैंध लगाने का कार्य करती है। इससे स्पष्ट है कि करैरा में कांग्रेस का अपना मजबूत आधार है। हालांकि कुछ लोग तर्क देते हैं कि करैरा में कांग्रेस को जीत ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रचार के कारण मिली।

लेकिन अब सिंधिया कांग्रेस के स्थान पर भाजपा में हैं और 2018 के कांग्रेस प्रत्याशी जसवंत जाटव भाजपा प्रत्याशी के रूप में इस बार चुनाव लडेंगे। इस कारण इस चुनाव में सिंधिया और जसवंत जाटव की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा भी दांव पर है। यदि भाजपा करैरा में विजयश्री हांसिल करने में सफल होती है तो इसे सिंधिया की जीत का श्रेय दिया जाएगा।

लेकिन भाजपा के लिए दिक्कत यह है कि पिछले डेढ़ साल में पूर्व विधायक जसवंत जाटव की लोकप्रियता में काफी कमी आई है। सत्ता प्रभाव उन पर इस हद तक कि जनता के प्रति अवहेलना के कारण वह जनविश्वास खो चुके थे। इस स्थिति से निपटना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा।

जहां तक पोहरी विधानसभा क्षेत्र का सवाल है तो यहां भी बसपा ने 2008 और 2018 में बहुत मजबूत प्रदर्शन किया था। 2013 में तो बसपा प्रत्याशी लाखन सिंह बघेल के कारण कांग्रेस जीत से बंचित हो गई थी और उस समय कांग्रेस प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती से महज साढ़े 3 हजार मतों से पराजित हो गए थे।

2008 के चुनाव में पोहरी में मुकाबला भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती और बसपा प्रत्याशी हरिवल्लभ शुक्ला के बीच था। जिसमें शुक्ला ने 25 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे और कांगे्रस प्रत्याशी को अपनी जमानत से हाथ धोना पड़ा था। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाह मजबूती से लड़े और उन्होंने 52 हजार से अधिक मत प्राप्त किए। लेकिन उन्हें 8 हजार मतों से कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राठखेड़ा से पराजय मिली।

2018 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती और बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाह के बीच 15 हजार से अधिक मतों का अंतर रहा और चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद भारती को 23 हजार से अधिक मतों से पराजय हांसिल हुई और वह तीसरे स्थान पर रहे। इससे समझा जा सकता है कि पोहरी में बसपा कितनी मजबूत है और बसपा की मजबूती के बावजूद भी कांग्रेस ने जीत पाई।

 इसलिए आगामी उपचुनाव में कांग्रेस भाजपा से बढ़त की स्थिति में इसलिए दिखाई दे रही है क्योंकि उपचुनाव में बसपा उतनी मजबूत नहीं दिख रही। करैरा में तो बसपा प्रत्याशी प्रागीलाल जाटव कांग्रेस में आ गए हैं और पोहरी में बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाह कांग्रेस में जाने की फिराक में हैं। कांग्रेस में शामिल होने के लिए वह वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के यहां चक्कर लगा रहे हैं और अपने  लिए टिकट का आश्वासन मांग रहे हैं।

2018 के कांग्रेस प्रत्याशी अब भाजपा से लड़ेंगे
डेढ़ साल में ही राजनीति कितनी बदल जाती है इसकी मिसाल करैरा और पोहरी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायकों के उदाहरण से समझी जा सकती है। करैरा और पोहरी में कांग्रेस प्रत्याशियों ने 2018 में विजयश्री प्राप्त की थी। लेकिन उस समय जीते करैरा के कांग्रेस प्रत्याशी जसवंत जाटव और पोहरी के कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राठखेड़ा अब भाजपा में हैं और दोनों ही उपचुनाव में भाजपा की ओर से मोर्चा संभालेंगे। जबकि कांगे्रस को अपने प्रत्याशियों का अभी चयन करना है। दोनों विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस टिकट के लिए एक-एक दर्जन से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं।