अनाज मंडी में कर्मचारियों की मनमानी,मंडी सचिव का नहीं है ध्यान | Shivpuri News

शिवपुरी। शिवपुरी अनाज मण्डी में इन दिनों वैसे तो मंडी सचिव व अनुविभागीय अधिकारी द्वारा गेट पर दो कर्मचारी तैनात कर दिए हैं जिससे राजस्व की वसूली बढ़ चढ़ कर की जा रही। लेकिन जैसे ही मंडी सचिव तोमर ने पदभार संभाला है तब से लगातार मंडी आया का ग्राफ गिरावट दर्ज की जा रही है। अनाज मण्डी में पदस्थ कर्मचारी रोड पर दो नम्बर में माल जमकर तुलवा रहे हैं इन कर्मचारियों को और कोई नहीं वल्कि मण्डी सचिव की खुली सह है कई बार मण्डी सचिव को मौखिक रूप से अवगत करा दिया गया लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इससे साफ  नजर आता है कि मण्डी सचिव भी भ्रष्टाचार करवाने में महारथ हांसिल कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शिवपुरी अनाज मण्डी में शासन के नियमों का उल्लंघन हो रहा है अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले लोकल के ही एवं पास के कुछ कर्मचारी अपनी टंागे अंगद जैसी जमा रखे हैं।

वैसे तो नियम यह है कि तीन वर्ष से ज्यादा जिन कर्मचारियों को एक ही संस्था में हो जाते हैं उनका स्थान्तरण होना चाहिए। लेकिन अपनी राजनैतिक पकड़ के चलते कुछ कर्मचारी जो भ्रष्टाचार करवा रहे हैं। वो अनाज मण्डी में कई वर्षों से जमें हुये हैं सभी क्षैत्र के किसानों ने मण्डी आयुक्त से मांग की है की लोकल के कर्मचारियों एवं तीन वर्ष से जमे हुए कर्मचारियों को विधानसभा से बाहर की मंडियों में स्थानांतरण होना चाहिये।

मंडी शुल्क में लगातार आ रही हैं गिरावट

कृषि उपज मंडी शिवपुरी में शुल्क वसूली में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही हैं। जिससे यह साफ जाहिर होता हैं कि किसानों की फसल मंडी प्रांगण में न तुलकर मंडी से बाहर तुलवाई जा रही हैं। जिससे शासन को आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा हैं। कृषि उपज मंडी ने वर्ष 2017-18 में 28583616 रूपए का शुल्क बसूल किया था। वहीं वर्ष 2018-19 में 26485272 रूपए शुल्क ही बसूला गया। वर्ष 2019-20 में अभी तक 18387321 शुल्क की ही बसूली की गई। उपरोक्त आंकड़ों पर एक सरसरी नजर दौड़ाई जाती हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि मंडी शुल्क बसूली में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही हैं।

मंडी के बाहर गेट पर  तुल रहा है माल

कहने को मंडी सचिव आंखों के आगे गेट के बाहर किसानों से माल खुले रूप से खरीदा जा रहा है। इसकी जानकारी मंडी सचिव को होने के बाद भी अनदेखा करने में लगे हुए हें। लेकिन आज दिन तक मंडी सचिव द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। वहीं रेलवे से स्टेशन से लेकर बीच-बीच में किसान की फसल खरीद रहे हैं। वहीं किसानों की फसल सीधी मंडी में नहीं बेची जा रही है। जिससे मंडी इन दिनों सूनसान की स्थिति में पड़ी है। इससे साफ सिद्ध होता है कि मंडी सचिव स्वयं भ्रष्टाचार कराने में लगे हुए है। उन्हें मंडी आय से कोई लेना देना ही नहीं है।

आडग़त के नाम पर किसानों से बसूले जा रहे हैं पैसे

सब्जी मंडी में भी किसानों के साथ शोषण किया जा रहा है। इसी कड़ी में शिवपुरी कृषि उपज मंडी किसान अपनी उपज का विक्रय करने आता है तो उसके साथ आडग़त के नाम पर भी पैसा बसूला जा रहा है। साथ ही हम्मालों द्वारा किसानों की फसल की खुले रूप से चोरी की जा रही है। इस बात की शिकायत स्थानीय किसानों ने मंडी सचिव से भी की लेकिन आज दिन कोई सुनवाई नहीं की गई है।

मंडी में किसानों को नहीं मिल रहा पीने का पानी

शिवपुरी में मंडी दूरदराज ग्रामों से अपनी उपज का विक्रय करने आने वाले किसानों को पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जबकि प्रदेश सरकार किसानों के लिए नित नई योजनायें संचालित कर मंडी केन्टीनों के माध्यम भोजन तक उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है, लेकिन शिवपुरी मंडी इन दिनों पीने का पानी भी ठीक से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इतना नहीं मंडी के अंदर बनी एक पानी की टंकी वर्षो से सफाई तक नहीं हुई जिससे किसान लोग इस दूषित पानी पीने के विवश बने हुए हैं।