कोलारस रजिस्ट्रार कार्यालय: कमीशन के 3 हजार पहुंचते ही हो पाती है रजिस्ट्री

हार्दिक गुप्ता हैप्पी, कोलारस। खबर जिले के कोलारस अनुविभाग के कोलारस रजिस्ट्रार कार्यालय से आ रही है। जहां इन दिनों रजिस्ट्रार कार्यालय जमकर लूट खसोट मचाए हुए है। हालात यह है कि यह किसानो को अपनी रजिस्ट्री से पहले ढाई से लेकर 3 हजार रूपए की राशि रजिस्ट्रार के नाम पर देनी होती है।

तक कही जाकर यह रजिस्ट्री हो पाती है। यह राशि डायरेक्टर रजिस्ट्रार के पास नहीं पहुंचती अपितु यह राशि बकील के माध्यम से ली जाती है। अगर रजिस्ट्रार कार्यायल में यह राशि नहीं दी गई तो फिर रजिस्ट्री में किसानों को परेशान किया जाता है।

जानकारी के अनुसार कोलारस तहसील में विगत 10 दिनों से किसानों पर अनावश्यक स्टाम्प ड्यूटी लगाई जाकर उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। ई रजिस्ट्ररी में विगत 10 दिनों से एक फोल्डर अधिकार अभिलेख का निकलना शुरू हो गया  है। जिसके कॉलम नम्बर 22 में टिप्पणी में भूमियों को सिंचित दर्शाया जा रहा है। जबकि राजस्व खसरा में उक्त भूमि असिंचित और किताब में पड़ती तक दर्ज रहती है। लेकिन अधिक राजस्व बसूलने के चककर में उसको मान्य नही किया जा रहा।

बताया जा रहा है कि असंचित जमींन को कि खसरे में भी असिंचित है परंतु खाने 19 में सिंचित का उल्लेख होने के चलते सभी नियमों को ताक पर रखकर इसी आधार पर असिंचित जमींन की सिंचित के नाम पर रजिस्ट्री की जा रही है।

जिसके चलते भोले भाले किसानों से जमकर राजस्व बसूला जा रहा है। ऐसा नही है कि इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारीयों को नहीं है। अपितु इस आदेश् उच्च अधिकारीयों ने ही अपने अधीनस्थों को दे रखा है।

यहां बता दे कि जब विभाग को ऐसी बसूली करनी ही है तो बर्तमान राजस्व खसरा क्यों मांगा जा रहा है। यदि वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के खसरे को मान्यता न दी जाकर बर्षो पुराने अधिकार अभिलेख की टिप्पणी को मान्यता दी जाना है तो ये जनता का और किसानों का सीधा सीधा आर्थिक शोषण है।क्षेत्रीय नेताओं की जानकारी के अभाव के कारण कोई भी किसानों की आवाज नही उठा रहा है। इस प्रकार अधिकारी अपना कमीशन तो पूरा जेब मे डाल कर जनता को लूट रहे है वही किसानों पर एक कि जगह डेढ़ रुपये का भार आ रहा है।

इस प्रकार किसानों को अब जमीन खरीदना महंगा हो गया है। बैसे ही पूर्व में राजस्व 80 प्रतिशत बड़ा दिया गया है जिसके चलते रजिस्ट्ररी कराना महंगी हो गया है और अब जब वर्तमान खसरे में जमीन असिंचित है तो भी सिंचित के स्टॉम्प रजिस्टार द्वारा लगाए जा रहे है। जो किसी भी लिहाज से उचित नहीं है।

इनका कहना है
हम बरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्य करते है। फिलहाल हम अधिकार अभिलेख के आधार पर ही स्टॉम्प शुल्क ले रहे है जिसमे हम वर्तमान खसरा भी देख रहे है।
रामसेवक चतुर्वेदी, उप पंजीयक कोलारस