स्थानांतरण: कई स्कूलों से शिक्षक कार्यमुक्त, शालाओं में ताले, अधिकारी को पता ही नहीं | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। शिक्षा के प्रति शासन कितना गंभीर हैं जो इस तथ्य से स्पष्ट होता हैं कि शिवपुरी जिले के करई संकुल में ही लगभग एक दर्जन विद्यालय शिक्षक विहीन होने पर भी शिक्षा अधिकारी गंभीर नहीं है और न ही जिला प्रशासन द्वारा इस ओर गंभीरता से विचार नहीं किया गया। जबकि शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान करने करोड़ों रूपए की धन राशि विद्यालयों के निर्माण पर व्यय की जा चुकी हैं।

डीपीआईपी एवं सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, जैसी तीन बड़ी योजनायें प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के उन्नयन हेतु प्रारंभ की गई थी। वह अब ध्वस्त नजर आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षित करना तो दूर यहां तो विद्यालयों में ताले लटके हुए हैं। तब ऐसी परिस्थिति में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे कैसे शिक्षित हो सकेंगे? जबकि शासन द्वारा जिला स्तर से लेकर, तहसील, ब्लॉक, संकुल केन्द्रों पर अधिकारी व कर्मचारी तैनात किए गए हैं। जिनके द्वारा महज कागजी कार्यवाही कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती हैं। लेकिन हकीकत से शासन को रूबरू नहीं कराया जाता।

इन विद्यालयों में नहीं शिक्षक

शिवपुरी जिले के करई संकुल में लगभग एक दर्जन विद्यालय ऐसे हैं जहां पर शिक्षक ही नहीं हैं। उन पर ताले लटके हुए हैं। जिनमें शासकीय हाई स्कूल झण्डा, शासकीय हाई स्कूल सड़, शासकीय माध्यमिक विद्यालय कडोरा इमलिया,शासकीय माध्यमिक विद्यालय तालमेव, शासकीय माध्यमिक विद्यालय दावर भाट, शासकीय प्राथमिक विद्यालय वीरपुर, शासकीय प्राथमिक विद्यालय चंदौरा, शासकीय प्राथमिक विद्यालय आदवासी टपरा, शासकीय प्राथमिक विद्यालय टोड़ा पवार, शासकीय माध्यमिक विद्यालय चंदपठा शामिल हैं।

आखिर क्यों हुई शिक्षक विहीन शालायें

शालाओं में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शासन कितना गंभीर हैं इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि पूर्व में शासन के सख्त निर्देश युक्तियुक्त करण की प्रक्रिया के जारी रहते हुए भी शालायें शिक्षक विहीन कैसे हो गई? जिला शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य एवं वरिष्ठ अधिकारियों को उक्त तथ्य की जानकारी क्यों नहीं हो सकी? लगभग एक दर्जन विद्यालयों के शिक्षक विहीन होने की प्रक्रिया कोई एक दिन में तो नहीं हुई होगी। तब फिर शिक्षा विभाग मैं कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी क्या कर रहे हैं? क्या शिक्षक विहीन हुए शालाओं से मासिक पत्रक एवं जानकारी नहीं मंगाते हैं, तो क्यों? जबकि देखने में यह आया हैं कि शिक्षा विभाग में कई ऐसे शिक्षक हैं जिनका पदांकन तो ग्रामीण क्षेत्रों में हैं लेकिन वे शिक्षा अधिकारी या किसी राजनेता के दाऐं वाऐं घूमते हुए नजर आते हैं। अथवा अपनी राजनैतिक पहुंच के जरिये संलगनी करण कराकर शहरी या कस्वाई क्षेत्र में आ जाते हैं। जिसकी बजह से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालय शिक्षक विहीन हो चुके है।

आखिर कैसे हो गए शिक्षक कार्य मुक्त
लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त मध्य प्रदेश शासन द्वारा स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि प्राचार्य व शिक्षकों को स्थानांतरण होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था न होने तक कार्यमुक्त न किया जाए। जबकि एक दर्जन शिक्षकों को फौरी तौर पर बीएड प्रशिक्षण के लिए तत्काल कार्यवाही करते हुए कार्यमुक्त कैसे कर दिया गया? यहां पर यह भी नहीं देखा गया कि इसका छात्रों की शिक्षा पर कैसा प्रभाव पड़ेगा? तब फिर उक्त 11 विद्यालयों के शिक्षक कार्यमुक्त कैसे कर दिए गए? जबकि शासन द्वारा अतिथि शिक्षक रखने की भी प्रक्रिया अपनाई गई है। जिसके तहत जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी महसूस की जाती हैं वहां पर अतिथि शिक्षक रखे जा सकते हैं। तब उक्त विद्यालयों में अतिथि शिक्षकों व्यवस्था क्यों नहीं की गई?