लूट का अड्डा बने खरई चैक प्रोस्ट प्रभारी रावत हटाए, रूपकुमार शर्मा के हबाले खरई बैरियल

सतेन्द्र उपाध्याय/शिवपुरी। बीते कुछ दिनों से बसूली का अड्डा बने खरई बैरियल को लेकर लगातार खबरे प्रकाशन के बाद आज खरई बैरियल से रामप्रकाश रावत को हटाया गया है। उसने स्थान पर ग्वालियर आरटीओ कार्यालय में पदस्थ परिवहन निरीक्षक रूपकुमार शर्मा को चैक पौस्ट प्रभारी बनाया गया है। इसके ही प्रधान आरक्षक भरत रावत को भी खरई चैक पोस्ट से हटाया गया है। उन्हें जमालपुरा चैक पोस्ट पर भेजा है।

यहां बता दे कि खरई चैकपोस्ट पर लूट खसौट की लागातार खबरे आ रही थी। इसके साथ ही चैक पोस्ट प्रभारी रामप्रकाश रावत विजयपुर के पूर्व विधायक रामनिवास रावत के करीबी बताए जाते रहे। यह इस चैक पोस्ट पर रामनिवास रावत के नाम पर जमकर बसूली करते रहे।

इस मामले में सबसे अहम बात यह थी कि इस पूरे भ्रष्टाचार की खबर उपर से लेकर नीचे तक सभी हो थी परंतु प्रशासन पूरी तरह से मौन रहा और इन ठेकेदारों को बसूली का खुलेआम लाईसेंस जारी कर दिया था । ऐसा नहीं है कि इस पूरे मामले की सूचना बरिष्ट अधिकारीयों को नहीं हो अपितु इस मामले का बटौना खरई से लेकर भोपाल तक बंटता है। जिसके चलते अधिकारी कार्यवाही करने की जहमत तक नहीं उठा पाते।

खरई में एकीकृत जाँच चोकी को पिछले लंबे समय से गुण्डा तत्वों ने अघोषित रूप से कब्जा रखा है बताया जाता है यहां अवैध वसूली के लिए रखे प्राईवेट गुडो द्वारा कार्यवाही का झूटा डर दिखाकर कागजो को जप्त करने कि धमकी देकर अवैध वसूली होती थी। इससे न केवल राजस्व को हानि होती थी। बल्कि बैरियर पर लूटपाट का माहौल निर्मित कर रखा था। खरई चैक पोस्ट पर बाहारी गुंडो द्वारा परिवहन विभाग के अधिकारी कोटा नाका चैक पोस्ट पर हाईवे नंबर 27 पर चलने वाले वाहनो से खुलेआम अवैध वसूली करवा रहे है।

जिससे हर माह सांठगांठ करने वाले जिम्मेदार अधिकारीयो को हर माह लाखो की काली कमाई हो रही है। यह बता दें कि इस गोरखधंधे में आरटीओ, वाणिज्यकर, मण्डी और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत जगजाहिर थी। जो प्राईवेट गुंडो कि मदद से खुलेआम अधिकारियो के संरक्षण में सरगने के रूप में चैक पोस्क पर कब्जा जमाकर अवैध वसूली का खेल चला रहे थे।

परिवहन विभाग के लाईंसेस की जाती है वसूली

विदित हो कि इस एकीकृत जाँच चोंकी से होकर अंतर्राज्जीय वाहन गुजरते हैं यह मार्ग राजस्थान को जाता है। इस पर से गुजरने वाले वाहनों की चैकिंग फॉरेस्ट, परिवहन, मण्डी और वाणिज्यकर विभाग के द्वारा की जाती है। लोड चैकिंग भी यहीं होती है मगर इन वाहनों से सुविधा शुल्क लेकर वाहनों को एकीकृत सीमा जाँच चोकी पर केन्द्रीय मार्ग से निकाला जाकर इस तमाम जाँच से परे कर दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो इस सेन्ट्रल मार्ग से निकासी के एवज में ओवरलोड ट्रक, ट्रॉला से 20 से 25 हजार रुपए प्रति वाहन वसूले जाते हैं। इस कारोबार को राजस्थान और म.प्र. के माफिया तत्वों से मिलकर शिवपुरी के कुछ स्थानीय गुण्डे संचालित करा रहे थे।

ऐसे होती थी वसूली

यहां परिवहन चैक पोस्ट पर सबसे पहलेे तो आॅवरलोड गाडियों को रौका जाता है। उसके बाद इन गाडियों की तौल की जाती है। जिसमें क्षमता से अधिक माल होने पर इनपर ट्रेक्स बसूलने का प्राबधान है। परंतु जैसे ही आॅवरलोड गाडी सामने आती है। यहां प्रायवेट लोग सक्रिय हो जाते है और इस गाडी को निकालने के एवज में 2000 से 3000 हजार रूपए तक रेट बताते है।

हांलाकि विधिबत तौर से अगर इन गाडियों पर कार्यवाही की जाए तो यह पांच हजार तक पहुंच जाती है। जिसके चलते उक्त वाहन चालक बिना रसीद के ही 2 से 3 हजार के बीच मामला सुलझा कर चलते बनते है। इस राशि को ठेकेदार अपनी जैब में रख लेता है।

यहां बता दे कि उक्त बैरियल पर विजयपुर के विधायक का रिस्तेदार बताकर उक्त प्रधानआरक्षक बसूली का खेल खेल रहा था। यहां पूरी तरह से गुण्डा राज चल रहा था। इस प्रधानआरक्षक ने इस काम के लिए प्रायवेट लोगों को भी लगा रखा था। अगर कोई कुछ परेशानी दिखाता है तो उसके साथ यह प्रायवेट लोग बदसलूकी सहित मारपीट कर गुण्डागिर्दी पर उतारू हो जाते है। उसके बाद जैसे ही यह मामला इनके आकाओं के पास पहुंचता है इस मामले को शांत करा दिया जाता है।