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बडी खबर: मेडिकल कॉलेज में भर्ती घोटाले की जांच फिर होगी, भोपाल में अधिकारियों हुई बैठक | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। कागज के टूकडे से अस्तित्व में आने वाला मेडिकल कॉलेज शुरू से ही विवादित रहा हैं, अपने निर्माण से लेकर आज तक यह शिवपुरी की मिडिया में सुर्खियो में रहा हैं। निर्माण के समय पूरा सघंर्ष इस मेडिकल कॉलेज ने किया हैं।

अब निर्माण और पूरी व्यवस्थाओ के बाद मेडिकल कॉलेज में स्टॉफ भर्ती के विभिन्न पदो पर चयन प्रक्रिया पर प्रतिदिन सवाल उठ रहे थें। यह मामला जनसुनवाई,शिकायत ओर शिवपुरी की मिडिया में प्रकाशन के बाद विधानसभा तक में गूंजा। मेडिकल कॉलेज की भर्ती प्रक्रिया में प्रत्येक भर्ती के लिए विभाग द्धारा बनाए गए आदर्श नियमो को तोडा गया। इर भर्ती सवाल उठ रहा था।

कांग्रेस के पिछोर विधायक केपी सिंह ने पिछली 2 बार से इस मुददे को विधानसभा में उठा रहे थे,अब इसका असर होता दिख रहा हैं। बताया गया हैं कि शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पदों की भर्ती प्रक्रिया की नए सिरे से जांच की जाएगी। इसके लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला की मॉनिटरिंग में आयुक्त निशांत वरवड़े इस मामले की सभी शिकायतों को जांच करेंगे।

अगले विधानसभा सत्र के पहले यह जांच पूरी करके सौंपनी होगी। इसका निर्णय सोमवार को विधानसभा के कक्ष क्रमांक 6 में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में जांच के लिए नाै बिंदु तय किए गए हैं।

विस में इसकी जांच की मांग करने वाले पिछेर विधायक केपी सिंह ने बैठक में प्रमुख सचिव और कमिश्नर से जानना चाहा कि आदर्श भर्ती नियम 2018 में लिखित एवं मौखिक परीक्षा के प्रावधानों को किस सक्षम आदेश से शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता द्वारा विलोपित कर सीधे मैरिट बनाकर भर्ती की करवाई की गई है। डॉ. अरविंद दुबे ने विस्तार से एमसीआई के प्रावधानों के विरुद्ध जाकर की गई फैकल्टीज की भर्ती के प्रमाण भी प्रस्तुत किए।

शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में हुई भर्तियों के मामले में व्यापक गड़बड़ियों को पिछोर विधायक केपी सिंह लगातार दो सत्रों से विधानसभा में उठा रहे हैं। फरवरी में हुए सत्र के दौरान मंत्री ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के डायरेक्टर डॉ. उल्का श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी।

इसमें संभागीय कमिश्नर, चिकित्सा शिक्षा विभाग के उपसचिव और केपी सिंह के जिला अस्पताल के प्रतिनिधि व नेत्र सर्जन डॉ. अरविंद दुबे काे सदस्य बनाया गया था। इस समिति की बैठकों में त्वरित निर्णय न होने से नाराज पिछोर विधायक ने बजट सत्र में ध्यानाकर्षण के जरिये इस मामले में चल रही अनियमितताओं को उठाया।

विधानसभा अध्यक्ष ने अलग से निर्देश जारी कर मंत्री की मौजूदगी में पूरे अफसरों के साथ बैठक के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में आयोजित इस बैठक में विधायक केपी सिंह ने इस कॉलेज की सभी भर्तियों की जांच आदर्श भर्ती सेवा नियम 2018 के आधार पर करने को कहा।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयालक्षमी साधौ के समक्ष विधायक प्रतिनिधि डॉ. अरविंद दुबे ने सिलसिलेवार शैक्षणिक औऱ गैर शैक्षणिक पदों की भर्ती में हुई अनियमितता को प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया। मंत्री ने इन सभी प्रमाणों को सूचीबद्ध कर कार्रवाई के निर्देश प्रमुख सचिव शुक्ला को दिए।

भर्ती प्रक्रिया में इन बिंदुओं पर होगी जांच
आदर्श भर्ती नियम 2018 के अनुरूप क्यों नही हुई भर्तियां।   चयन समिति के गठन में अस्पताल अधीक्षक डॉ. गोविंद सिंह को क्यों नहीं रखा गया। डीन ने किस अधिकार से डॉ. गोविन्द सिंह को अस्पताल अधीक्षक के पद से हटाने की कार्रवाई की।

अस्पताल के सीनियर डॉक्टरों को दरकिनार कर परिवीक्षा अवधि के डॉ. गिरीश चतुर्वेदी को कैसे अपने कार्यालय में अटैच किया और किस आधार पर उन्हें कॉलेज का सहायक अधीक्षक बनाया।   डॉ. ऋतु चतुर्वेदी की नियुक्ति में 80 वर्षीय एक्सपर्ट को क्यों बुलाया गया। उनके अनुभव प्रमाण पत्र की प्रति का परीक्षण पुनः कराया जाएगा। कैसे वह साक्षी और चन्दौसी में एक साथ काम कर रही थी।  

सीनियर रेजिडेंट डेंटल के पद पर कैसे नियुक्ति की गई जबकि डीन द्वारा इंटरव्यू स्थगित करने की सूचना जारी की गई थी। नव चयनित प्रोफेसर कैसे खुद ही अगले चरण की भर्ती में एक्सपर्ट के रूप में सम्मिलित किए गए।  नई भर्ती के डाॅ. केबी वर्मा को किस अधिकार से अधीक्षक बनाया गया।  

बैठक में समिति ने कई सवाल उठाए, जांच के लिए बिंदु तय हुए हैं
हां, बैठक हुई थी और समिति ने कई सवाल उठाए। जांच के लिए बिंदु तय हुए हैं। उन्हीं बिंदुओं पर जांच हाेगी। डॉ. इला गुजरिया, डीन मेडिकल कॉलेज शिवपुरी